An interview with Siddharth Mohan, author of the Historical Fiction ‘Tears of Garroth’

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पिछले दिनों हमें ‘Tears of Garroth : Divided We Stand’ के लेखक सिद्वार्थ मोहन जी का साक्षात्कार प्राप्त हुआ है। बिहार के रहने वाले सिद्वार्थ जी ने साक्षात्कार को अपने सकारात्मक जवाबों से बहुत ही रोचक बना दिया है। साक्षात्कार में जवाबो में आप उनके विचारों की सकारात्मकता को महसूस कर सकते है। सिद्वार्थ जी एक ऐसे लेखक हैं जो अपनी पुस्तक की रॉयल्टी को दान कर देते है। यहाँ पर पेश हैं उनसे साक्षात्कार के प्रमुख अंश-

indiBooks : कृपया संक्षेप में अपने शब्दों में अपना परिचय दें?
Siddharth Mohan : बड़ी ही विचित्र बात है पर एक साक्षात्कार में पूछे जाने वाला यह मूलभूत प्रश्न कितना जटिल बन जाता है। मेरे विचार में तो मैं एक मुसाफिर हूँ जो खुद का परिचय ढूंढने की निरंतर यात्रा कर रहा है। यात्रा के दौरान मार्ग में कुछ नया सीखने का प्रयास करता हूँ, कभी ठोकर खाकर गिरता हूँ फिर खुद को संभालता हूँ, इसी आशा से की एक दिन मैं स्वयं का परिचय प्राप्त कर लूँगा।

indiBooks : हाल ही में प्रकाशित अपनी नई किताब के बारे में बताएं?
Siddharth Mohan : मेरी पहली पुस्तक थी ‘टीयर्स ऑफ़ गैरेथ : डिवाइडेड वी स्टैंड’ जो २०१७ में प्रकाशित हुई थी। यह मध्यकालीन युग पर आधारित एक काल्पनिक उपन्यास है। इस उपन्यास को पाठकों से काफी सराहनीय प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद मैंने अपने लेखन कार्यों को पत्रिकाओं, वेबसाइट्स और ब्लॉगिंग साइट्स की ओर केंद्रित कर दिया था। जिसके फलस्वरूप अगले माह में मेरी २ और पुस्तकें आ रही है जो मूल रूप से मेरी लिखी गयी कुछ चुनिंदा आर्टिकल्स का संग्रह होगा। पहली पुस्तक में मेरे द्वारा लिखी गयी चुनिंदा हिंदी आर्टिकल्स का संकलन होगा तथा दूसरी पुस्तक में मेरी लिखी हुई कुछ अंग्रेजी आर्टिकल्स का संग्रह होगा।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरित हुए?
Siddharth Mohan : बड़ा ही रोचक प्रश्न किया है आपने। मैंने सदा ही जीवन को दिल से जीने का प्रयास किया है, दिमाग से नहीं। यही कारण था की मैंने बंगलुरु से MBA करने के पश्चात कॉरपोरेट जॉब को कुछ महीनों में ही छोड़ दिया था। उसके पश्चात मैं वापस बिहार आ गया और यहाँ मैंने कृषि से जुड़े व्यवसाय की ओर कदम बढ़ाया। माता श्रीमती रीना कवि और पिता श्री विभूति कवि का भी हमेशा ह्रदय से समर्थन मिला और उन्होंने मेरे निजी जीवन के हर बड़े छोटे निर्णयों का स्वागत और समर्थन भी किया। पढ़ने का शौक तो १२ वर्ष के उम्र से ही था, २५ वर्ष की आयु में लिखना भी प्रारम्भ कर दिया। अगर आप पूछें की किस चीज़ ने मुझे लिखने के प्रति प्रेरित किया? तो मेरा उत्तर होगा मैं नहीं जानता हूँ वो कौन सा पल था या कौन सी घटना थी बस इतना ही ज्ञात है की जब पता लगा तो मैं लिखना प्रारम्भ कर का था।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
Siddharth Mohan : मैं अपने लेखन में प्रयोग करते रहता हूँ। आर्टिकल्स, समीक्षा, गद्य, पद्य, उपन्यास मैं हर तरह के लेखन में रूचि रखता हूँ। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में अपने विचारों को व्यक्त करना मुझे पसंद है। इतिहासपरक एवं पौराणिक विषयों पर लिखना विशेष रूप से मुझे अच्छा लगता है। मैंने महाभारत पर गहन अनुसन्धान किया है और मेरे लेखन का एक बड़ा हिस्सा महाभारत के भिन्न भिन्न घटनाओं और पात्रों पर आधारित है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
Siddharth Mohan : मेरा सभी लोगों से अनुरोध है की कोरोना वायरस के रूप में जो ये वैश्विक संकट मंडरा रही है उसमें सरकारी एवं अंतराष्ट्रीय संस्थानों के निर्देशों का पालन करें। स्वयं जागरूक रहें और अपने प्रियजनों को भी जागरूक करें। आपातकालीन सेवाओं से जुड़े लोगों का सम्मान करें जो अपनी जान पर खेलकर हमारी सेवा करने के लिए तत्पर हैं। कितने छोटे ही रूप में क्यों न हो, ज़रूरतमंदों की सहायता करें क्यूंकि इस संकट की घडी में सारे समाज और सम्पूर्ण देश को ही नहीं अपितु पुरे संसार को द्वेष और कलह को भूलकर एकजुट हो कर काम करना होगा। आप सभी के स्थ्यपूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन की कामना करता हूँ।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं?
Siddharth Mohan : जैसा की मैंने आपको बताया की मेरी २ पुस्तक अगले माह आने वाली है। इसके अतिरिक्त मैंने महाभारत के मुख्य पात्र अंगनरेश कर्ण के जीवनगाथा पर आधारित एक पुस्तक लिखी है जिसका शीर्षक है ‘प्रतिसूर्य कर्ण’। इस साल के अंत तक यह पुस्तक भी प्रकाशित हो जाएगी। और अगले साल के शुरुआत में महाभारत के एक और मुख्य पात्र महामहिम भीष्म के जीवनगाथा को एक महाकाव्य के रूप में प्रस्तुत करने की च्येष्ठा करूँगा। देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान खाली समय में इन चारों पुस्तकों को प्रकाशित करने के कार्य में पुरज़ोर प्रयासरत हूँ।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
Siddharth Mohan : एक नाम लेना तो असंभव ही है। राष्ट्रकवि दिनकर जी, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, ओशो, स्वेड मार्डेन, मारियो पूजो, आर. एल. स्टाइन, शिवजी सावंत, नरेंद्र कोहली, शशि थरूर, स्टीफन किंग जैसे कितने ही लेखकों को पढ़ना पसंद है मुझे। हर लेखक की अपनी एक अनूठी और प्रभावशाली शैली होती है इसलिए मैं मानता हूँ उन्हें तुलनात्मक रूप से नहीं आंकना चाहिए अपितु उनके एक दूसरे से भिन्न किन्तु अद्भुत लेखन कौशल का आनंद लेना चाहिए।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
Siddharth Mohan : मेरी कोशिश रहती है की खाली समय में कुछ नया सीख लूँ। किताबें पढता हूँ, कभी गिटार बजा लेता हूँ, हार्मोनिका भी थोड़ा बहुत सीखा है, मूवीज में अच्छी खासी रूचि है मेरी, रविवार को बचपन के साथियों के साथ क्रिकेट का लुफ्त भी उठाता हूँ। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने में भी बड़ा आनंद आता है। स्विमिंग और जॉगिंग भी पसंद है मुझे। नए जगहों और ख़ास तौर पर ऐतिहासिक स्थलों पर जाने से खुद में एक सकारात्मक ऊर्जा के संचार को अनुभव करता हूँ। साथ ही साथ अपने मोहल्ले के कुत्तों को खाना खिलाना, उन्हें समझना और उनके साथ समय बिताना तो मेरे नियमित जीवन का एक अहम हिस्सा है (हँसते हुए) उनमें से कई मेरे बहुत घनिष्ठ मित्र बन गए हैं।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
Siddharth Mohan : मैंने लेखन के कार्य को कभी व्यवसाय नहीं बनाया। लेखन के कार्य से अर्जित अधिकतर धनराशि को मैं दान करता हूँ। लिखना मेरे लिए एक जूनून है। लेखन के माध्यम से मैं एक जीवन में कई जीवन जीने का अनुभव करता हूँ। लिखने से आतंरिक उन्नति के साथ ही साथ मन को शान्ति भी मिलती है। लेखन मेरे जीवन का एक अभिन्न अंग है और फिर ये तो बस शुरुआत है एक अनंत सफर की।

About the ‘Tears of Garroth’

During medieval times, before getting annihilated by a lusty foreign empire, the hugely outnumbered four major kingdoms of mid-eastern Bharat decided to shift their children to a newly discovered, sheltered island named Garroth. Garroth was divided into four parts (Diadem, Parnell, Jowett and Ron dark) and the heirs of all the four kings were assigned a kingdom each. Overtime, the kings and queens of the divided kingdoms of Garroth, overcame all odds. They nurtured and successfully raised their kingdoms from scratches. But their contradictory views and a sense of competition along with clashing interests made the relationships of the kingdoms hostile towards each other. One fine day, Garroth faces the peril of being attacked by ‘Saalum’. World’s strongest empire on a mission to conquer the planet. Will the war take place? Will the kingdoms of Garroth be able to sort their differences and stand together? Will they be able to defeat Saalum? What are the mysteries of Altraas and Aiden? Will pirates succor Garroth? Prepare to get lost in the riveting and galvanizing chronicles of Garroth.

आपको सिद्वार्थ मोहन जी का साक्षात्कार या उनके बारे में जानकर या उनके अनुभव आपको कैसा लगा, हमें कमेंट या सोशल मीडिया पर जरूर बताएं। यदि आप भी अपना साक्षात्कार या अनुभव हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें।

prachi

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