ये प्यारी कविता उस “परी” के लिए जो हमेशा मेरे पास रहेगी…और उन सभी के लिए भी जो एक दूसरे से जुड़े हैं बंधे है और उन्हें कभी खोना नहीं चाहते…


About the Book 

लेखक के शब्दों में-
ये प्यारी कविता उस “परी” के लिए जो हमेशा मेरे पास रहेगी…और उन सभी के लिए भी जो एक दूसरे से जुड़े हैं बंधे है और उन्हें कभी खोना नहीं चाहते…

About the Author

थोड़ा पागल हूँ, नासमझ भी, नादान भी हूँ पर नादानी नहीं करता, बदमाशियों ने तो आज इतना बड़ा किया है “मुश्किलें जो है ना ऑटो और रिक्शा की तरह आती जाती है…” पर अपने साथ कुछ यादें छोड़ जाती है। बस! अब अपने बारे में क्या बोलू, जैसा भी हूँ पन्नो में हूँ, शब्दें बिखरी पड़ी है उसे ही बटोरने में लगा हूँ…

Description of Book

Author
Chirag Gupta
ISBN
978-9388427722
Language
Hindi
Binding
Paperback
Genre
Poetry
Pages
78
Publishing Year
2018
Price
205.00
Publisher
BlueRose Publishers





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