साझा काव्य संग्रह ‘श्रमिक की व्यथा’ के एक लेखक हिमांशु श्रीवास्तव जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों ही The Sahitya और प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के संयुक्त तत्वाधान में श्रमिक की व्यथा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया था। जिसमें देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया था, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। बाकी अन्य सम्मानित कवियों के साक्षात्कार जल्द ही प्रकाशित होने वाले काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ के बाद प्रकाशित किये जाऐगें, क्योंकि बाकी अन्य सम्मानित कविगण काव्य संग्रह काव्य प्रभा में भी प्रतिभाग कर रहें है। पेश है ‘श्रमिक की व्यथा’ काव्य संग्रह के एक लेखक हिमांशु श्रीवास्तव जी से साक्षात्कार-

indiBooks : यदि आप अपने शब्दों में हमारे और आपके सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देंगें, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
Himanshu Shrivastava : मेरा नाम हिमांशु श्रीवास्तव है। मैं रायबरेली उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। बैंक में कार्यरत हूँ वर्तमान में प्रयागराज में नियुक्ति है। मैने बीएससी की पढ़ाई की है । सिविल सर्विसेज की तैयारी भी करता हूं। मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि साहित्यिक नही रही है मेरे अंदर स्वयं इस तरफ रुझान हुआ मुझे लिखने में सुकून मिलता है इस कारण जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है ।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा काव्य संग्रह ‘श्रमिक की व्यथा’ प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
Himanshu Shrivastava : मैं ग्रामीण परिवेश एवं सामान्य परिवार से ताल्लुक रखता हूँ जिस वजह से मैने श्रमिकों की स्थिति नजदीक से देखी है। कोरोना संकट के समय जिस तरह से मजदूरों का पलायन हुआ वह वाकई दर्दनाक था । न्यूज़ चैनल, अखबार, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से एवं स्वयं भी सड़कों पर हालात देखा है जिसे मैंने शब्दों में पिरो दिया।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
Himanshu Shrivastava : चूंकि पहले मैं शौक़िया लिखता था और नौकरी एवं पढ़ाई के कारण ज्यादा समय दे नही पा रहा था इसलिए अभी तक साहित्यिक क्षेत्र में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं हासिल हो सकी है । अभी तक कोई सम्मान भी नही मिला है।the साहित्य द्वारा ‘श्रेष्ठ जन कवि सम्मान’ मेरा पहला साहित्यिक सम्मान है।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?
Himanshu Shrivastava : जी हाँ ‘कुछ शफ़क़त कुछ ख़लिश’ नाम से एक किताब प्रकाशित हुई है जो कि कविता शेर नज़्म आदि का संग्रह है।

indiBooks : लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?
Himanshu Shrivastava : जी मैं बैंक में कार्यरत हूँ ।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं?
Himanshu Shrivastava : लगभग 10 साल से । मेरी उम्र 18-19 रही होगी तब से शौकिया लिखता था लेकिन अब लोग मेरी लेखनी को पसंद करते है जिस कारण से अब गंभीरतापूर्वक लिखने की ओर अग्रसर हूँ।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
Himanshu Shrivastava : मुझे हर विधि में लिखना पसंद है। मैं हिंदी और उर्दू दोनों में लिखता हूँ। मैं कविता शायरी ग़ज़ल नज़्म मुक्तक एवं कहानी भी लिखता हूँ। प्रेम गीत लिखना ज्यादा अच्छा लगता है मैंने शेर काफी लिखे हैं।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
Himanshu Shrivastava : निजी जिंदगी से आस-पास के लोगों की जिंदगी से समाज में होने वाले घटनाओं से प्रेरणा मिलती रहती है। बड़े कवियों शायरों को पढ़ने से बहुत प्रेरणा मिलती है लिखने की । फ़िल्मी गानों से भी प्रेरणा मिलती है ।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
Himanshu Shrivastava : निजी जीवन में मेरी नौकरी लगने को यादगार उपलब्धि कह सकता हूँ साहित्यिक जीवन में मेरी पहली किताब का छपना उपलब्धि रही है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
Himanshu Shrivastava : हरिवंश राय बच्चन , दुष्यंत कुमार , गोपाल दास नीरज , साहिर लुधियानवी, मुन्नवर राना , राहत इंदौरी, कुमार विश्वास, भुवन मोहिनी, विष्णु सक्सेना आदि की रचनाएं।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
Himanshu Shrivastava : हिन्दी हमारी राजभाषा है। हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोलने और समझी जाने वाली भाषा है। अंग्रेजों के जाने के बाद हिन्दी का प्रभाव बढ़ा है खासकर पिछले कुछ सालों में हिंदी का काफी विकास हुआ है लेकिन हम लेखकों, कवियों पर बड़ी जिम्मेदारी है कि हम कैसे हिंदी का परचम पूरे विश्व में लहरायें। इसके लिए हमे हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करना है।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
Himanshu Shrivastava : मुझे गाने सुनना, क्रिकेट खेलना/ देखना , नयी जानकारी प्राप्त करना एवं सोशल मीडिया पर समय व्यतीत करना पसंद है।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
Himanshu Shrivastava : जी हाँ एक किताब कविता शायरी आदि का संग्रह होगी दूसरी कहानियों का संग्रह होगी जो कि विभिन्न विषयों पर आधारित होगी।

indiBooks : नवोदित या साथी लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
Himanshu Shrivastava : मैं नवोदित और साथी लेखकों को यही कहना चाहूंगा कि खूब पढ़े जहाँ से हो सके। आजकल ऑनलाइन साहित्य बड़ी सुगमता से उपलब्ध है इसका लाभ उठाएँ। मेरा मानना है आपको जो पसंद है वो लिखे किसी दबाव में आकर लिखना या लिखना छोड़ना दोनों गलत है । निराश न हों आपमें कुछ बात है तो दुनिया जरूर सराहेगी एकदिन।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
Himanshu Shrivastava : मेरे लिए लिखना व्यवसाय नही है बल्कि मुझे लिखने में मजा आता है । एक सुकून सा मिलता है साहित्य से इसलिए मैं हमेशा लिखता रहूँगा।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
Himanshu Shrivastava : आप लोग ज्यादा से ज्यादा साहित्य को पढें और सराहें ताकि हम जैसे लेखकों को ऊर्जा मिल सके और अच्छा लिखने की।

About the ‘Shramik Ki Vyatha’ Book

लॉकडाउन के दौरान एक तबका जिसे मजदूर के नाम से जाना जाता है, जिनके मजबूत कंधे देश को मजबूत बनाते है, जिनका कठोर परिश्रम किसी फैक्ट्री, बिल्डिंग को बनाने में अपना सहयोग देते हैं, उन्हें लॉकडाउन के कारण अपने गांवों को लौटना पड़ा था। ऐसे में उनकी मनोदशा और पीड़ा को श्रमिक की व्यथा काव्य संग्रह में शामिल सम्मानित कवियों ने अपनी कलम से पाठकों के सामने रखने का बहुत सुन्दर प्रयास किया है। ताकि आप भी मजदूर कहे जाने वाले देश के मजबूत कंधे लिए श्रमिकों की मनाेदशा और पीड़ा को सम्मानित कवियों के रचनाओं में महसूस कर सकें।

prachi

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Himanshu srivastava

बहुत शुक्रिया मेरा साक्षात्कार छापने के लिए 🙏❤️