TRENDING NOW

Indian Book Reviews

About the Book 

The land of Meluha is an empire created by Lord Rama, and it is ruled by the Suryavanshis. This empire is powerful and proud, however, the Saraswati river that is their source of water is slowing drying up. On top of that, the empire is at war with the Chandravanshis who have allied with The Nagas, a group of sinister and deformed human beings who have extraordinary martial art skills.
The Immortals Of Meluha, published in 2010, is the first story of the trilogy. Daksha, the king of the Suryavanshis, realizes that his empire needs help. He invites a tribe from Tibet to help him fight off the enemies. The Tibetan Guna tribe is lead by Shiva, who is a fearless soldier, and the only one who does not fall ill on arriving at Meluha. To everyone's surprise, Shiva’s throat turns blue.
The locals believe that this warrior is their fabled saviour Lord Shiva, also known as Neelkanth. Shiva goes to Devagiri to meet Daksha and his daughter Princess Sati. There, he learns about the dangerous wars and terror attacks that the Chandravanshis have carried out on the Meluhans.
The brave warrior gets enraged, and declares a full war on the enemy. Readers will find this mythological fantasy to be gripping and exciting. Questions about Shiva’s duty, destiny, and karma arise throughout the book. The author has written a book that is adventurous, mystifying, and captivating, but at the same time he also has thrown light onto the subjects of what is evil, and who is truly a hero.
This page-turner is a treat for readers who enjoy history, fantasy, and adventure. The Immortals Of Meluha received good reviews from leading newspapers, and was a bestseller within its first week of release.

About the Author

Mumbai-born Amish Tripathi gave up a highly successful career as a banker following the enormous success in India of his first book, The Immortals of Meluha. Amish is passionate about history, mythology and philosophy, as well as world cultures and religions. He lives in Mumbai.

पुस्तक का विवरण
Author
Amish Tripathi
ISBN
978-16-236565-4-6
Language
English
Page & Type
Paperback, Hardcover
Genre
Fiction
Pages
312
Publish On
2015
Price
2,030
Publisher
Jo Fletcher Books

इस पुस्तक को यहां से प्राप्त कर सकते हैं-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Amazon
Paperback / Hardcover


Indian Book Reviews

धर्मवीर भारती के इस उपन्यास का प्रकाशन और इसके प्रति पाठकों का अटूट सम्मोहन हिन्दी साहित्य-जगत् की एक बड़ी उपलब्धि बन गये हैं। दरअसल, यह उपन्यास हमारे समय में भारतीय भाषाओं की सबसे अधिक बिकने वाली लोकप्रिय साहित्यिक पुस्तकों में पहली पंक्ति में है। लाखों-लाख पाठकों के लिए प्रिय इस अनूठे उपन्यास की माँग आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी कि उसके प्रकाशन के प्रारम्भिक वर्षों में थी।–और इस सबका बड़ा कारण शायद एक समर्थ रचनाकार की कोई अव्यक्त पीड़ा और एकान्त आस्था है, जिसने इस उपन्यास को एक अद्वितीय कृति बना दिया है। इस उपन्यास के नये संस्करण पर दो शब्द लिखते समय मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि क्या लिखूँ ? अधिक-से-अधिक मैं अपनी हार्दिक कृतज्ञता उन सभी पाठकों के प्रति व्यक्त कर सकता हूँ जिन्होंने इसकी कलात्मक अपरिपक्वता के बावजूद इसको पसन्द किया है। मेरे लिए इस उपन्यास का लिखना वैसा ही रहा है जैसा पीड़ा के क्षणों में पूरी आस्था से प्रार्थना करना, और इस समय भी मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं वह प्रार्थना मन-ही-न दोहरा रहा हूँ, बस....
-धर्मवीर भारती

About the Author

धर्मवीर भारती  का जन्म 25 दिसंबर, 1926 को अतारसुइया, इलाहबाद में हुआ था। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध हस्ताक्षर धर्मवीर भारती आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक विचारक थे।  आप हिंदी की प्रमुख साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के प्रधान संपादक थे। धर्मयुग का संपादन डॉ धर्मवीर भारती की मुख्य पहचान बना लेकिन इससे पूर्व उनकी रचनाएँ - गुनाहों का देवता, ठंडा लोहा, कनुप्रिया और सूरज का सातवाँ घोड़ा इत्यादि हिन्दी साहित्य में अपनी पहचान बना चुकी थीं। आपने उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध, कविता विधाओ में साहित्य सृजन किया है। 

पुस्तक का विवरण
Author
धर्मवीर भारती
ISBN
978-93-263506-0-0
Language
Hindi
Page & Type
Paperback
Genre
Fiction
Publish On
2011
Price
₹ 180
Publisher
Bhartiya Gyanpith Prakashan

इस पुस्तक को यहां से प्राप्त कर सकते हैं-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Flipkart
Paperbck
Amazon
Paperback


Indian Book Reviews

यह उपन्यास एक ऐसी लड़की की कहानी पर आधारित है जिसे अपने परिवार से धोखा करने का सबक एक बहुत बड़ी कीमत देकर चुकाना पड़ा। अपने परिवार को धोखा देकर उसे मालूम हुआ कि समाज में एक लड़की के लिए परिवार की भूमिका क्या होती है और शादी के बाद पति का महत्व क्या होता है। जिसने अपने प्यार को पाने के लिए अपने परिवार का त्याग किया, लेकिन फिर उसका प्यार उससे दूर चला गया, लेकिन क्यों! और फिर कुछ ऐसी घटनाएं जिन्हें वह जिन्दगी भर नहीं भूल पायी। ऐसे ही सवालों के जवाब के लिए पढ़े- तलाश।

पुस्तक का विवरण
Author
Dr. Fakhre Alam Khan 'Vidyasagar'
ISBN
978-81-934483-9-7
Language
Hindi
Page & Type
E-Book
Genre
Fiction
Publish On
2018
Price
$1.50
Publisher
Prachi Digital Publication

इस पुस्तक को यहां से प्राप्त कर सकते हैं-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Google Play
E-Book
Buy Here
Kobo
E-Book
Buy Here
Readwhere
E-Book
Buy Here
iBooks
E-Book
Buy Here
Smashwords
E-Book
Playester
E-Book
Buy Here
24Symbols
E-Book
Buy Here
Scribd
E-Book
Buy Here
Prachi Digital Store
E-Book
Buy Here
Amazon
E-Book
Buy Here



Indian Book Reviews

वंश के अभिमान में डूबे एक ऐसे इंसान की कहानी, जिसे वंश चलाने के लिए पुत्र की चाहत थी। पत्नी से पुत्र के बजाय पुत्री के रूप में संतान मिली तो ठाकुर ने उसे तुरंत नजरों से दूर कर दिया। अगली संतान की प्राप्ति हुई तो वह किन्नर था...ईश्वर की लीला ने अपना रंग दिखाना आरम्भ किया तो ठाकुर के सामने पश्चाताप में सिर झुकाने के अलावा कोई चारा न था।

वरिष्ठ उपन्यासकार एवं स्क्रीनप्ले आर्टिस्ट आबिद रिज़वी की जुबानी - 
एक ऐसा किरदार जो समलिंगी है। दुनिया उसे ‘किन्नर’ सम्बोधन देती है। जिसे ईश्वर उच्च कुल में पैदा करता है, पर वह वेश्या के कोठे पर परवरिश पाता है। उसकी रगों में दौड़ता खून उसे मानवीय अनुभूतियाँ, त्याग और बलिदान की भावना से लबरेज़ रखती हैं। यही वजह हैं कि कथानक के शुरू से अंत तक किन्नर ही, कहानी के केन्द्र में मौजूद रहकर अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाता रहता है। जब उसे मानवीय संवेदनाओं के इम्तहान से गुज़रना पड़ता है तो उसे त्यागने वाले भी उसे बांहें पसारे अपनाने के लिए लालायित हो उठते हैं।


पुस्तक का विवरण
Author
Dr. Fakhre Alam Khan 'Vidyasagar'
ISBN
978-93-878567-5-2
Language
Hindi
Page & Type
E-Book
Genre
Fiction
Publish On
2018
Price
$2.00
Publisher
Prachi Digital Publication

इस पुस्तक को यहां से प्राप्त कर सकते हैं-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Google Play
E-Book
Buy Here
Kobo
E-Book
Buy Here
Readwhere
E-Book
Buy Here
iBooks
E-Book
Buy Here
Smashwords
E-Book
Playester
E-Book
Buy Here
24Symbols
E-Book
Buy Here
Scribd
E-Book
Buy Here
Prachi Digital Store
E-Book
Buy Here
Amazon
E-Book
Buy Here



Indian Book Reviews

In this novel he has beautifully presented the journey of a girl who has been betrayed in her life and after that she decided to take revenge from the one who betray her (as the name of the novel itself tells that someone’s revenge is their). Two things that can be learn from this novel according to me, one is that we should never get depressed in our life and never thought to end our life as the main character of the novel “Rashmi” deals with great difficulties but she faces the world & live her life & another is that God is there. If one do bad with another person he/she will face in the world itself as the novel’s story is very interesting according to me, people will love this novel.

पुस्तक का विवरण
Author
Dr. Fakhre Alam Khan 'Vidyasagar'
ISBN
978-93-878567-7-6
Language
English
Page & Type
E-Book
Genre
Fiction
Publish On
2018
Price
$3.50
Publisher
Prachi Digital Publication

इस पुस्तक को यहां से प्राप्त कर सकते हैं-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Google Play
E-Book
Buy Here
Kobo
E-Book
Buy Here
Readwhere
E-Book
Buy Here
iBooks
E-Book
Buy Here
Smashwords
E-Book
Playester
E-Book
Buy Here
24Symbols
E-Book
Buy Here
Scribd
E-Book
Buy Here
Prachi Digital Store
E-Book
Buy Here
Amazon
E-Book
Buy Here



Indian Book Reviews

गुमनाम लम्हे - डा. फखरे आलम खान की 27 कहानियों, लेखों व व्यंग्यों का संग्रह है। जिसमें उन्होने समाज के विभिन्न मुद्दों और समस्याओं को कहानी व व्यंग्य का रूप देकर पाठय बना दिया है। इस किताब में डा. खान ने समाज के आस-पास की घटनाओं को बहुत ही करीने से कहानियों में ढ़ाल दिया है। कहानियों को पढ़कर आपको अहसास होगा कि उन्होने समाज में घुलकर उसे महसूस करके ही कहानियों को चुना है और रचित किया है।

पुस्तक का विवरण
Author
डा. फखरे आलम खान 'विद्यासागर'
ISBN
978-81-934483-1-1
Language
Hindi
Page & Type
102, E-Book
Genre
Fiction
Publish On
2018
Price
₹ 102
Publisher
Prachi Digital Publication

इस पुस्तक को यहां से प्राप्त कर सकते हैं-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Google Play
Paperback, E-Book
Buy Here
Kobo
Paperback
Buy Here
Readwhere
Paperback, E-Book
Buy Here
iBooks
Paperback
Buy Here
Smashwords
E-Book
Playester
E-Book
Buy Here
24Symbols
E-Book
Buy Here
Scribd
E-Book
Buy Here
Prachi Digital Store
E-Book
Amazon
E-Book



Indian Book Reviews

पुस्तक के बारे में

प्रस्तुत काव्य-संग्रह 'चीख़ती आवाज़ें' उन दबी हुई संवेदनाओं का अनुभव मात्र है जिसे कवि ने अपने जीवन के दौरान प्रत्येक क्षण महसूस किया। हम अपने चारों ओर निरंतर ही एक ध्वनि विस्तारित होने का अनुभव करते हैं परन्तु जिंदगी की चकाचौंध में इसे अनदेखा करना हमारा स्वभाव बनता जा रहा है। ये ध्वनियाँ केवल ध्वनिमात्र ही नहीं बल्कि समय की दरकार है। मानवमात्र की चेतना जागृत करने का शंखनाद है। यही उद्घोषणा जब धरातल पर आने की इच्छा प्रकट करती है तब कलम से स्वतः ही संवेदनायें शब्दों के रूप में एक 'चलचित्र' की भाँति प्रस्फुटित होने लगती हैं और मानवसमाज से एक अपेक्षा रखती है कि इन मृतप्राय हो चुके संवेदनाओं को पुनर्जीवित होने का वरदान मिले। प्राकृतिक संसाधनों का ध्रुवीकरण आज एक वृहत्त समस्या बनती जा रही है। हम अपने स्वार्थ के वशीभूत, नैतिक मूल्यों की निरंतर अवहेलना करते चले जा रहे हैं। एक तबका और अधिक धनवान होने की दौड़ में भाग रहा है जबकि दूसरा तबका निर्धन से अतिनिर्धनता की दिशा में अग्रसर है। संसाधनों का ध्रुवीकरण इसका मूल कारण है। एक तरफ 'मज़दूर' और दूसरी तरफ 'स्त्री' दोनों की दशा और दिशा आज समाज में सोचनीय है। 'चीख़ती आवाज़ें' काव्य-संग्रह में संकलित सभी रचनायें किसी न किसी 'भाव' में मानवसमाज में फैले असमानता का प्रखर विरोध करतीं हैं।

लेखक के बारे में

लेखक का जन्म १९८७ वाराणसी के एक मध्यमवर्गीय 'कृषक' परिवार में हुआ है। आपने विज्ञान परास्नातक, अणु एवं कोशिका आनुवंशिकी विज्ञान में विशेष दक्षता प्राप्त की है। आपका साहित्यिक जीवन काशीहिंदू विश्वविद्यालय में छात्र जीवन के दौरान प्रथम रचना 'बेपरवाह क़ब्रें' से साहित्यिक यात्रा का आरम्भ से प्रारम्भ हुआ है। अबतक कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित हो चुकी है। वर्तमान में 'एकलव्य' और 'लोकतंत्र' संवाद मंच नामक ब्लॉगों का संचालन कर रहे हैं।

पुस्तक का विवरण
Author
ध्रुव सिंह 'एकलव्य'
ISBN
978-93-87856-76-9
Language
Hindi
Page & Type
102, E-Book & Paperback
Genre
Poetry
Publish On
2018
Price
₹ 110 (Paperback), ₹ 55 (E-Book)
Publisher
Prachi Digital Publication

यहां से प्राप्त करें-

BOOK STORE’S
BOOK FORMAT
BUY LINK
Flipkart
Paperback
Prachi Digital Store
Paperback, E-Book
Amazon
Paperback, E-Book
Snapdeal
Paperback
Google Play
E-Book
Kobo
E-Book
Readwhere
E-Book
iBooks
E-Book
Smashwords
E-Book
Playester
E-Book
24Symbols
E-Book
Scribd
E-Book
Buy Here