‘अनवरत’ लघुकथा संग्रह की एक लेखिका अर्चना त्यागी जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा एक साझा लघुकथा संग्रह ‘अनवरत‘ प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन देवेन्द्र नारायण तिवारी ‘देवन’ जी द्वारा किया गया है। ‘अनवरत’ में देशभर से चुन्निदा रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें से एक लेखिका अर्चना त्यागी जी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जा रहा है। प्रस्तुत है ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह के एक लेखिका अर्चना त्यागी जी से साक्षात्कार-

indiBooks : हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। क्या आप हमारे पाठकों को अपने शब्दों में परिचय देंगें?

Archana Tyagi : मेरा नाम अर्चना त्यागी है, मैं एक सामान्य भारतीय महिला हूँ, जो सभी प्रकार के रचनात्मक कार्यों में रुचि रखती है। इसके अलावा लेखन को माध्यम बनाकर समाज में वैचारिक परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत हूँ।

indiBooks : हाल ही में प्रकाशित अपनी नई किताब के बारे में बताएं?

Archana Tyagi : पिछले दिनों ही देवन तिवारी जी द्वारा संपादित एवं प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित “अनवरत” लघु कथा संकलन में शामिल होने का अवसर मिला, इसमें मेरे द्वारा रचित कुछ लघुकथाएं संकलित हैं।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरित हुए?

Archana Tyagi : मुझे पुस्तकें पढ़ने का बचपन से ही शौक रहा है और पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान से ही व्यक्तित्व का निर्माण किया है। मेरी रचनाएं भी व्यक्तित्व एवं बेहतर समाज के निर्माण में भागीदार हो, इस विचार ने पुस्तक प्रकाशन के लिए प्रेरित किया है। जिसके फलस्वरूप पुस्तक प्रकाशित हो पाई है।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?

Archana Tyagi : मुख्यत: गद्य में लिखना पसंद है, लेकिन कहानी लेखन मेरे लिए बहुत ज्यादा सुविधाजनक है, तो कहानी विद्या को मैं प्राथमिकता देती हूँ। इसके अलावा कविताएं और आलेख इत्यादि में भी लिख लेती हूँ।

indiBooks : किसी भी लेखक या लेखिका के लिए पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही मायने रखती है और उसके प्रकाशन का अनुभव बहुत खास होता है। क्या आप प्रथम प्रकाशन के उस अनुभव को हमारे पाठकों के बीच साझा करेंगे?

Archana Tyagi : प्रथम पुस्तक का प्रकाशन अनुभव बहुत अच्छा रहा है और समय पर सभी सूचनाएं प्राप्त होती रही हैं। इसके बाद पुस्तक भी समय से प्राप्त हो गई है। पुस्तक की लिखाई और छपाई प्रशंशा के योग्य है।

indiBooks : आप साहित्य सृजन कब से कर रहें हैं?

Archana Tyagi : विद्यालय में पढ़ते समय से ही लेखन शुरू हुआ था। प्रकाशन प्रक्रिया पिछले वर्ष लॉकडाउन में शुरू हुई। बहुत सी पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं?

Archana Tyagi : फिल्हाल तो एक लघुकथा संकलन प्रकाशित करवाने की योजना है। बाद में एक कविता संग्रह, एक लेख संग्रह आदि को प्रकाशित कराने की योजना पर कार्य चल रहा है।

indiBooks : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं?

Archana Tyagi : मेरे पसंदीदा लेखक प्रेमचंद, शरतचंद्र हैं।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Archana Tyagi : अच्छा सवाल है, मुझे खाली समय में फोटो क्लिक करवाना, गाने सुनना और कुकिंग आदि करती हूँ।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Archana Tyagi : कोरोना काल अत्यंत दुखद है परंतु मेरे जीवन में एक रुका हुआ काम, पुस्तक प्रकाशन इसी समय हुआ है, इसलिए हर परिस्थिति में सकारात्मक रहें।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Archana Tyagi : निज भाषा उन्नति एहे सब उन्नति को मूल।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

Archana Tyagi : अवश्य। अपने लेखन द्वारा एक बदलाव लाना चाहती हूँ भारतीय समाज की सोच में।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Archana Tyagi : हमेशा अच्छा साहित्य पढ़ें। यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।

About the Book

‘Anvarat’ short story compilation is an appraisal of true events, on one hand while there are childhood rites in this book, on the other hand it is a civilization that teaches the rites to the inferior human. Somewhere the hero-heroine’s love is tested, and elsewhere the maternal love is synonymous with life. Somewhere there is a satirical attack on politics, and somewhere there is a defeat from the loved ones leaving the eyes moist.

prachi

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