पुस्तक के बारे में

यह उपन्यास आधारित है एक ऐसे राक्षस पर जिसने मजहब की सुरक्षा हेतु मुखौटा पहना और अपने कुछ खौफनाक व सनसनीखेज कारनामों से मानवता को तार-तार कर सिद्ध किया कि वह मानवता का सर्वश्रेष्ठ पुजारी है। इस राक्षस के सनसनीखेज खुलासे के साथ इसके खौफनाक अन्जाम व कारनामे उपन्यास में खूबसूरती से सजाये गये हैं। यह एक पारिवारिक उपन्यास है। आशा है कि इस उपन्यास रूपी संदेश को हर एक देशवासी की सराहना प्राप्त होगी। साथ ही रोचक कहानियां व उपन्यासों के पाठकों के लिए यह एक सुनहरी तोहफा है।


गज़ाला करीम

भारत की प्रथम महिला हिन्दी जासूसी उपन्यासकार गज़ाला करीम जिनका शुभ आरम्भ जासूसी हिन्दी लेखन में सन् 2004 में स्थापित हुआ तथा कुछ जटिल परिस्थितियों के उत्पन्न होने के कारण इन्होंने लेखन क्षेत्र से 2008 में दूरी बना ली। फिर एक बार लेखन क्षेत्र में इनका प्रारम्भ 2018 में हो रहा है। फिर से एक बार उनका हार्दिक स्वागत है! उपन्यासों के माध्यम से सदा ही गज़ाला करीम ने देश-विदेशों के एहम मुद्दो को उठा मैसेज के रूप में सभी तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। पूरा विश्वास है कि उनका यह उपन्यास भी हार्दिक रूप से सराहा जाएगा। पाठक आज भी हार्दिक रूप से उनके उपन्यासों की ना केवल सराहना करेंगे, बल्कि अपने अमूल्य विचार भी व्यक्त करेंगे।


BOOK DETAILS
Binding Type
Pages
Price
Language
ISBN
Paperback
102 pages
INR 110
Hindi
978-93-87856-76-9

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