मेरे आदर्श मेरे स्वर्गवासी बाबूजी (पिताजी) रहे हैं, क्योंकि मेरे बाबूजी उस दौर में जब हमारे गाँव में लोग लड‌कियों को पढाने के खिलाफ थे तब मेरे बाबूजी ने न सिर्फ मुझे पढ़ाया बल्कि गाँव के कुछ और लोगों को भी अपनी बेटियों को पढा‌ने के लिए प्रेरित किया। उनमें सच को सच और झूठ को झूठ कहने का साहस था और यही शिक्षा उन्होंने हम भाई बहन को भी दिया।



indiBooks : आपका संक्षिप्त परिचय आपके शब्दों में?
मालती मिश्रा : मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूँ, मेरा जन्म ग्राम- देवरी, जिला- संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। मेरी शिक्षा कानपुर से तथा परास्नातक की शिक्षा दिल्ली से हुई। वर्तमान समय में मैं दिल्ली में ही रहती हूँ। मैं प्राइवेट विद्यालय में हिंदी विषय की अध्यापिका हूँ। लेखन मेरा शौक है।

indiBooks : आपकी पहली पुस्तक कब प्रकाशित हुई थी?
मालती मिश्रा : मेरी पहली पुस्तक फरवरी 2017 में प्रकाशित हुई।

indiBooks : पहली पुस्तक के विषय के बारे में कुछ बताएं। 
मालती मिश्रा : मेरी पहली पुस्तक ‘अंतर्ध्वनि’ एक काव्य संग्रह है, इसमें 73 कविताएँ संकलित हैं।

indiBooks : आपको पुस्तक प्रकाशन करने के लिए प्रेरणा कहां से मिली?
मालती मिश्रा : मेरे ब्लॉग पर मेरी कविताएँ पढ़कर मेरे फॉलोअर्स और मित्रों ने ही मुझे प्रकाशन के लिए प्रेरित किया।

indiBooks : पहली पुस्तक प्रकाशित कराने में क्या आपको किसी परेशानी का सामना करना पड़ा? यदि हां तो वो परेशानी क्या रहीं? 
मालती मिश्रा : बस पब्लिकेशन ढूढ‌ने में ही थोड़ी अनिश्चितता थी मैं किसी को जानती नहीं थी, फिर फेसबुक पर ही एक नए प्रकाशन के ऑफर को पढ़ा, जो कि औरों के मुकाबले सस्ता था। फिर फोन पर बात करके थोड़ा रिस्क लेते हुए सोचा, करवाते हैं। 

indiBooks : आपकी अब तक की प्रकाशित पुस्तकों के बारे में कुछ बताएं।
मालती मिश्रा : अब तक मेरी तीन एकल पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, एक ‘अंतर्ध्वनि’ (काव्य संग्रह), दूसरी है- ‘इंतज़ार’ अतीत के पन्नों से, ये एक कहानी संग्रह है। तीसरी मेरी एक काव्य संग्रह की ई-बुक है ‘मैं ही साँझ और भोर हूँ’। इसके अलावा मेरी कई साझा संग्रह भी आ चुकी हैं।

indiBooks : आप अपने जीवन में किसे अपना आदर्श मानते है और क्यों?
मालती मिश्रा : मेरे आदर्श मेरे स्वर्गवासी बाबूजी (पिताजी) रहे हैं, क्योंकि मेरे बाबूजी उस दौर में जब हमारे गाँव में लोग लड‌कियों को पढाने के खिलाफ थे तब मेरे बाबूजी ने न सिर्फ मुझे पढ़ाया बल्कि गाँव के कुछ और लोगों को भी अपनी बेटियों को पढा‌ने के लिए प्रेरित किया। उनमें सच को सच और झूठ को झूठ कहने का साहस था और यही शिक्षा उन्होंने हम भाई बहन को भी दिया।

indiBooks : अब तक प्रकाशकों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
मालती मिश्रा : मैंने अभी तक सिर्फ एक ही प्रकाशक से अपनी दोनों पुस्तकें प्रकाशित करवाई हैं। तो मैं ज्यादा कुछ नहीं जानती प्रकाशकों के विषय में, पर यहाँ से जो अनुभव मिला है वो तो यही है कि पुस्तक प्रकाशित करवाओ और भूल जाओ।

indiBooks : आप लेखन के लिए समय कैसे निकालते है?
मालती मिश्रा : लेखन मेरा शौक है इसलिए यदि दिन में समय नहीं होता तो रात को लिखती हूँ चाहे अपनी नींद थोड़ी कम करनी पड़े।

indiBooks : आपकी पसंद की लेखन विद्या कौन सी है?
मालती मिश्रा : वैसे मैं कविता, लेख, समीक्षा और कहानी लिखती हूँ पर मेरी पसंदीदा विधा है- कहानी।

indiBooks : क्या आपका कोई ideal लेखक या लेखिका  है?
मालती मिश्रा : जी हाँ,  मुंशी प्रेमचंद

indiBooks : आपके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है, जिसने आपके मित्रों व परिवार को बेहद खुशी दी?
मालती मिश्रा : मेरे लेखन का मूर्त रूप लेकर आना।

indiBooks : क्या आपके जीवन में कोई ऐसी घटना घटित हुई है, जिसे आप कभी भूलना नहीं चाहेंगे?
मालती मिश्रा : मेरी हर वो उपलब्धि जो मुझे आगे बढ़ने को प्रेरित करती हो।

indiBooks : हिन्दी साहित्य का भविष्य आपकी नज़र में कैसा है?
मालती मिश्रा : आजकल जिस प्रकार से लोग हिंदी के प्रति जागरूक हो रहे हैं उसको देखते हुए आशा की जा सकती है कि हिंदी साहित्य का भविष्य उज्ज्वल होगा। हाँ, रास्ता कठिन है बहुत अधिक मेहनत की आवश्यकता है पर सोशल मीडिया का दौर है तो यह हो सकता है।

indiBooks : आप अपने पाठकों से क्या कहना चाहेंगे।
मालती मिश्रा : यही कि अपनी मातृभाषा व राष्ट्र्भाषा के प्रति सम्मान दर्शाते हुए अन्य भाषाओं के साथ हिंदी को नियमित रूप से पढ़ने की आदत डालें, किताबें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं। आपका पढ़ना ही हिंदी लेखन को बढ़ावा दे सकता है।


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