‘काव्य प्रभा’ साझा काव्य संकलन के लेखक अनुरोध कुमार श्रीवास्तव जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के द्वारा काव्य प्रभा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया है। जिसका संपादन सुधा सिंह ‘व्याघ्र’ द्वारा किया गया है। ‘काव्य प्रभा’ में देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। पेश है ‘काव्य प्रभा’ काव्य संग्रह के एक लेखक अनुरोध कुमार श्रीवास्तव जी से साक्षात्कार-

indiBooks : क्या आप अपने शब्दों में हमारे सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देना चाहेंगे? क्योंकि आपके शब्दों में हमारे पाठक आपके बारे में ज्यादा जान पाएंगे।

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के गुरू महर्षि वशिष्ठ और हिन्दी साहित्य के महान समालोचक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल तथा प्रख्यात साहित्यकार श्री सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पावन भूमि जनपद बस्ती, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। बाल्यकाल से पठन में रुचि होनें के कारण सोलह वर्ष की उम्र में कविता लिखना शुरू किया। आरम्भ में सरिता पत्रिका में छपी कविताएँ पढ़कर कविता लेखन के प्रति आकर्षित हुआ। शुरूआती कुछ कविताएँ सरिता और सरस सलिल में प्रकाशित हुई। किशोरावस्था में लिखित एक खण्ड काव्य, अधूरा उपन्यास, कुछ निबन्ध एवं दर्जनों श्रृँगार रस की कविताएँ (जो पन्नों और कापियों में संकलित थीं) बाद में पढ़नें हेतु बाहर चले जानें पर दीमक चट कर गये और प्रकाशित न हो सकीं, जिसका मुझे ताउम्र अफसोस रहेगा। परिवार में पिता, मेरी पत्नी, दो पुत्र एवं छोटा भाई तथा उसका परिवार है।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में अन्य सहयोगी रचनाकारों के साथ सहयोगी रचनाकार के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : काव्य प्रभा एक अतुलनीय संग्रह है जिसमें सौन्दर्य, प्रेम, सामाजिक सरोकार आदि से सम्बन्धित रचनायें संकलित हैं। काव्य प्रभा के कुछ सहयोगी रचनाकार मुझसे फेसबुक, प्रतिलिपि और द साहित्य मंच पर भी जुड़े हैं। उनके साथ साझा संग्रह में जुड़कर मुझे असीम खुशी हुई।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में आपकी रचनाएं किस विषय पर आधारित हैं?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : काव्य संग्रह “काव्य प्रभा” में मेरी रचनायें प्रेम, सौन्दर्य, जीवन, सामाजिक सरोकार, स्त्री सशक्तिकरण एवं हास्य से सम्बन्धित है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : साहित्यिक सेवा के लिए मुझे प्रतिलिपि से “आजाद भारत चैलेंज” पुरस्कार, स्टोरीमिरर से “लिटरेरी कैप्टन” उपाधि तथा द साहित्य से जुलाई 2020 माह हेतु “टाप आथर आफ द मंथ” पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त पाठकों का अपार स्नेह मिलता है जो मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?
अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : मेरी पहली प्रकाशित पुस्तक “जिन्दगी के साज पर” है जो ऊँकारेश्वर प्रेस नोएडा से प्रकाशित है। उक्त पुस्तक में 34 ग़ज़ल और 101 गीत और कवियायें संकलित हैं। उक्त पुस्तक में प्रेम, सौन्दर्य, सामाजिक सरोकार, प्रकृति और प्राकृतिक सौन्दर्य तथा स्त्री सशक्तिकरण, गौरैया एवं अन्य पक्षी संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण, जल और नदी संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं। पुस्तक प्रकाशक के ऑनलाइन स्टोर, अमेजन, गूगल आदि पर उपलब्ध है।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : जैसा कि मैनें पहले बताया कि मैं किशोरावस्था से लेखन कर रहा हूँ। लेखन के अलावा मैं उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन ग्राम्य विकास विभाग में पिछले बीस वर्षो से कार्यरत हूँ।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : मेरी पसंदीदा लेखन विधि प्रकृति के सौन्दर्य और उसकी सत्ता के सम्मान में रचना करना है और मेरा सर्वाधिक लेखन इसी विषय से सम्बन्धित रहता है। इसके अतिरिक्त प्रेम, सौन्दर्य, हास्य, पर्यावरण, समाजिक सरोकार, जीव संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण आदि विषयों पर लेखनी चलाता हूँ। मूल विधा छंदमुक्त कविता, इसके अतिरिक्त ग़ज़ल, गीत, हाइकु, दोहा, मुक्तक, शेर, लेख, निबंध, कहानी, लघुकथा आदि।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : आजकल के दौर में भारत में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी और बोलचाल का माध्यम खड़ी बोली तथा अंग्रेजी हो गयी है। आज के बच्चे अपनी मातृभाषा को भूलते जा रहे हैं। हिन्दी का उत्थान तभी होगा जब शिक्षा का माध्यम हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषायें हों। आप अवगत होंगे कि हिन्दी का सबसे बड़ा महाकाव्य “श्रीराम चरित मानस” क्षेत्रीय ‘अवधी भाषा’ का ग्रन्थ है। हमें अपनें दैनिक व्यवहार और पत्राचार में हिन्दी भाषा का प्रयोग करना होगा। वर्तमान में हिन्दी के सबसे बड़े दुश्मन लघु संदेश सेवा (SMS), वाट्सऐप जैसे चलन हैं। हमें सोशल मीड़िया पर भी हिन्दी ही व्यवहार में लानी चहिए वो भी रोमन लिपि नहीं देवनागरी लिपि में। यकीन मानिये साहब छोटी-छोटी बातों से फ़र्क पड़ता है।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके शौक या हॉबी?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : लेखन के अलावा साहित्य का पाठन, बागवानी, फोटोग्राफी और पर्यटन मेरे शौक हैं।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : जी बिल्कुल ! विविध बिषय हैं जैसे प्रकृति, प्रेम और पर्यावरण।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : सद्साहित्य का पठन करें, हमेशा आशावादी रहें और वर्तमान में जिएँ।….”हर म़र्ज की द़वा है सदा, वक़्त का म़रहम”…….।

indiBooks : आपके पाठकों को काव्य प्रभा क्यों पढ़नी चाहिए? इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

अनुरोध कुमार श्रीवास्तव : “काव्यप्रभा” काव्य ग्रन्थ है और इस प्रश्न के उत्तर में मैं पूज्यनीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल को उद्घृत करना चाहूँगा…. “मनुष्य के लिए कविता इतनी प्रयोजनीय वस्तु है कि संसार की सभ्य, असभ्य सभी जातियों में किसी न किसी रूप में पायी जाती है। चाहे वह इतिहास न हो, विज्ञान न हो, दर्शन न हो कविता का प्रचार अवश्य रहेगा। बात यह है कि मनुष्य अपनें ही व्यापारों का ऐसा सघन और जटिल मण्ड़ल बांधता चला आ रहा है जिसके भीतर बंधा-बंधा वह शेष सृष्टि के साथ अपनें हृदय का सम्बन्ध भूला सा रहता है। इस परिस्थिति में मनुष्य को अपनी मनुष्यता खोनें का डर बराबर बना रहता है। इसी से अन्तः प्रकृति में मनुष्यता को समय-समय पर जगाते रहनें के लिए कविता मनुष्य जाति के साथ लगी चली आ रही है और चली चलेगी। जानवरों को इसकी जरूरत नहीं।”

About the ‘Kavya Prabha

साहित्य के सभी रसों से पगी ‘काव्य प्रभा’ एक मित्र की भाँति कभी आपको गुदगुदाएगी तो कभी आपके मन-मस्तिष्क को झकझोरती-सी प्रतीत होगी। इस पुस्तक में जहाँ एक ओर विशुद्ध हिंदी की रचनाएँ आपके मन में पैठ जमाती लक्षित होंगी, वहीं दूसरी ओर उर्दू के कुछ ख़याल भी अपना जादू बिखेरते नज़र आएँगे। काव्य प्रभा में स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकार भी आपको अपनी साहित्य सुरभि की मोहक बयार से सहलाएँगे। ‘काव्य प्रभा’ के सभी रचनाकार साहित्य रूपी सागर के उन अनमोल मोतियों की तरह है जिनकी तलाश हर साहित्य प्रेमी को होती है। उम्मीद है इन्हें पढ़कर साहित्य रसिकों की साहित्य पिपासा अवश्य ही शांत होगी।

prachi
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अनुरोध कुमार

आप सभी का आभार । निःसंदेह काव्यप्रभा एक बेहतरीन और संग्रहणीय काव्य ग्रन्थ है