साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ की लेखिका ज्योति शर्मा जी से साक्षात्कार

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नन्हें-मुन्नों के लिए सृजित साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के सभी सम्मानित लेखकों से एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार indiBooks द्वारा किया गया है। बता दें कि ‘बाल काव्य’ साझा काव्य संग्रह का संपादन खेम सिंह चौहान ‘स्वर्ण’, अर्चना पांडेय ‘अर्चि’, निकिता सेन’दीप’ और डॉ. मीना कुमारी सोलंकी ‘मीन’ जी द्वारा किया गया है। संपादकीय टीम द्वारा रचनाओं का स्तरीय चयन और संपादन कार्य बहुत ही शानदार है, जिसके लिए indiBooks की ओर से पुन: ढ़ेरों शुभकामनाएँ। इसी सीरीज़ में हम आपके लिए काव्य संग्रह की एक लेखिका ज्योति शर्मा जी का साक्षात्कार आपके लिए प्रस्तुत कर रहें है।

indiBooks : यदि आप अपने शब्दों में हमारे और आपके सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देंगें, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
ज्योति शर्मा : मेरा नाम ज्योति शर्मा है, मैं राजस्थान में जयपुर जिले के एक छोटे गाँव में पली बड़ी हूँ। माँ सरस्वती की कृपा से सुशिक्षित और सभ्य परिवार में विवाह हुआ। एक गैरसरकारी विद्यालय में अध्यापिका के रूप में कार्यरत हूँ। हिंदी साहित्य से बचपन से ही प्रेम है,सदैव माँ सरस्वती की कृपा रही है मुझ पर। सभी पाठकों से मैं यही कहना चाहूँगी कि आपका प्रेम और सहयोग हमें मिलता रहे और हम आपके लिए निरन्तर उच्च कोटि का लेखनकार्य करने में सफल हो सकें।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा बाल काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
ज्योति शर्मा : बच्चों और बचपन दोनों से ही लगाव रहा है। यही कारण है कि मैंने अपने नन्हे मुंन्हों के लिए कुछ लिखना स्वीकार किया।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
ज्योति शर्मा : पाठकों द्वारा मिला प्रेम ही सबसे बड़ा सम्मान है मेरे लिए और ईश्वर से प्रर्थना है बस निरन्तर मैं कुछ अच्छा लिखूँ जो मेरे पाठकों के हृदय को छू सके।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और पुस्तक प्रकाशित करने का विचार कैसे बना?
ज्योति शर्मा : मैं अभी नवांकुर हूँ लेखन में। शौक तो बचपन से था पर लिपिबद्ध नहीं किया था, अभी गत वर्ष 2019 से ही आरम्भ किया।

indiBooks : पहली पुस्तक के प्रकाशन के दौरान अनुभव कैसा रहा?
ज्योति शर्मा : अभी कोई नहीं आयी, जो भी आयी हैं साझा ही आयी है, इसलिए अभी तक अनुभव नहीं हुआ है।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
ज्योति शर्मा : कविताओं से अत्यधिक प्रेम है और इसी विधा में लिखना पंसद करती हूँ।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
ज्योति शर्मा : मैं प्रकृति प्रेमी और वहीं से मेरी कविताओं को ऊर्जा प्राप्त होती है।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
ज्योति शर्मा : मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि मैं उसे मानती हूँ, जब ईश्वर ने मुझे मेरे विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अन्नू जौहरी से मिलाया, इसके बाद देहरादून में एस. एस. जी. इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल रविन्द्र सैनी जी द्वारा मेरी कविता को पहली बार पुरस्कृत किया गया।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय उत्तर / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
ज्योति शर्मा : सुमित्रानंदन पंत जी मेरे प्रेरणा स्त्रोत हैं। इनकी चिदम्बरा, पल्लव आदि पुस्तकें मुझे अत्यंत प्रिय हैं।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
ज्योति शर्मा : हिन्दी हमारी मातृ भाषा है, इसका सम्मान हमारा प्रथम कर्तव्य है। हिन्दी लेखन को बढ़ावा मिलना चाहिए, लेखकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। हिंदी साहित्य भारत का गौरव है,इसे बनाये रखने की हम सबकी जिम्मेदारी है।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य रुचियाँ क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
ज्योति शर्मा : मैं संगीत का शौक भी रखती हूँ और साथ ही थोड़ा बहुत गुनगुना लेना भी पसन्द है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
ज्योति शर्मा : सभी से मेरा बस यही निवेदन है कि साहित्य, समाज और देश का एक मजबूत स्तम्भ है। इसे अपने पठन पाठन से और अधिक मजबूत बनाने के लिए सभी लेखकों का सहयोग कर अपना योगदान दें।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
ज्योति शर्मा : प्रयत्नरत हूँ, माँ सरस्वती ने चाहा तो, जरूर आएगी। विषय गोपनीय है।

indiBooks : साथी नवोदित लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
ज्योति शर्मा : मैं सबको यही सलाह दूँगी कि निरन्तर प्रयत्न ही सफलता की कुंजी है।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
ज्योति शर्मा : जी हाँ बिल्कुल रहना चाहूँगी।

About the ‘Bal Kavya – Poetry Collection’

‘बाल कविता’ यानी बच्चों के लिए लिखी गयी कविता, जिसमें बच्चों की शिक्षा, जिज्ञासा, संस्कार एवं मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर रचना की गई हो। वह चाहे माँ की लोरियों के रूप में हो, या पिता की नसीहतों के रूप में, या बच्चों के आपस के खेल-खेल में हो। इसमें भले ही निरर्थक शब्दों की ध्वनियाँ होती हैं, पर बड़ी आकर्षक होती हैं। ऐसी ही कविताओं को इस साझा संग्रह में शामिल किया गया है, जो नन्हें बच्चों को बहुत पसंद आयेगी।

prachi

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