‘अनवरत’ लघुकथा संग्रह के एक लेखक गिरधारी विजय ‘अतुल’ जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा एक साझा लघुकथा संग्रह ‘अनवरत‘ प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन देवेन्द्र नारायण तिवारी ‘देवन’ जी द्वारा किया गया है। ‘अनवरत’ में देशभर से चुन्निदा रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें से एक लेखक गिरधारी विजय ‘अतुल’ जी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जा रहा है। प्रस्तुत है ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह के एक लेखक गिरधारी विजय ‘अतुल’ जी से साक्षात्कार-

indiBooks : हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। क्या आप हमारे पाठकों को अपने शब्दों में परिचय देंगें?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : वैसे तो स्कूल से लेकर कॉलेज शिक्षा तक गिरधारी लाल विजय नाम रहा परंतु साहित्यिक दुनिया में प्रवेश के बाद नाम गिरधारी विजय ‘अतुल’ रखा। अतुल्या मेरी चार साल की छोटी बेटी का नाम है।

प्रारंभ से ही मेरी जन्म-स्थली गुलाबी नगरी जयपुर ही रही है। शादी नौकरी और बच्चें सब यहीं पर। वैसे तो अपने बारे में कहना किसे अच्छा नही लगता मगर मेरा जीवन सदैव भटकाव वाला रहा। जीवन में कोई उद्देश्य लेके नहीं चलने का मलाल आज भी है। लगभग पंद्रह से ज्यादा नौकरियाँ की। पत्रकारिता भी बहुत की। परंतु सच्चा सुख और संतोष साहित्य-मंदिर में आकर मिला। किसी दिन लिखना छूट जाएं तो जीवन में कुछ रिक्त-सा लगता है। जीवन में पत्नी-बच्चों का भरपूर सहयोग मिला। पत्नी कविता जयपुर के सेंट सोफिया स्कूल में हिंदी की अध्यापिका के पद पर कार्यरत है। मेरा मानना है जीवन की असली समझ 40 पार की अवस्था के बाद ही आती है।

indiBooks : आपने साझा संकलन ‘अनवरत’ में प्रतिभाग किया है। ‘अनवरत’ के साथ अनुभव को हमाारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : ‘अनवरत’ लघु-कथा संग्रह से जुड़ना अपने आप में सटीक और बेजोड़ अनुभव रहा। देवेन जी बधाई के पात्र हैं। जिन्होंने भीड़ से अलग कुछ नया करने का बीड़ा उठाया है। इस संकलन के माध्यम से नए रचनाकारों को उभरने का अवसर मिलेगा। इस कार्य में प्राची डिजिटल पब्लिकेशन की भी सराहनीय भूमिका रही है। बहुत कम समय में प्राची डिजिटल पब्लिकेशन ने अपनी एक पहचान बनाई है। प्राची डिजिटल पब्लिकेशन ने उभरते नए युवा रचनाकारों को एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाया है। वांछित मूल्य, आकर्षक छपाई, सुस्पष्ट अक्षर, उम्दा कागज और रंगीन सुंदर कवर पेज प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का मुख्य उद्देश्य रहा है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? उनके बारे में जानकारी दें।

Girdhari Vijay ‘Atul’ : खुले मंच पर केवल एक बार सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ है। गुरुग्राम में ‘पिता’ पर कविता प्रतियोगिता में श्रेष्ठ रचना के लिए सम्मानित किया जा चुका है। उस दिन पहली बार देश के अनेक ख्यातिनाम रचनाकारों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके अलावा दर्जनों राष्ट्रीय संग्रहों व ई-संग्रहों में ढेरों सम्मान मिल चुके हैं परंतु खुले मंच पर सम्मानित होने का एक अलग ही आनंद है। इस संबंध में मेरा मानना है कि संख्यात्मकता की अपेक्षा गुणात्मकता पर रचनाकार को विशेष ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। कम लिखें मगर अच्छा लिखें। आपकी लेखनी भीड़ से अलग दिखनी चाहिए।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : नहीं! एक भी पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई मगर इसके लिए प्रयासरत हूँ। अभी तक तो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में ही रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। इस संदर्भ में मुझे प्रख्यात कथाकार हृदयेश की याद आती हैं। हृदयेश का जब साहित्यिक सफर शुरू हुआ था, तो उस समय लगभग देश की हर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियाँ छप चुकी थी मगर उन्हें वो पहचान नहीं मिली। तब किसी ने उन्हें अपना स्वयं का उपन्यास लिखने की सलाह दी। अक्षर प्रकाशन से उनका उपन्यास ‘गाँठ’ प्रकाशित हुआ। फिर वे रातों-रात प्रसिद्ध हो गए।

indiBooks : लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते हैं?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : जैसा कि मैंने ऊपर बताया था मेरी नौकरी कभी स्थायी नहीं रह सकीं। फिर भी जयपुर के प्रतिष्ठित सीबीएसई विद्यालय में मैंने टाईपिस्ट के पद पर रहते हुए पंद्रह साल बिताए। हिंदी की टाइपिंग आने के कारण लेखन में मुझे इसका भरपूर लाभ मिला। इसके लिए मुझे बाहर जाकर टाईप करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

indiBooks : आपकी पंसदीदा लेखन-विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं? क्यों?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : मेरी साहित्य की प्रमुख विधा तो कहानी ही रही है। मगर समय के साथ-साथ कविताएँ रचने में भी आनंद आने लगा। परंतु फिर भी कहानी लिखना मुझे अधिक सहज लगता है। जबकि सत्य तो यह है कि कहानी लिखने के लिए आपको कथा-वस्तु, पात्र-योजना, संवाद-योजना, भाषा-शैली, स्थान-निर्धारण जैसे घटकों का पूरा ध्यान रखना पड़ता है। आप एक बीस-पच्चीस पंक्तियों की कविता महज एक-दो घंटे में लिख सकते है मगर एक कहानी कई बार तीन-चार दिन तक ले लेती है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक/लेखिका, उनकी पुस्तक, उनकी रचनाओं के बारे में बताइए।

Girdhari Vijay ‘Atul’ : वैसे तो इस प्रश्न के उत्तर में लेखक-लेखिकाओं की बहुत लंबी सूची है मगर प्रेम चंद, फणीश्वरनाथ रेणू, रामधारी सिंह दिनकर और मन्नू भण्डारी मुझे सर्वाधिक प्रिय है। डॉ. नामवर सिंह, रामदरश मिश्र, स्व मंगरेश डबराल, पंकज सुबीर की लेखनी का भी मुझ पर बहुत प्रभाव रहा है। मन्नू भण्डारी के दो उपन्यास ‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ तथा उनकी स्त्री-केन्द्रित कहानियों में ‘त्रिषंकू’, स्त्री-सुबोधिनी’, ‘मैं हार गई’, ‘एक कहानी यह भी’ अत्यधिक पसंद है। पंकज सुबीर का उपन्यास ‘अकाल में उत्सव‘ भी पसंद है। नामवर सिंह, रामदरश मिश्र, स्व मंगरेश डबराल की कविताएँ आम आदमी पर अमिट प्रभाव छोड़ती है।

indiBooks : हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : जहां तक हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य के उत्थान की बात है तो मुझे लगता है हिंदी भाषा अब वैश्विक हो गई है। विश्व के लगभग 40 से अधिक देशों में हिंदी ने अपने पैर पसार लिए हैं। मगर आज भी हिंदी को संवैधानिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, साहित्य की बात करें तो ‘‘ठीक-ठाक’ वाली स्थिति में ही है। साहित्य की जो बात सन् 60-80 के दशक में थी, वो अब नहीं। लगता है, साहित्य केवल रचनाकारों तक ही सीमित होकर रह गया है। आम आदमी तो इससे बहुत दूर है। वहीं सोशल मीडिया के आने से साहित्य अवष्य आम-जन तक पहुँचा है। विशषकर कोरोनाकाल में सोशल मीडिया ने साहित्य को जो आगे बढ़ाने में महत्ती भूमिका निभाई है, वह अपने आप में प्रशसनीय रहीं।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना, जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : मेरे पिता मेरे सर्वाधिक प्रेरक रहे है। मुझे जहाँ तक स्मरण है जब मैं आठ-दस साल का था तब हर दिन पिताजी की साईकिल के पीछ-पीछे आठ आने लेने के लिए काफी दूर तक भाग जाया करता था। पिताजी मेरी आदत से परिचित थे। उस समय वे मुझे आठ आने देकर घर जाने को कहते थे। उस आठ आने से मैं किराए की साइकिल लेकर चलाया करता था। आज जब खुद तीन बच्चियों का पिता हूँ तो पता चला कि शौक तो माँ-बाप के पैसों से पूरे होते थे, आज तो सिर्फ जरूरतें पूरी होती हैं।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहे हैं? यदि हां तो, अगली पुस्तक किस विषय पर होंगी?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : जैसा कि मैंने उपर बताया था मेरी अभी तक कोई पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है। मन की अभिलाषा है कि मेरा पहला प्रकाशन कहानी-संग्रह ही हो। पहली पुस्तक के बाद उपन्यास के प्रकाशन की योजना है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Girdhari Vijay ‘Atul’ : संदेश यही कि कार्य वही करें जिसमें आपको आनंद मिलता हो। मन को अच्छा लगता हो। जबरन थोपे गए कार्य पूरे तो हो जाते हैं मगर जीवन भर आपको मलाल रहता है। जो भी करना है, आज करें, अभी करें। ऐसा नहीं हो कि जब आप 70 साल के हो जाएं और बिस्तर पर पड़े-पड़े ये सोचें कि काश उस दिन मैं ये कर लेता, वो कर लेता। समय हर व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ने का दो-तीन अवसर अवश्य देता है। बस आपको उन अवसरों को पहचानना है।

About the Book

‘Anvarat’ short story compilation is an appraisal of true events, on one hand while there are childhood rites in this book, on the other hand it is a civilization that teaches the rites to the inferior human. Somewhere the hero-heroine’s love is tested, and elsewhere the maternal love is synonymous with life. Somewhere there is a satirical attack on politics, and somewhere there is a defeat from the loved ones leaving the eyes moist.

prachi

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