“नया नया सा एहसास” काव्य संग्रह के लेखक मो. मंजूर आलम जी के साथ एक मुलाकात

0
325

पिछले दिनों ही प्रकाशित पुस्तक “नया नया सा एहसास” के लेखक एवं बिहार सरकार के अधीन मध्य विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत मो. मंजूर आलम जी से एक साक्षात्कार किया गया। मंजूर जी का यह प्रथम काव्य संग्रह है जो प्रकाशित हुआ है। स्वभाव से मृदुभाषी एवं शिक्षा सेवा के प्रति समर्पित मंजूर जी से कई सारी बातें हुई। हमने उनसे कई सारे सवाल किये, जिसके उन्होने बहुत ही सुन्दर जवाब दिये, जिनमें से कुछ प्रमुख अंश आपके लिए प्रस्तुत हैं-

indiBooks : मंजूर आलम जी, क्या आप अपना परिचय अपने शब्दों में हमारे पाठकों को देना चाहेंगे?
मंजूर आलम : मैं साधारण परिवार में जन्मा हूँ और अपनी शिक्षा दीक्षा के बल पर आज बिहार सरकार के अधीन मध्य विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर कार्य कर रहा हूँ। उच्च माध्यमिक “कक्षा” में पढ़ने के समय से ही पत्र-पत्रिकाओं, अखबारों में लिखने भी लगा था। मेरी प्रथम रचना ‘‘समय का महत्व’’ एक बाल कहानी है, जो दिनांक 09.06.1994 को हिन्दुस्तान अखबार के सोपान में प्रकाशित हुई थी। तब से लिख ही रहा हूँ। बीच में नौकरी की व्यस्तता के चलते लिखना छोड़ दिया था लेकिन सोशल मीडिया में सक्रिय था।

indiBooks : ‘नया नया सा एहसास’ आपका प्रथम काव्य संग्रह है, इसके बारे में कुछ बताएं। 
मंजूर आलम : ‘नया नया सा एहसास’ 55 कविताओं का एक काव्य संग्रह है। यह काव्य संग्रह मेरे जीवन के कई वर्षों का अनुभव है। इस काव्य संग्रह में बचपन है, वर्तमान है और भविष्य भी है, जो पाठक स्वयं भी महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा इन कविताओं को लिखते हुए मैने प्रयास किया है कि जब आप पढ़ना शुरू करेंगें तो आपको ऐसा महसूस होगा कि यह आप ही पर लिखी गई है या आपके आसपास की ही कोई घटना है। इन कविताओं में ज्यादातर उन घटनाओं और मुद्दों को शामिल किया है जो मैंने अपने आस-पास महसूस किया है, या जो हमारे रोजाना के जीवन में घटती है लेकिन हम समयाभाव के कारण ध्यान नहीं दे पाते हैं। इसके अलावा कई ऐसी रचनाएं भी शामिल हैं जो आपको आपके पुराने बचपन की याद दिला देगी, जब टेक्नोलॉजी नहीं हुआ करती थी, लेकिन प्यार था, खेल था और भी बहुत कुछ। बाकी तो पाठक स्वयं पढ़ेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा।

indiBooks : पुस्तक का नाम ‘नया नया सा एहसास’ रखने के पीछे क्या कारण रहा?
मंजूर आलम : वर्षों पुरानी एक ख्वाहिश जो पूरी होने जा रही थी। मैं सोच रहा था कि जब मेरी लिखी पुस्तक मेरे हाथों को पहली बार स्पर्श करेगी तो मुझे कैसा महसूस होगा? उसी की कल्पना कर पुस्तक का नाम ‘‘नया नया सा एहसास’’ रखा।

indiBooks : पुस्तक ‘नया नया सा एहसास’ में आपने किन-किन विषयों या मुद्दों को रखा है और किस विद्या में है?
मंजूर आलम : यह सिर्फ किताब नहीं है बल्कि मेरी कई वर्षों की तपस्या है, जो आज इस काव्य संग्रह के प्रकाशन से पूरी हुई है। इस संग्रह के माध्यम से मैंने वर्तमान समय की राजनीतिक, पारिवारिक, सामाजिक परिस्थितियों और उनकी समस्याओं पर लोगों का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया है। इसके साथ ही देश प्रेम जगाने वाली कविताएं, हॅसाने-गुदगुदाने वाली कविताएँ भी शामिल हैं, जो आपको जरूर पसंद आयेगी।

indiBooks : आपको अपनी किताब ‘नया नया सा एहसास’ लिखने एवं प्रकाशन में कितना समय लगा?
मंजूर आलम : यह कठिन सवाल है, क्योंकि अपनी रचनाओं को पुस्तक के रूप में ढालने में में तो लगभग महीने डेढ़ महीने का समय लगा लेकिन इसमें से काफी रचनाएँ 15- 20 वर्ष पूर्व की भी है जिन्हें मैने उन दिनों लिखा था। जिनमें से प्रमुख रचनाएँ कल्लू की शादी, मेरी भाभी, बच के रहना रे! इत्यादि हैं, जो आपको जरूर पढ़नी चाहिए। ऐसे में आप यह कह सकते है कि 15-20 वर्षों का समय मुझे लेखन को संग्रहित एवं प्रकाशित करने में लगा।

indiBooks : किताब ‘नया नया सा एहसास’ की प्रतिनिधि रचना, जिसे आप चाहेंगे कि हर पाठक जरूर पढ़ें?
मंजूर आलम : (मुस्कराते हुए) अगर लेखक के नज़रिये से देखा जाय तो सभी रचनाएँ एक से बढ़कर एक हैं। यदि फिर भी आप पूछेंगे तो फिर घर, शिक्षा, अखबार, चाय, लौट आओ ना! को पाठक जरूर पढ़े।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और पुस्तक प्रकाशित करने का विचार कैसे बना?
मंजूर आलम : जब मैं उच्च माध्यमिक में पढ़ रहा था तब से ही पत्र-पत्रिकाओं, अखबारों में लिखने भी लगा था। मेरी प्रथम रचना ‘‘समय का महत्व’’ एक बाल कहानी है,जो दिनांक 09.06.1994 को हिन्दुस्तान अखबार के सोपान में प्रकाशित हुई थी। हिन्दुस्तान के काँव-काँव में भी बहुत सारी टिप्पणियाँ लिखीं तब से लिख ही रहा हूँ। सोशल मीडिया में सक्रिय रहा हूँ। सोशल मीडिया के माध्यम से ही ‘‘प्राची डिजिटल पब्लिकेशन’’ के सम्पर्क में आया और बचपन की एक ख्वाहिश (किताब प्रकाशन) पूरी हुई।

indiBooks : पहली पुस्तक के लिए कंटेट लिखने एवं प्रकाशित कराने में क्या आपको किसी परेशानी का सामना करना पड़ा? यदि हां तो वो परेशानी क्या रहीं? 
मंजूर आलम : आरंभ में थोड़ी-सी झिझक थी कि मेरी रचनाएँ पुस्तक के रूप में प्रकाशित होने जा रही है। सुधि पाठकों की रूचि के अनुरूप होगी भी या नहीं? दो तीन रचनाएँ व्हाट्सअप पर ‘प्राची डिजिटल पब्लिकेशन’’ को अवलोकन, मार्गदर्शन एवं मन्तव्य के लिए भेजा। सकारात्मक सुझाव और निरंतर मार्गदर्शन ने मेरे सपनों को पंख दे दिये।

मैं तो इतना ही कहूँगा कि ‘‘प्राची डिजिटल पब्लिकेशन’’ है तो क्या कहना!
कोई दिक्कत नहीं , कोई परेशानी नहीं रही ना हुई। धन्यवाद प्राची डिजिटल।

इसके अलावा मैंने महसूस किया है जो मैं सभी लेखकों से जरूर कहना चाहूँगा कि एक लेखक को अपनी रचनाओं के लिए कभी भी झिझक महसूस नहीं करनी चाहिए। यदि आप झिझकते रहे और कोशिश नहीं करोगे तो आप कभी भी अच्छे लेखक नहीं बन पाओगे। आप समाज में सामने आकर समाज की बुराईयों पर अपनी कलम नहीं चला पाओगे। कोई भी आपको नहीं जान पायेगा। पाठक या समीक्षक आपकी रचनाओं की आलोचना या प्रशंशा करें तभी आप मान सकते हैं कि आपका लेखन सफल हुआ है और पाठक आपको पढ़ रहें है।

indiBooks : क्या आपको याद है कि आपने पहली रचना कब लिखी?
मंजूर आलम : जी हाँ! बिल्कुल याद है। मेरी पहली रचना ‘‘समय का महत्व’’ एक बाल कहानी है, जो दिनांक 09.06.1994 को हिन्दुस्तान अखबार के सोपान में प्रकाशित हुई थी।

indiBooks : आपकी पहली पुस्तक के प्रकाशक के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
मंजूर आलम : बहुत ज्यादा संतोषजनक। मुझे तो लगा ही नहीं कि मेरी पुस्तक भी प्रकाशित हो रही है। पूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन मिला। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन को अनेकानेक धन्यवाद।

indiBooks : आप किस विद्या में अधिक लिखना पसंद करते है?
मंजूर आलम : अब मै कविता ही लिख रहा हूँ। कुछ हाइकु कविताएँ भी लिखी है।

indiBooks : लेखन की प्रेरणा आपको कहाँ से मिलती है?
मंजूर आलम : दो दशक से भी ज्यादा समय से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा हुआ हूँ। समाज के हर वर्ग हर सम्प्रदाय के साथ उठना-बैठना है। लोगों की परेशानियों और परिस्थतियों को नजदीक से देखता समझता और महसूस करता हूँ। बस, वहीं से प्रेरणा या विषय लेकर लिखता हूँ।

indiBooks : मजूर आलम जी, आपके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही है?
मंजूर आलम : शिक्षा सेवा से जुड़कर समाज की सेवा और मार्गदर्शन करना। सौभाग्यवश यह मुझे बहुत जल्दी मिल गया।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
मंजूर आलम : कोई एक नहीं हैं रचनाएँ पढ़ने का शौकीन हूँ। अच्छी रचनाओं और लेखकों को उचित सम्मान देता हूँ। मुंशी प्रेमचंद्र की गोदान, हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला, नये लेखकों में कुमार विश्वास की रचनाएँ प्रेरित करती है।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?
मंजूर आलम : हाँ! एक बार की बात है। मैं और मेरे साथ चार अन्य शिक्षक साथी सीसीआरटी की ट्रेनिग में हैदराबाद गये थे। जहाँ पर देशभर के लगभग 150-200 शिक्षक विभिन्न प्रान्तों से आए हुए थे।

प्रशिक्षण समाप्ति के एक दिन पूर्व हम लोगों को हैदराबाद शहर घूमने के लिए छुट्टी मिली। हमारे 6 लोगों के एक ग्रूप में कानपुर की एक शिक्षिका भी थीं। हमने रामोजी फिल्म सिटी देखने का प्लान किया। जो हैदराबाद शहर से 60-70 किमी दूर है। वहाँ से वापसी के समय शिक्षिका बहन के सारे पैसे, एटीएम कार्ड, वापसी का ट्रेन टिकट बस में ही किसी ने उड़ा दिये। मै बस में पीछे बैठा था।

शिक्षिका बहन एकाएक चिल्लाईं मंजूर सर मेरे पैसे और पर्स किसी ने उड़ा लिए। मै घर कैसे जाऊंगी? एटीएम कार्ड, रेल टिकट सब गायब है। मैंने बस रूकवाकर सारे बस की चेकिंग करायी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तब नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर एफआइआर दर्ज करवाने में सहयोग किया। वहाँ के एसएचओ ने बहुत दिलासा दिया। पीएनआर नंबर के सहयोग से डुप्लीकेट टिकट निकाल दिया।

उस रात देर तक प्रयास किया कि पॉकेटमार का भी पता चल जाय परन्तु नहीं चल सका। उनकी अगले दिन सुबह 5 बजे ही ट्रेन थी। मैंने उनसे कहा कि आप चिंता ना करे, पहले होस्टल चलें। रास्ते में एक होटल से उनके लिये भी खाना पैक करा दिया तथा नजदीकी एक एटीएम से 5000 रूपये निकाल कर उनको दे दिया। पूछा इतने में हो तो जायेगा। नहीं तो बोलिये और दे दूँ संकोच न कीजियेगा। उन्होने कहा नहीं हो जायेगा। मैं पहुँचते ही आपके रूपये खाते में भेज दूँगी। मैंने कहा पहले इत्मिनान से घर तो पहुँचिये।

यह सब गुजरात के एक शिक्षक मित्र देख रहे थे। उन्होने कहा कि मैं गुजरात जाकर नैतिक शि़क्षा और मूल्यपरक शिक्षा पर ज्ञान देते समय आपका जिक्र अवश्य किया करूँगा। शिक्षा का यही उद्देश्य हैं। आपने मुझे बहुत प्रेरित किया है।

गुजरात के उन शिक्षक मित्र के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं थे, मैं सिर्फ मुस्कारा दिया, क्योंकि मैने तो सिर्फ एक इंसानियत के नाते छोटा सा मानवीय सहयोग किया था।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
मंजूर आलम : छोटी मुँह बड़ी बात होगी। बडे़-बड़े विद्वान हैं जो हिन्दी उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। मैं तो सिर्फ इतना ही कहूँगा कि हमारी हिन्दी खूब फले-फूले विश्व भाषा बनें। बन भी रही है धीरे-धीरे।

indiBooks : शिक्षा सेवा और लेखन के अलावा आपके शौक?
मंजूर आलम : इसके अलावा मुझे डाक टिकट संग्रह करने का शौक है। मेरे पास इन टिकटों और पुराने नोटो व सिक्कों का अच्छा खासा कलेक्शन है।

indiBooks : क्या अगली पुस्तक के लिए तैयारी कर रहें है? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
मंजूर आलम : जी बिल्कुल… शीघ्र ही आयेगी। वही चिर-परिचित विषय राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, कोरोना, लॉकडाउन इत्यादि रहेंगे।

indiBooks : नवोदित लेखकों के लिए कोई संदेश देना चाहेगें।
मंजूर आलम : मैं तो खुद नया हूँ लेकिन इतना कहूँगा कि यदि आप अच्छा लिखते हैं तो एक बार प्राची डिजिटल पब्लिकेशन और श्री राजेन्द्र सिंह बिष्ट जी से जरूर सम्पर्क करें। आपको आपके सपनों को साकार करने में भरपूर सहयोग देंगे।

indiBooks : आप अपने पाठकों से क्या कहना चाहेंगे।
मंजूर आलम : खूब पढ़ें, खूब बढ़ें…..। रचनाकार नये हों या पुराने अच्छी रचनाओं को सराहें, लेखकों को प्रोत्साहित करें। पाठकों के दो शब्द रचनाकारों के लिए बीस रचनाएँ सृजन करने को प्रेरित करते है। पढ़ते-पढ़ते एकदिन आप भी लेखन में रूचि लेने लगेंगे। इन्हीं शब्दों के साथ पाठकों को सादर नमन है।

आप मंजूर आलम जी की पुस्तक ‘नया नया सा एहसास’ काव्य संग्रह को दिये गये किसी भी स्टोर से प्राप्त कर सकते हैं-

मंजूर आलम जी आपने अपना कीमती समय हमें दिया है, उसके लिए हम आपके आभारी है। आपको ‘नया नया सा एहसास’ काव्य संग्रह कैसा लगा। इसकी जानकारी आप हमें indibooks.in@gmail.com पर भेज सकते है। हम आपके Review को फेसबुक और indiBooks पर भी प्रकाशित करेंगे।

prachi

Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments