‘आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारत’ की लेखिका एवं बैंकर डॉ. मीनू पूनिया जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों ‘आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारत‘ पुस्तक प्रकाशित हुई है, जिसकी लेखिका डॉ. मीनू पूनिया जी से indiBooks द्वारा एक साक्षात्कार किया गया। डॉ. मीनू पूनिया जी ने एशियन खेलों में देश को कई पदक भी दिलाएं है। वर्तमान में डॉ. मीनू जी एक बैंकर है और लेखन की दुनिया में भी सक्रिय हैं। हमने डॉ. मीनू जी से बहुत सारे सवाल जवाब किये, उनके बारे में जाना। हमारे पाठकों को भी लेखिका से साक्षात्कार बहुत पसंद आयेगा। पेश है आपके लिए भी डॉ. मीनू पूनिया जी से साक्षात्कार के प्रमुख अंश-

indiBooks : डॉ. मीनू जी, नमस्कार। हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बुहत शुक्रिया। indiBooks टीम गर्वित है कि हमें आपका साक्षात्कार प्रकाशित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। हम आपके बारे में जानते हैं और पाठक भी आपको अच्छी तरह जानते होंगे, लेकिन लेखक के शब्दों में लेखक को जानने का अनुभव अलग होता है, आपसे निवेदन है कि अपने शब्दों में अपना परिचय दें।

डॉ. मीनू पूनिया : मैं डॉ. मीनू पूनिया सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक जयपुर राजस्थान में कार्यरत हूं।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आप एक खिलाड़ी है और उसके साथ ही बैंकर, साहित्य दुनिया में आपका आगमन कैसे हुआ?

डॉ. मीनू पूनिया : मुझे बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक था। इसी शौक के चलते मैंने अपनी कलम चलानी प्रारंभ की। ऐसे ही कागज पर अपनी भावनाओं को उतारते-उतारते कब मेरी भावनाओं ने किताब का रूप धारण कर लिया पता ही नहीं चला। साहित्य से जुड़ाव के चलते ही मैंने पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री अंग्रेजी साहित्य और हिंदी साहित्य में पूर्ण की। इसके अलावा मैंने पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री समाजशास्त्र और लोक प्रशासन विषय, बीएड और कम्प्यूटर डिप्लोमा कोर्स भी किया है।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, एक खिलाड़ी के रूप में आपकी अब क्या उपलब्धियाँ रहीं?

डॉ. मीनू पूनिया : मैंने एशियन खेलों में शामिल मार्शल आर्ट खेल (जु- जित्सू) की राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं (जिसमें साउथ एशियन चैंपियनशिप, वर्ल्ड रैंकिंग टूर्नामेंट इत्यादि शामिल हैं) में अनेकों पदक जीत कर अपने देश को गौरवान्वित किया है। इससे पहले मैं राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य रह चुकी हूं।

indiBooks : हमने देखा है कि आपके व्यक्तित्व पर पहले कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हुई है, आपके परिवार एवं मित्रगण इसके लिए गर्व अनुभव करते होंगे। इस बारे में कुछ कहें और इन पुस्तकों के बारे में भी कुछ बताएं?

डॉ. मीनू पूनिया : जी बिल्कुल, परिवार एवं मित्रगण इसके लिए बहुत गर्व का अनुभव करते हैं। भारतीय खिलाड़ी बेटियां और स्पेक्ट्रम स्मारिका में मेरे व्यक्तित्व पर लेख लिखा गया है जिसमें मेरे संघर्ष की कहानी को बयां किया गया है। फ्यूचर विजनरी लीडर फॉर इंडिया ए बायोग्राफी ऑफ डॉ मीनू पुनिया मैं माल्टा आइसलैंड की प्रसिद्ध लेखिका कैथरीन गेलिया ने मेरे संघर्ष से प्रभावित होकर मेरी जीवनी को अपने शब्दों में व्यक्त कर ई-बुक प्रकाशित की है।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आपकी पिछले दिनों ही एक पुस्तक आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारतप्रकाशित हुई है, क्या इससे पहले भी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं? उनके बारे में बताएं।

डॉ. मीनू पूनिया : जी हां इससे पहले मेरी अन्य पुस्तकें मेरे एहसास, व्यंग्य की नई धार, साझा काव्य संग्रह (अभिजना, काव्य प्रभा, रिश्तो का ताना बाना, दिव्य चेतना) इत्यादि प्रकाशित हो चुकी हैं।

indiBooks – पहली पुस्तक किसी भी लेखक या लेखिका के लिए पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही मायने रखती है और उसके प्रकाशन की खुशी अलग ही होती है, आपके के लिए भी पहली पुस्तक कितनी खास रही?

डॉ. मीनू पूनिया : यह बात बिल्कुल सही है कि किसी भी लेखक के लिए उसकी पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही महत्व रखती हैं। पहली पुस्तक के प्रकाशन की खुशी का अंदाजा शब्दों से लगाना शायद नामुमकिन है। मेरी पहली पुस्तक के प्रकाशन के बाद मुझे आजाद परिंदे जैसा महसूस हुआ। बिल्कुल ऐसा लगा जैसे मैं खुले चमन में अपने आजाद पंखों के साथ उड़ रही हूं और चीख-चीख कर सबको आसमान से बता रही हूं कि आज मैं बहुत खुश हूं। मेरी पहली पुस्तक मेरे एहसास हमारी शादी की 5वी सालगिराह पर प्रकाशित हुई थी, जिसमें मैंने अपने पति के प्रति अपनी भावनाओं और अपने समर्पण को पुस्तक के रुप में प्रकाशित किया था।

indiBooks : पुस्तक आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारतके बारे में जानकारी दें, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

डॉ. मीनू पूनिया : मेरी इस पुस्तक में मैंने जीवन के उद्देश्य को पहचानने तथा उद्देश्य तक पहुंचने के 10 आसान तरीके आप सबके साथ साझा किए हैं, जिसको पढ़ कर हम कुछ हद तक अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। मेरी इस पुस्तक में बताया गया है कि कैसे हम अपने उद्देश्य तक पहुंचे, कैसे हम अपने उद्देश्य को पहचाने, कैसे हम स्वयं को आत्म जागरूक बनाएं, लक्ष्य और उद्देश्य को कैसे अलग करें, अपने स्वाभिमान और अपने सिद्धांतों के साथ कैसे जिएं, अपने दर्द, पीड़ा और कठिनाई को अपने उद्देश्य में कैसे बदलें और कैसे सुनहरी यादों को अपनी तिजोरी में रख कर सुकून के साथ धरती से विदा हो सके, कैसे डिप्रेशन जैसी समस्याओं से खुद को बाहर निकालें इत्यादि।

indiBooks : पुस्तक ‘’आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारतके लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगी?

डॉ. मीनू पूनिया : इस पुस्तक को लिखने में मुझे लगभग 2 साल का समय लगा। इसके दौरान मैंने बहुत से महापुरुषों की जीवनी पढ़ी, बहुत सी किताबों का अध्ययन किया, अपने अनुभव को अपने पति के साथ साझा किया और सब को मिलाकर जो भी सकारात्मक विचार मेरे जहन में उठे, उनको कागज पर उतार दिया। जब यह पुस्तक लिखकर पूरी हो गई तब प्राची डिजिटल पब्लिकेशन से प्रकाशन के लिए बातचीत की। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन की सभी प्रकाशन संबंधी शर्तें पढ़ने के बाद इन से जुड़ने का विचार बनाया। तब से लेकर किताब प्रकाशित होने तक उन्होंने सकारात्मक सहयोग दिया तथा बहुत ही कम समय में उच्च गुणवत्ता की पुस्तक प्रकाशित की। इसके लिए मैं प्राची डिजिटल पब्लिकेशन की संपूर्ण टीम का हृदय से आभार प्रकट करती हूं।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कहां से आया या कैसे प्रेरणा मिली?

डॉ. मीनू पूनिया : जैसा कि मैंने आपको बताया मुझे बचपन से ही कविताएं, कहानियां लिखने का शौक है। जब मैं अलवर रहती थी, तब मेरी मुलाकात राजस्थान के प्रसिद्ध कवि आदरणीय बलबीर सिंह जी ‘करुण’ से हुई। मेरी साहित्य में रूचि देखकर उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए अपनी कुछ पुस्तकें सप्रेम भेंट की तथा अपने जीवन के बारे में अपने अनुभव भी मेरे साथ साझा किए। उनकी 20 से ज्यादा किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनका संग्रह उन्होंने अपने कमरे में कर रखा है। बलबीर जी की ही एक पुस्तक ‘ हंसा हेर हेर हैरानी’ को पढ़कर मेरे मन में प्रकाशन का विचार आया।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आपकी किताब आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारतके लिए आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त हुआ?

डॉ. मीनू पूनिया : इस किताब को लिखने में मुझे सबसे ज्यादा सहयोग मेरे पति राजेश पूनिया का प्राप्त हुआ, जिनसे प्रेरणा लेकर मै इस पुस्तक को आज आप सभी तक पहुंचाने में सफ़ल हुई।

indiBooks : आपने पहली बार साहित्य की किस विद्या में और कब लिखा?

डॉ. मीनू पूनिया : जहां तक मुझे संभवत: याद है, मैंने अपनी प्रथम रचना एक कविता के रूप में लिखी, जो व्यंग्यात्मक शैली में थी। उस समय मेरी उम्र तकरीबन 9-10 साल रही होगी। पहली दो पंक्तियां आज भी मुझे याद हैं-

”100 में से 99 बेईमान
 फिर भी मेरा देश महान’

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आप साहित्य जगत में कब से सक्रिय हैं, अब तक अर्जित उपलब्धियों की जानकारी देना चाहेंगीं?

डॉ. मीनू पूनिया : इस सवाल का जवाब देना तो उतना ही कठिन है, जितना कि आसमान में तारे गिनना। जब से होश संभाला था, तब से काग़ज़ पर अपने विचार और अपनी भावनाओं को व्यक्त करते रहे हैं। बचपन की चुलबुली कविताओं (नीचे दी गई कविता) के साथ से कब साहित्य जगत में पैर रखा, इसके बारे में बताना मुश्किल है।

वर्षा आए वर्षा आए
सारे गांव में खुशियां छाये,
पेड़ सभी लहरा रहे हैं
पक्षी सभी चहचाह रहे हैं
भंवरा कोयल गीत सुनाए
वर्षा आए वर्षा आए।

जब भी अन्दर से आवाज आती है, बस कलम उठा कर लिखना शुरू कर देती हूं। 30 से ज्यादा साहित्यिक संस्थाओं ने मेरी रचनाओं को स्थान दिया है तथा अभिजना साहित्य सम्मान 2019, आगाज़ ए कलम साहित्य सम्मान और स्व. सुमित्रानंदन पंत मेमोरियल साहित्य सम्मान 2020 से मुझे नवाजा गया है, जिसके लिए मैं सभी का आभार प्रकट करती हूं।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतीं है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

डॉ. मीनू पूनिया : मुझे व्यंग्यात्मक शैली में लिखना अच्छा लगता है। किस शैली और विद्या में लिखना आसान है, इसका मेरे पास सटीक जवाब नहीं है क्योंकि हर लेखक की अपनी एक शैली और विद्या होती है। यह तो अंतरात्मा की आवाज होती है जिसको एक लेखक शब्दों में बदलकर कागज पर उतारता है। अपनी इस भावना को लेखक जिस रूप में कागज पर उकेरता है, वही बाद में शैली या विधा बन जाती है।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आप परिवार और बैंकिंग सेवा में कार्यरत रहकर साहित्य सृजन के लिए समय कैसे निकालते हैं?

डॉ. मीनू पूनिया : यह सब मेरे मन की जीत से संभव हो पाता है। मैंने अपनी पुस्तक आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारतमें भी एक जगह इस बात का ज़िक्र किया है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत। जब हम अपने मन में ठान लेते हैं कि हमे यह कार्य करना ही है, तो हम आसानी से अपनी बहुआयामी जिंदगी में सामंजस्य बिठाने में सफ़ल हो जाते हैं। वैसे भी मै एक नारी हूं और जगत जननी नारी इस पृथ्वी की सबसे मजबूत प्राणी होती है। एक नारी के लिए कोर्इ भी कार्य मुश्किल नहीं होता। मेरे पास हर समय मेरी डायरी और पैन मौजूद होता है, जब भी मेरे मन में कोई विचार आता है तो मै तुरंत उसे डायरी में लिख लेती हूं। फिर चाहे मै ड्यूटी पर होऊ या फिर कहीं रास्ते में। इससे मुझे साहित्य लेखन में सहायता मिलती है।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

डॉ. मीनू पूनिया : मैं यह मानती हूं कि अपनी बात रखने का सबसे अच्छा साधन कलम है। समाज में रहते हुए अपने इर्द गिर्द फैले सकारात्मक और नकारात्मक दोनो ही तरह के वातावरण के अनुसार अपने मन और दिमाग में आए समस्त पहलुओं को देखकर और महसूस कर रचना लिखने का प्रयास करती हूं। मुझे सबसे ज्यादा प्रेरणा मेरे नारी होने के आत्मविश्वास से मिलती है।

indiBooks : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहें?

डॉ. मीनू पूनिया : अपनी उपलब्धियों के बारे में ज्यादा क्या बताऊं बस अपना कर्म किए जा रही हूं तथा मेरे द्वारा किए गए सकारात्मक कर्मों का फल अनेकों अवॉर्ड्स और सम्मान से समय-समय पर सम्मानित मंच और विभूतियों द्वारा प्रदान किया जाता रहा है। इन्हीं सब से संबंधित इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड 2017, नेशनल प्राईड बुक ऑफ रिकॉर्ड 2019, वर्ल्ड किंग बुक ऑफ रिकॉर्ड 2017, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड 2020, वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी लंदन से डॉक्टरेट की मानद उपाधि, इंडियाज ग्रेट लीडर अवॉर्ड 2018, Red FM 94.3 द्वारा स्पोर्ट्स स्टार अवॉर्ड 2015, सशक्त नारी सम्मान 2019, वूमेन ऑफ द फ्यूचर अवार्ड 2019, कोरोना वॉरियर्स सम्मान 2020, हावर्ड मेडिकल स्कूल द्वारा मैकेनिकल वेंटीलेशन फॉर कोविड-19 सर्टिफिकेट 2020 इत्यादि सम्मान से मुझे नवाजा जा चुका है। इन्हीं सब सम्मान और आप सब के आशीर्वाद से प्रेरित होकर मैं समाज सेवा में और अधिक सकारात्मक योगदान आगे भी देती रहूंगी।

indiBooks : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना चाहेंगी?

डॉ. मीनू पूनिया : कोई भी एक किताब मेरी सबसे अधिक पसंदीदा नहीं है। मैं किताबों को अपना दोस्त समझती हूं तथा हर वह सकारात्मक पुस्तक मैं हमेशा पढ़ना चाहती हूं जो मुझे प्रेरित कर और अधिक ऊर्जावान बनाती हैं। मुझे विलियम शेक्सपियर और महादेवी वर्मा जी की रचनाएं पढ़ना ज्यादा अच्छा लगता है।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

डॉ. मीनू पूनिया : हिंदी भाषा के लिए बहुत कुछ कहने का मन कर रहा है, लेकिन आप और हम चाह कर भी हिंदी भाषा का उत्थान नहीं कर सकते हैं। जब तक हमारे देश का संविधान अंग्रेजी भाषा में रहेगा, जब तक प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी गलत प्रश्न के हल के लिए हिंदी वर्जन को मान्य नहीं किया जाएगा, तब तक हमारी मातृभाषा हिंदी का दम घुटता रहेगा। मै अपनी कविता “पराधीन आजादी” की चन्द पंक्तियां आपके साथ साझा करना चाहूंगी-

मातृभाषा हिंदी घुट गई स्वयं के ही देश में
ऐसे तो भारत आजाद हो नहीं पाएगा,
जब तक धारा पढ़ेंगे अंग्रेजी में हम
अस्तित्व हमारा पराधीही कहलाएगा,
हां! यही तो है हमारी पराधीन आजादी
संविधान की भाषा भी अंग्रेजी ही बना दी,
गोरों की बू तो अब भी आ रही
मीनू आज यह क्या खूब कह गई।।

indiBooks : बैंकिग सेवा और साहित्य सृजन के अलावा आपके पसंदीदा कार्य, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

डॉ. मीनू पूनिया : बैंकिंग सेवा, साहित्य सर्जन और खेल के अलावा मुझे रक्तदान करना, लगातार पढ़ाई करते रहना, महिलाओं को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देना, मिरर राइटिंग लिखना, दुर्लभ सिक्कों का संग्रहण करना, स्पीड वोटिंग, बाइक रेसिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट करना, परिवार के साथ हिल स्टेशन पर समय बिताना, पौधारोपण, घर में पड़ी बेकार चीजों का दोबारा उपयोग करके नई चीजें बनाना, समाज सेवा में अपना सकारात्मक योगदान देना पसंद है।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के दौरान प्रकाशकों का कितना सहयोग प्राप्त हुआ?

डॉ. मीनू पूनिया : पुस्तक प्रकाशन के दौरान प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का सकारात्मक सहयोग प्राप्त हुआ। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन बहुत ही अच्छा प्लेटफार्म है, जिनकी किताब की कवर प्रिंटिंग बहुत ही अच्छी है तथा बहुत ही कम समय में अच्छी क्वालिटी दी जाती है। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन की टीम पूरा सहयोग करती है जब भी हम इनसे किताब में त्रुटि सुधार के लिए भेजते हैं तो कितनी बार भी भेजो लेकिन इनका सकारात्मक सहयोग और अच्छा रिस्पांस मिलता है। जब भी इनको फोन या व्हाट्सएप पर 24 घंटे में पब्लिकेशन से संबंधित संपर्क किया जाता है तब यह तुरंत हाजिर जवाब देते हैं, यह इनकी सबसे अच्छी विशेषता है। मैंने और भी प्रकाशन से किताब प्रकाशित करवाई हैं लेकिन इनकी सबसे अच्छी क्वालिटी और सकारात्मक सहयोग है। यह अभी तक मेरा सबसे बेस्ट प्रकाशन है। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन को मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। मैं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

डॉ. मीनू पूनिया : जी हां अभी मैं एक और पुस्तक प्रकाशित करने की योजना बना रही हूं, जिसका शीर्षक होगा “धुंधली परछाई”। मेरी यह पुस्तक नारी सशक्तिकरण पर आधारित होगी तथा इसमें मेरे द्वारा लिखा जाएगा कि किस प्रकार नारी धुंधली परछाई के समान होते हुए भी कैसे हर कदम पर एक पुरुष का साथ निभाती है।

indiBooks : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

डॉ. मीनू पूनिया : मैं नए लेखकों को बस यही सलाह देना चाहूंगी कि किसी की भी नकल किए बिना अपने मन की भावनाओं को ईमानदारी के साथ कागज पर उतारे जिससे रचनाओं के भाव और अधिक प्रभावशाली हो सके। लेखन के साथ साथ अच्छे प्रकाशन से जुड़े जिससे हमारे द्वारा लिखी गई रचनाओं को सकारात्मक और प्रभावशाली मंच मिल सके तथा हम अपनी रचनाओं को हर वर्ग और नए लेखकों तक पहुंचा सकें।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

डॉ. मीनू पूनिया : जी बिल्कुल मैं मेरी आख़िरी सांस तक लेखन के साथ जुड़ी रहूंगी।

indiBooks : डॉ. मीनू जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?

डॉ. मीनू पूनिया : मैं अपने अनुभव और सामर्थ्य के अनुसार आपको बस यही सुझाव देना चाहूंगी कि क्रोध और ईर्ष्या को अपने पर हावी ना होने देकर पूर्ण ईमानदारी के साथ अपने कर्मों को करते रहिए तथा गलत का हर कदम पर विरोध करके अपने सकारात्मक सिद्धांतों के साथ अपनी जिंदगी को जीने की कोशिश कीजिए।

About the Author’s Book

वैसे तो हर इंसान की अपनी अपनी सोच और नज़रिया होता है, फिर भी मैं अपनी सोच, भावनाएं और अनुभव को अपने सामर्थ्य के अनुरूप कागज पर उकेर कर दस आसान तरीके आपके साथ साझा कर रही हूँ, जिनसे हमे खुद को पहचानने मे मदद मिलेगी। किस प्रकार हम अपने उदेश्य तक पहुँचे, कैसे अपनी ज़िंदगी को थोड़ा सरल तरीके से जिये, कैसे सुलझाए छोटी छोटी उलझनों को। बस इन्ही को मिलाकर ही तो मैंने अपनी पुस्तक ‘आत्म जागरूक नारी समृद्ध भारत’ लिखने का प्रयास किया है। आशा करती हूँ कि मेरे इस प्रयास से आप भी कुछ सीख पाएँगे तथा अपने जीवन मे कुछ सकारात्मक बदलाव भी कर पाएँगे।

मजबूत बन आगे बढ़
खुद को कम मत आंकना
घर की चारदिवारी से बाहर निकल
मुसीबतों का कर सामना
लड़खड़ाए बिना कदम बढ़ा
दुनिया को तेरा दम दिखा
नारी शक्ति को हथियार बना
जग में अपना नाम कमा

-डॉ. मीनू पूनिया (कवयित्री, लेखिका एवं बैंकर)

prachi
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Rajesh

प्राची डिजिटल प्रकाशन का बहुत ही अच्छा साक्षात्कार ऐसी लेखिका पर हमें गर्व है