साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के लेखक डॉ. चन्द्र दत्त शर्मा जी से साक्षात्कार

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नन्हें-मुन्नों के लिए सृजित साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के सभी सम्मानित लेखकों से एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार indiBooks द्वारा किया गया है। बता दें कि ‘बाल काव्य’ साझा काव्य संग्रह का संपादन खेम सिंह चौहान ‘स्वर्ण’, अर्चना पांडेय ‘अर्चि’, निकिता सेन’दीप’ और डॉ. मीना कुमारी सोलंकी ‘मीन’ जी द्वारा किया गया है। संपादकीय टीम द्वारा रचनाओं का स्तरीय चयन और संपादन कार्य बहुत ही शानदार है, जिसके लिए indiBooks की ओर से पुन: ढ़ेरों शुभकामनाएँ। इसी सीरीज़ में हम आपके लिए काव्य संग्रह के एक लेखक डॉ. चन्द्र दत्त शर्मा जी का साक्षात्कार आपके लिए प्रस्तुत कर रहें है।

indiBooks : यदि आप अपने शब्दों में हमारे और आपके सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देंगें, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : मैं डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा रोहतक से हूँ। वर्तमान में प्राध्यापक हिंदी के पद पर कार्यरत हूँ। हिंदी में पीएचडी और शैली साहित्यिक मंच हरियाणा का अध्यक्ष, राष्ट्रभाषा ब्रह्म मंच का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूँ। मुझसे 9671559666 पर संपर्क किया जा सकता है।

अन्य गतिविधियों के रूप में अब तक 13 बार रक्तदान, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, आकाशवाणी रोहतक व हिसार दूरदर्शन से साहित्य प्रदान।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा बाल काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : बाल साहित्य के लिए बाल मन होना चाहिए। कई बार हम अपने जीवन में झांक कर देखते हैं तो जीवन के सबसे सरल तरल और सुखद पल बचपन के ही मिलते हैं। इनमें झांककर हमें उस दुनिया का अहसास होता है जब हम सच्चे ईमानदार, मस्त, उमंग भरे होते हैं। साहित्यकार इन क्षणों को शब्द माला में पिरोकर सबको अनुभूति में खो देना चाहता है, इसलिए हमने बाल साहित्य रचना चाहा, और हो गये शामिल।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : अखिल भारतीय साहित्य परिषद तथा अनेक संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर अब तक 98 प्रमुख सम्मान मिले हैं। प्रमुख – साहित्य सम्राट, साहित्य सारथी, साहित्य श्री, समाज गौरव, समाज सारथी, कमलेश्वर सम्मान, फणीश्वरनाथ रेणु सम्मान, रक्तदान सम्मान, पर्यावरण प्रहरी आदि।

indiBooks : आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं? और कब प्रकाशित हुई थी?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : प्रथम काव्य संग्रह भारतभूमि 2007 में प्रकाशित हुई। ये राष्ट्रभक्ति रचनाओं का संग्रह है। इसके अलावा अब तक 11 पुस्तक प्रकाशन, कुल लेखन 45 पुस्तकें।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और पुस्तक प्रकाशित करने का विचार कैसे बना?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : मैं कक्षा 9 से लिखने लगा। अच्छे ढंग से 1993 में शुरू किया। प्रकाशन से ही हमारी वाणी हमारे मन के भाव दूसरो तक जाकर न केवल मूल्यांकन का साधन बनते हैं वरन दूसरे भी लाभान्वित होते हैं।

indiBooks : पहली पुस्तक के प्रकाशन के दौरान अनुभव कैसा रहा?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : प्रारंभ में कई समस्याएं आती हैं। जब पुस्तक छप जाती है तो ऐसा लगता हैं जैसे कोई बड़ा समर जीतकर घर लौटा हूं। इसके अलावा और भी आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिलती है।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : मेरी सबसे प्रिय विधा काव्य है। इसके बाद लघुकथा।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : प्रेरणा का कोई स्थाई साधन नहीं होता। हवा के झोंके की तरह न जाने किस दिशा से कहां से आ जाए। सूक्ष्म जीव से भी विराट की प्रेरणा मिल सकती है। फिर भी समाज, तत्कालीन परिस्थिति, अपने जीवन के अनुभव प्रमुख है।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : एक समय था जब मुझे मंच न मिला था। हम दो मित्र गए गोष्ठी में पर हमें अवसर नहीं मिला। तब हमने आवेश में आकर खुद का मंच स्थापित किया और उन्हीं लोगो को बुलाना शुरू किया।

मेरा पहला कवि सम्मेलन 1998 में पहला अनुभव भी यादगार रहा। जब हिंदी विभाग अध्यक्ष मेरे गुरु जी डॉ नरेश मिश्र जी ने मुझे 200 रुपए देकर उत्साहित किया। और मेरी बेटी शैली ने जब अपनी पहली कविता सुनाई तो भी 2016 में गुरुजी ने उसे भी 200 रुपए उपहार स्वरूप दिए।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : मेरे सबसे प्रिय कवि कई रहे मैथिली शरण गुप्त, दिनकर जी, निराला और तुलसीदास।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : हम जो भी लिखे सार युक्त व कालजयी लिखे। केवल मनोरंजन के लिए न लिखे।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : पौधारोपण, रक्तदान, गौसेवा।

indiBooks : अब तक प्रकाशकों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : मैंने कई प्रकाशन स्वयं किए है। अर्थ अभाव में प्रकाशक से कम प्रकाशन हो पाया है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : हमारे पाठक ही हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं। वे केवल मनोरंजन को न पढ़े। मूल्यों का साहित्य भी ग्रहण करे।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : मेरी अगली पुस्तक दोहों व मुक्तक पर आधारित होगी। समाज को केंद्रित करके।

indiBooks : नवोदित लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : नवोदित साहित्यकार पहले गहन अध्ययन करे। फिर लिखने लगे। कम लिखे और सार गर्भित लिखे।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा : साहित्य लेखन जीवन में सांसों की तरह हो गया है। एक समय खाना न मिले तो चलेगा, पर रचना करना न छूट पाएगा।

About the ‘Bal Kavya – Poetry Collection’

‘बाल कविता’ यानी बच्चों के लिए लिखी गयी कविता, जिसमें बच्चों की शिक्षा, जिज्ञासा, संस्कार एवं मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर रचना की गई हो। वह चाहे माँ की लोरियों के रूप में हो, या पिता की नसीहतों के रूप में, या बच्चों के आपस के खेल-खेल में हो। इसमें भले ही निरर्थक शब्दों की ध्वनियाँ होती हैं, पर बड़ी आकर्षक होती हैं। ऐसी ही कविताओं को इस साझा संग्रह में शामिल किया गया है, जो नन्हें बच्चों को बहुत पसंद आयेगी।

prachi

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