‘काव्य प्रभा’ साझा काव्य संकलन की लेखिका अभिलाषा चौहान जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के द्वारा काव्य प्रभा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया है। जिसका संपादन सुधा सिंह ‘व्याघ्र’ द्वारा किया गया है। ‘काव्य प्रभा’ में देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। पेश है ‘काव्य प्रभा’ काव्य संग्रह के एक लेखिका अभिलाषा चौहान जी से साक्षात्कार-

indiBooks : क्या आप अपने शब्दों में हमारे सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देना चाहेंगे? क्योंकि आपके शब्दों में हमारे पाठक आपके बारे में ज्यादा जान पाएंगे।

Abhilasha Chauhan : मैं अभिलाषा चौहान, ‘सुज्ञ ‘मेरा साहित्यिक उपनाम है जो अर्णव कलश ऐसोसियेशन राष्ट्रीय साहित्यिक मिशन के संस्थापक श्री संजय कौशिक विज्ञात जी द्वारा मुझे प्रदान किया गया है।

मैं एक गृहिणी हूँ और अपने उत्तरदायित्वों को पूर्ण करना मेरी प्राथमिकता रही है। अस्तित्व की तलाश ने मुझे संघर्ष करने पर मजबूर किया। इसलिए विवाह के बाद मैंने अपनी छूटी हुई पढ़ाई पूरी की। संयुक्त परिवार में यह सब संभव नहीं था पर मेरे पति का प्रोत्साहन और सहयोग सर्वोपरि रहा। उनके कारण ही मैंने शिक्षण के क्षेत्र में कदम रखा। यह समय मेरे जीवन का गौरव शाली समय था। डायरी में मन की अनुभूतियों को अभिव्यक्त करती थी। हिंदी भाषा व साहित्य से बहुत लगाव था , इसीलिए प्रतियोगी पुस्तकों का लेखन भी साथ-साथ करने लगी क्योंकि यह हिंदी भाषा से ही संबंधित थीं और मैं अपने ज्ञान को बाँटना चाहती थी। सन् 2018 में नियति के क्रूर मजाक का सामना करना पड़ा। जीवन निराशा और वेदना से घिर गया। ऐसे में ब्लॉग बनाने की प्रेरणा मिली। वहाँ प्रतिष्ठित ब्लॉगरों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। एक आभासी दुनिया के स्नेह ने मन को अवलंब प्रदान किया। फिर लेखन का सिलसिला चल पड़ा। प्रतिलिपि, स्टोरीमिरर, द साहित्य और भी साहित्यिक समूहों से जुड़ी और जीवन को एक दिशा मिली।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में अन्य सहयोगी रचनाकारों के साथ सहयोगी रचनाकार के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?

Abhilasha Chauhan : साझा काव्य संग्रह “काव्य प्रभा” में मेरे साथ जो सहयोगी रचनाकार हैं, उनमें आदरणीया सुधा सिंह ‘व्याघ्र’ से मैं व्यक्तिगत रूप से जुड़ी हुई हूँ। वे एक प्रतिष्ठित ब्लॉगर, लेखिका और कवयित्री हैं। इसके साथ ही ऋतु आसूजा, अनुरोध जी, आनंद जी भी मेरे फेसबुक मित्र है और अच्छा लेखन करते हैं। सभी रचनाकार बहुत अच्छे हैं। उनके साथ अपना नाम देखकर खुशी हो रही है।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में आपकी रचनाएं किस विषय पर आधारित हैं?

Abhilasha Chauhan : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में मेरी रचनाएं समसामयिक विषयों पर आधारित है। इनमें स्व की तलाश भी है तो आम आदमी की पीड़ा भी। एक बच्चे के अपराधी बनने की कहानी है तो हवाओं के बदलने की बात भी। ढलती उम्र में पति-पत्नी के मन के भावों को भी अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?

Abhilasha Chauhan : मुझे टॉप टेन ब्लॉगर सम्मान, जनकवि सम्मान, कुंडलियाँ शतकवीर सम्मान, सोरठा शतकवीर सम्मान, दोहा विशारद सम्मान (अर्णव कलश ऐसोसियेशन राष्ट्रीय साहित्यिक मिशन) से, प्रतिलिपि, स्टोरीमिरर से भी लेखन के लिए सम्मान मिले हैं। साहित्यिक समूहों से समय-समय पर प्रमाणपत्र मिलते रहते हैं।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?

Abhilasha Chauhan : ‘ये कुंडलियां बोलती है’ साझा संग्रह रवीना प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है जिसमें समसामयिक घटनाचक्र पर कुंडलियां छंद संकलित हैं। ‘श्रमिक की व्यथा’ ई बुक प्राची डिजिटल पब्लिकेशन से ही प्रकाशित है।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?

Abhilasha Chauhan : लेखन का कोई समय नहीं होता। डायरी लेखन तक सीमित लेखनी ने उड़ान भरी तो आज काव्य प्रभा का अंग बन गई। यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं हिंदी शिक्षण के साथ हिंदी विषय से सम्बन्धित पुस्तकों के लेखन का कार्य करती हूँ।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?

Abhilasha Chauhan : जिसमें मन के भाव अभिव्यक्त हो सकें, वही मेरी प्रिय लेखन विधि है। वैसे मुझे विचारात्मक लेख और निबंध लिखना अच्छा लगता है। काव्य लेखन में मुक्त छंद और छंदबद्ध दोनों ही तरह की रचनाएं लिख लेती हूँ।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Abhilasha Chauhan : बिल्कुल, हिंदी भाषा का प्रचलित रूप हिंग्लिश है जिसके कारण हिंदी का मूल स्वरूप खो सा गया है। भाषा में अशुद्ध शब्दों की भरमार हो गई है। हिंदी भाषा हमारी अस्मिता है और प्रत्येक व्यक्ति को यह प्रयास करना चाहिए कि उसका मूल रूप सुरक्षित रहे। तभी उसका उत्थान संभव है।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके शौक या हॉबी?

Abhilasha Chauhan : बागवानी और प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण मेरे प्रिय शौक है। समयाभाव के कारण भ्रमण पर नहीं जा पाते तो खाली समय में पेड़-पौधों के बीच रहना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Abhilasha Chauhan : अगर भविष्य में मेरी पुस्तक यदि प्रकाशित होती है, तो वह हिंदी भाषा के उत्थान या अशुद्धिकरण की समस्या को लेकर ही होगी।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Abhilasha Chauhan : बस यही कि काव्य प्रभा में संकलित रचनाओं को पढ़ें और यदि कोई त्रुटि दिखाई दे तो अवश्य बताएं । मैं कोई साहित्यकार नहीं हूँ। बस लिख लेती हूँ। आपका प्रोत्साहन मेरा उत्साहवर्धन करेगा।

indiBooks : आपके पाठकों को काव्य प्रभा क्यो पढ़नी चाहिए? इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

Abhilasha Chauhan : काव्य प्रभा निस्संदेह अपने आप में अनुपम संकलन है। इसमें पाठक को उसकी इच्छा के अनुरूप सबकुछ मिलेगा। वह सभी लेखकों की लेखनी का रसास्वादन करें और अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।

About the ‘Kavya Prabha

साहित्य के सभी रसों से पगी ‘काव्य प्रभा’ एक मित्र की भाँति कभी आपको गुदगुदाएगी तो कभी आपके मन-मस्तिष्क को झकझोरती-सी प्रतीत होगी। इस पुस्तक में जहाँ एक ओर विशुद्ध हिंदी की रचनाएँ आपके मन में पैठ जमाती लक्षित होंगी, वहीं दूसरी ओर उर्दू के कुछ ख़याल भी अपना जादू बिखेरते नज़र आएँगे। काव्य प्रभा में स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकार भी आपको अपनी साहित्य सुरभि की मोहक बयार से सहलाएँगे। ‘काव्य प्रभा’ के सभी रचनाकार साहित्य रूपी सागर के उन अनमोल मोतियों की तरह है जिनकी तलाश हर साहित्य प्रेमी को होती है। उम्मीद है इन्हें पढ़कर साहित्य रसिकों की साहित्य पिपासा अवश्य ही शांत होगी।

prachi
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Abhilasha Chauhan

सहृदय आभार प्राची डिजिटल पब्लिकेशन 🙏🏻🙏🏼
आपने आज हमें नया मुकाम प्रदान किया ।आज मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ।आपके उत्कृष्ट कार्य की जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है।

अनुरोध कुमार

आदरणीया अभिलाषा जी आपका साक्षात्कार पढ़कर एक प्रेरणा मिली कि जीवन में विपरीत परिस्थितियों में भी अपना कार्य करते रहना चाहिए