‘काव्य प्रभा’ साझा काव्य संकलन के लेखक देवेंद्र नारायण तिवारी जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के द्वारा काव्य प्रभा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया है। जिसका संपादन सुधा सिंह ‘व्याघ्र’ द्वारा किया गया है। ‘काव्य प्रभा’ में देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। पेश है ‘काव्य प्रभा’ काव्य संग्रह के एक लेखक देवेंद्र नारायन तिवारी ‘देवन’ जी से साक्षात्कार-

indiBooks : देवेन्द्र जी, क्या आप अपने शब्दों में हमारे सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देना चाहेंगे? क्योंकि आपके शब्दों में हमारे पाठक आपके बारे में ज्यादा जान पाएंगे।

देवेन्द्र नारायण तिवारी : मुझे मेरे जानने वाले देवन के नाम से पुकारते है, मेरा पूरा नाम देवेंद्र नारायण तिवारी है और वर्तमान में नेहरू इंटर कॉलेज पनवाड़ी (जिला महोबा) में जीव विज्ञान प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। उत्तर प्रदेश के महोबा जिला में मेरा गांव छतेसर है, मेरे गांव छतेसर के ही सरकारी स्कूल में मेरी प्रारम्भिक शिक्षा और जूनियर की शिक्षा पूरी हुई है। इसके बाद 10वीं व 12वीं बोर्ड की परीक्षा को विज्ञान विषय से मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के शासकीय विद्यालय से पूरा किया, इसके बाद विज्ञान से स्नातक व परास्नातक के साथ ही मास्टर उपाधि हासिल की, अभी विज्ञान शिक्षण के साथ साथ जो समय मिलता है उसे हिंदी साहित्य को लगा देता हूँ।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में अन्य सहयोगी रचनाकारों के साथ सहयोगी रचनाकार के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में सहयोगी रचनाकार के रुप में मेरा अनुभव अत्यंत रोचक रहा है, ऐसा लगता था जैसे कि हम स्कूल के दिनों में वापस आ गए हैं।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में आपकी रचनाएं किस विषय पर आधारित हैं?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : निराशा से आशा की ओर, मतलब यह कि मेरी रचना आपको एक ऊर्जा प्रदान करेगी। हर पढ़ने वाले को एक साहस से भर देगी, साथ ही मेरी कविता अन्नदाता के जीवन को बताती भी है और सरकारी व्यवस्था से सवाल भी पूछती है, कि आखिर क्यों ध्यान नहीं है, किसान पर किसी का?

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : मेरी पहली पुस्तक आरंभ है, जिसके प्रकाशित होने पर मुझसे ज्यादा प्रसन्नता मेरे जानने वालों को हुई थी, मेरे स्कूल के सभी अध्यापक अत्यंत उत्साहित थे और स्कूल से पास होकर जा चुके विद्यार्थी भी अत्यंत हर्सोत्साहित दिख रहे थे। अब भी वह मंजर मेरी नजरों में है, जब मेरी पहली पुस्तक के प्रकाशन पर सबसे पहले मेरे छोटे भाइयों की तरह मेरे स्कूल के युवा अध्यापक राहुल तिवारी, कपिल रैकवार, शिवम तिवारी प्रसन्नतापूर्वक सभी लोगों को बता रहे थे।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : लेखन के अलावा नेहरू इंटर कॉलेज पनवाड़ी (जिला महोबा) में विज्ञान शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : वैसे तो मैं हर कुछ लिखता हूं, परंतु ज्यादा लेखन मेरा पद्य विधा में रहता है।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : मैं सिर्फ इतना कहूंगा हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के उत्थान के लिए तमाम साहित्यकारों का अमिट योगदान रहा है और अब भी कई साहित्यकार लगातार अपना योगदान दे रहे हैं। कई बार हिंदी साहित्य के लिए हम जैसे युवा करना भी चाहें तो प्लेटफार्म नहीं मिलता। indiBooks और The साहित्य युवा साहित्यकारों को प्लेटफार्म प्रदान करके हिंदी साहित्य के उत्थान में एक कड़ी बनकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके शौक या हॉबी?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : लेखन के अलावा ज्यादातर समय मेरा प्रकृति के साथ व्यतीत होता है और शिक्षण कार्य करने के साथ-साथ पेड़ पौधों को लगाना, वन और वन्य जीवो के संरक्षण पर ज्यादा ध्यान देता हूँ। हाँ, कभी खेलने का मन हुआ तो सतरंज़ या बैडमिंटन खेलता हूँ, जो मेरे पसंद के खेल है।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : वर्तमान में एक कहानी लिख रहा हूँ, जो कि एक महिला के संघर्ष और उसकी जिंदगी के कठोर व्यवहार के बावजूद भी उसने हार नहीं मानी।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : मुझे अपने पाठकों और प्रशंसकों से इतना प्यार मिलता है, मानो ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये सब मेरा एक परिवार हैं और मैं उस परिवार में सबसे छोटा हूँ।

indiBooks : आपके पाठकों को काव्य प्रभा क्यो पढ़नी चाहिए? इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

देवेन्द्र नारायण तिवारी : काव्य प्रभा में एक स्थान से नहीं, अपितु पूरे भारत के अलग-अलग राज्यों से कई रचनाकारों ने अपनी रचनाओं को समाहित किया है, पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण चारों दिशाओं की मिली जुली साहित्यिक रचना निश्चित रूप से पाठक के मन पर एक गहरा प्रभाव डालेंगी। हर पन्ने पर एक नयापन मिलेगा, इसलिए पाठकों को इसे अवश्य पढ़ना चाहिए।

About the ‘Kavya Prabha

साहित्य के सभी रसों से पगी ‘काव्य प्रभा’ एक मित्र की भाँति कभी आपको गुदगुदाएगी तो कभी आपके मन-मस्तिष्क को झकझोरती-सी प्रतीत होगी। इस पुस्तक में जहाँ एक ओर विशुद्ध हिंदी की रचनाएँ आपके मन में पैठ जमाती लक्षित होंगी, वहीं दूसरी ओर उर्दू के कुछ ख़याल भी अपना जादू बिखेरते नज़र आएँगे। काव्य प्रभा में स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकार भी आपको अपनी साहित्य सुरभि की मोहक बयार से सहलाएँगे। ‘काव्य प्रभा’ के सभी रचनाकार साहित्य रूपी सागर के उन अनमोल मोतियों की तरह है जिनकी तलाश हर साहित्य प्रेमी को होती है। उम्मीद है इन्हें पढ़कर साहित्य रसिकों की साहित्य पिपासा अवश्य ही शांत होगी।

prachi
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