‘उत्तराखण्डः विकास एवं आपदायें’ सहित कई पुस्तकों के लेखक, शिक्षाविद व कवि दलीप सिंह बिष्ट जी से साक्षात्कार

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लेखक, शिक्षाविद व कवि दलीप सिंह बिष्ट जी की पिछले दिनों ‘उत्तराखण्डः विकास एवं आपदायें’ सहित दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। indiBooks द्वारा दलीप सिंह बिष्ट जी का साक्षात्कार किया गया और साक्षात्कार में हमने उनकी किताबों और साहित्य अनुभव के बारे में जानकारी प्राप्त की। दलीप सिंह बिष्ट जी ने हमारे सवालों के बहुत सुलझे हुए जवाब दिये। पेश हैं आपके लिए साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश-

indiBooks : दलीप जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

Dalip Singh Bisht : जी नमस्कार। मै वर्तमान समय में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्तयमुनि, रुद्रप्रयाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभाग प्रभारी के पद पर कार्यरत हूं।

indiBooks : पिछले दिनों आपकी कुछ नई किताबें प्रकाशित हुई है, हमारे पाठकों को उनके बारे में जानकारी दें।

Dalip Singh Bisht : एक पुस्तक मेरी कविताओं का संग्रह और गढ़वाली लोकोक्तियां है जिसमें पहाड़ की समस्यायें विशेष रूप से पलायन के विषय लिखा गया है। दो अन्य पुस्तकें पहाड़ के पर्यावरण, विकास और आपदायें तथा भारतीय संस्कृति में आस्था, धर्म, परम्पराओं में पर्यावरण संरक्षण के विषय में क्या कहां गया है उसको पर्यावरण संरक्षण के विषय में वर्तमान समय में अपनाने की आवश्यकता हैं।

indiBooks : अब तक आपकी कितनी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं?

Dalip Singh Bisht : अब तक मेरी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है जिनमें हिन्दी-गढ़वाली काव्य संग्रह एवं गढ़वाली लोकोक्तियां (औखाणा-पखाणा), उत्तराखण्डः विकास एवं आपदायें तथा मध्यहिमालयः पर्यावरण, विकास और चुनौतियां हैं।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरणा मिली?

Dalip Singh Bisht : मेरा लेखन कार्य तो बहुत समय पहले से चल रहा था मैं लगातार विभिन्न माध्यमों से अपना लेखन कार्य करता रहा हूं। लेकिन इस कोरोना काल में मुझे पर्याप्त समय मिल गया जिससे मैं इन पुस्तकों को प्रकाशन करने में सफल रहा हूं। यह प्रेरणा मुझे मेरी श्रदेय गुरूवर प्रो. अन्नापूर्णा नौटियाल, कुलपति हे. न. ब. गढ़वाल (केन्द्रीय) विश्वविद्यालय से मिली है, जिनके कुशल निर्देशन में मैने अपना शोध कार्य किया है।

indiBooks : आपकी पुस्तकों के लिए लेखन से लेकर प्रकाशन तक आपके परिवार या मित्र या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त हुआ?

Dalip Singh Bisht : पुस्तक लेखन से लेकर प्रकाशन तक सबसे अधिक सहयोग मुझे अपने परिवार से मिला है। इसके अलावा प्रो. एन. एस. भण्डारी, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोडा, प्रो. विनोद नौटियाल, डीन (पूर्व) कला संकाय हे. न. ब. गढ़वाल (केन्द्रीय) विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल), प्रो. पुष्पा नेगी, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग एवं अपने सहयोगी डा. लक्ष्मी दत्त गार्गे, डा. सुधीर पेटवाल एवं डा. जितेन्द्र सिंह का सहयोग मिलता रहा।

indiBooks : दलीप जी, किसी भी लेखक या लेखिका के लिए पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही मायने रखती है और उसके प्रकाशन का अनुभव बहुत खास होता है। क्या आप प्रथम प्रकाशन के उस अनुभव को हमारे पाठकों के बीच साझा करेंगे?

Dalip Singh Bisht : मेरी पुस्तकें जैसे ही मेरे हाथ में आई मुझे अपार खुशी का अनुभव हुआ है जिसे मैं शब्दों में व्यक्त नही कर सकता हूं।

indiBooks : आपकी किस पुस्तक को प्रत्येक पाठक को जरूर पढ़ना चाहिए? ऐसा कोई पूछे तो आपका जवाब क्या रहेगा?

Dalip Singh Bisht : जो मुझे लगता है कि मेरी प्रत्येक पुस्तक को पाठकों को अवश्य पढ़ना चाहिए, क्योंकि इसमें ग्रामीण परिवेश एवं पहाड़ की परिस्थितियों के प्रतिकूल विकास योजनाओं के कारण उससे जो नुकसान हो रहे है तथा चुनौतियां है उसके विषय में चर्चा की गई हैं।

indiBooks : पुस्तक लेखन से लेकर प्रकाशन तक की प्रक्रिया के अनुभव को साझा करना चाहेंगें? ताकि आपके अनुभव से नये लेखक कुछ अनुभव प्राप्त कर सकें।

Dalip Singh Bisht : सुखद अनुभव रहा है थोड़ा बहुत पेरशानियां आती है उन्हें नजरअंदाज करते हुए आग बढना चाहिए। मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में जो कुछ भी आता है उसे लिखते रहना चाहिए जिससे उसकी सोच दूसरों तक पहुंच सके। हम सोचते, समझते एवं जानते बहुत कुछ है पर लिखते नही है जिससे वह किसी के सामने नही आ पाता है।

indiBooks : दलीप जी, आप साहित्य सृजन कब से कर रहें हैं, अब तक अर्जित उपलब्धियों की जानकारी देना चाहेंगे?

Dalip Singh Bisht : सुखद अनुभव रहा है थोड़ा बहुत पेरशानियां आती है उन्हें नजरअंदाज करते हुए आगे बढना चाहिए। मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में जो कुछ भी आता है उसे लिखते रहना चाहिए जिससे उसकी सोच दूसरों तक पहुंच सके। हम सोचते, समझते एवं जानते बहुत कुछ है पर लिखते नही है मैं 1996 से लगातार लेखन कार्य कर रहा हूं मेरे 100 से अधिक लेख/कवितायें विभिन्न राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय/स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं, पोर्टर, ब्लाग, यूट्यूब आदि पर प्रकाशित हो चुकी हैं तथा यादें: एक पर्यावरणीय आंदोलन/अभियान चलाकर लोगों को पीपल लगाने के लिए प्रेरित कर रहा हूं।

indiBooks : आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करते है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

Dalip Singh Bisht : मैं हमेशा अपना लेखन कार्य हिन्दी में करता हूं, जिसमें उत्तराखण्ड के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं पर्यावरणीय मुद्दे प्रमुख होते हैं। पर मेरा सबसे अधिक रुचि का विषय पर्यावरण हैं।

indiBooks : आपकी रचनाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत क्या है?

Dalip Singh Bisht : स्वयं मैं हूं।

indiBooks : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना चाहेंगें?

Dalip Singh Bisht : अटल विहारी वाजपेयी, एपीजी अब्दुल कलाम जैसे महान लोग मेरे आईडियल है। सत्यार्थ प्रकाश, रामचरितमानस आदि विभिन्न धार्मिक एवं पर्यावरणीय पुस्तके पढ़ना मैं पसंन्द करता हूं।

indiBooks : आप परिवार और शिक्षा सेवा में कार्यरत रहकर साहित्य सृजन के लिए समय कैसे निकालते हैं?

Dalip Singh Bisht : समय निकालना नही पड़ता है बल्कि आपके पास लगन होनी चाहिए। जैसे पिछले वर्ष से कोराना काल चल रहा है बजाय कोरोना के बारे में सोचने के मैने समय का सदुपयोग कर अपना लेखन कार्य किया है, जिसमें मैं सफल रहा हूं।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Dalip Singh Bisht : हमें समय-समय पर लेखन के अलावा प्रतियोगितायें तथा कार्यक्रम चलाकर हिन्दी साहित्य सृजन को लोगों तक पहुंचाना चाहिए जिससे लोग अपनी भाषा में पढकर इस ओर प्रोत्साहित हो सके।

indiBooks : शिक्षण कार्य और साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Dalip Singh Bisht : खाली समय में कुछ न कुछ लिखता रहता हूं इसके अलावा मैं सोना (आराम) बहुत पंसद करता हूं और बहुत अधिक सोता भी हैूं।

indiBooks : अब तक पुस्तक प्रकाशन के दौरान प्रकाशन अनुभव और प्रकाशकों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?

Dalip Singh Bisht : प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का मैं तहेदिल से आभारी हूं, श्री राजेन्द्र सिंह विष्ट जी से सम्पर्क करने पर उन्होंने तुरंत पुस्तक प्रकाशन के लिए हामी भर दी और बहुत कम समय में मेरी पुस्तकें प्रकाशित कर मेरे हाथों में पहुंच चुकी है।

indiBooks : क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Dalip Singh Bisht : हां जल्दी मेरी एक और पुस्तक प्रकाशित करने की योजना है जो इसी वर्ष प्रकाशित हो जायेगी। पुस्तक महिलाओं से सम्बन्धित विषय पर होगी।

indiBooks : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

Dalip Singh Bisht : कभी यह न सोचें की मेरी कृति कैसे होगी लोग क्या कहेंगे, बल्कि निरन्तर अपना कार्य जारी रखें। लोगों का कार्य कहना है वह कुछ न कुछ कहते रहेंगे। बाकि सकारात्मक आलोचना के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए जो आपको आगे बढाने का सबसे अच्छा माध्यम है, इसलिए उससे घबराने की आवश्यकता नही है।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

Dalip Singh Bisht : हां क्यों नही।

indiBooks : दलीप जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगें?

Dalip Singh Bisht : सभी मित्रों एवं शुभचिंतकों का मैं दिल से आभार व्यक्त करता हूं, जिनके बल पर मैं अपना लेखन कार्य कर रहा हूं और कहना चाहूंगा कि वह लगातार लेखन को जारी रखें जिससे उनके विचार सबके सामने आ सकें और अपने को व्यस्त रखने का यह एक अच्छा माध्यम भी है।

Author’s Published Books

  1. Hindi Garhwali Kavya Sangrah avm Garhwali Lokoktiyan (Aukhana-Pakhana)
  2. Uttarakhand Vikas and Aapdayen
prachi

2 COMMENTS

  1. Dr दलीप बचपन से ही रचनात्मक प्रवृति के तो रहे ही हैं साथ ही पकृति प्रेमी और पर्यायवरण के संरक्षक

  2. आपकी लोक प्रिय रचना गढ़वाली लोकोक्तियां (औखाणा-पखाणा) से गढ़वाली बोली के गूढ़ शब्दों के अस्तित्व को बचाने के लिए भविष्य में महत्त्वपूर्ण साबित होंगे। गुरु चौरंगीनाथ नाथ से कामना करता हूँ कि आप इसी तरह पर्यावरण के मुद्दों के साथ साथ गढ़वाली बोली के उत्थान को अपनी लेखनी में प्रमुखता के साथ समाज के सम्मुख प्रस्तुत करेंगे।

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