‘अनवरत’ लघुकथा संग्रह की एक लेखिका कल्पना मिश्रा जी से साक्षात्कार

0
22

पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा एक साझा लघुकथा संग्रह ‘अनवरत‘ प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन देवेन्द्र नारायण तिवारी ‘देवन’ जी द्वारा किया गया है। ‘अनवरत’ में देशभर से चुन्निदा रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें से एक लेखिका कल्पना मिश्रा जी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जा रहा है। प्रस्तुत है ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह के एक लेखिका कल्पना मिश्रा जी से साक्षात्कार-

indiBooks : हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। क्या आप हमारे पाठकों को अपने शब्दों में परिचय देंगें?

Kalpana Mishra : मैं सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, बाराबंकी में हिंदी शिक्षिका एवं समन्वयक (जूनियर स्कूल ) के रूप में कार्यरत हूँ। मुझे हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों ही भाषाओँ का ज्ञान है तथा संस्कृत में मैंने पोस्ट- ग्रेजुएशन किया है। हिंदी कहानियां और उपन्यास पढने में सदैव ही मुझे रूचि रही है।

indiBooks : हाल ही में प्रकाशित अपनी नई किताब के बारे में बताएं?

Kalpana Mishra : ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह में मेरी रचनाएँ पहली बार प्रकाशित हुई हैं एवं ‘गंतव्य’ नामक पुस्तक में मेरी कवितायें प्रकाशन की ओर अग्रसर हैं।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरित हुए?

Kalpana Mishra : मुझे सदा से ही लघुकथा, कविताओं एवं डायरी लेखन में रुचि रही है, देवेन तिवारी जी के द्वारा दिए गये इस अवसर को मैंने अपनी रचना के प्रथम प्रकाशन के लिए स्वर्ण अवसर मानकर इस ओर अपने पग अग्रसर करे।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?

Kalpana Mishra : कविता लेखन, संस्मरण लेखन मेरी पसंदीदा लेखन विद्याएं है।

indiBooks : किसी भी लेखक या लेखिका के लिए पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही मायने रखती है और उसके प्रकाशन का अनुभव बहुत खास होता है। क्या आप प्रथम प्रकाशन के उस अनुभव को हमारे पाठकों के बीच साझा करेंगे?

Kalpana Mishra : प्रथम प्रकाशन का श्रेय देवेन तिवारी जी एवं प्राची डिजिटल पब्लिकेशन को जाता है, इस प्रथम प्रकाशन के साथ ही मेरा आत्मविश्वास और भी वर्धित हुआ है और मैं अन्य रचनायों के प्रकाशन के लिए सकारात्मक प्रयास करने के लिए प्रेरित अनुभव कर रही हूँ।

indiBooks : आप साहित्य सृजन कब से कर रहें हैं, अब तक अर्जित उपलब्धियों की जानकारी देना चाहेंगे?

Kalpana Mishra : कविता लेखन, लघु गद्य रचनाएँ मैं अपने कॉलेज के समय से कर रही हूँ, परन्तु अभी तक केवल स्वयं लिखने की संतुष्टि ‘अनवरत’ साझा संकलन प्रकाशन के रूप में आकर गौरवान्वित भी अनुभव करा रही है।

indiBooks : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना चाहेंगें?

Kalpana Mishra : प्रेमचंद, अमृता प्रीतम, अज्ञेय मेरे प्रेरणा स्रोत्र हैं। गोदान, गबन, शेखर एक जीवनी एवं अमृता प्रीतम की कविताएं मेरी अत्यंत पसंदीदा पुस्तकें हैं।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Kalpana Mishra : पठन और लेखन मेरे सदैव के पसंद के शौक हैं, परन्तु फिर भी इसके अलावा पुराने गीत, ग़ज़ल को सुनना, परिवार के लिए कुछ अलग – अलग पकवान बनाना मेरे कुछ अन्य शौक हैं। मैं इसके अलावा अपने खाली समय में सदा कुछ नया सीखने का प्रयास करती हूँ।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Kalpana Mishra : मैं सदा से ही अपने पिता के जीवन से प्रेरित रही हूँ, वह सदा ही बहुत साधारण जीवन बिताते हुए रहते थे, जबकि हमारे लिए उन्होंने उस समय के अनुरूप उच्च से उच्च शिक्षा का प्रबंध किया, उनकी दी हुई शिक्षाएं मैं कभी भी नहीं भूल सकती।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Kalpana Mishra : हिंदी भाषा हमारी राष्ट्रीय भाषा है, हमें सदा ही कुछ लिखते रखने का प्रयास कर इसके साहित्य कोष को बढ़ाने का प्रयास करते रहना चाहिए तथा एक हिंदी शिक्षिका होने के नाते मैं सदा ही विद्यार्थियों को इसके साहित्य के बारे में जागरूक कर इसके प्रति उनकी रूचि को बढ़ाने का प्रयास करती रहती हूँ।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Kalpana Mishra : हमें सदैव ही साहित्य सृजन, पाठन, पठन का प्रयास करते रहना चाहिए। हिंदी के साहित्य का उत्थान ही हमारा उत्थान है।

About the Book

‘Anvarat’ short story compilation is an appraisal of true events, on one hand while there are childhood rites in this book, on the other hand it is a civilization that teaches the rites to the inferior human. Somewhere the hero-heroine’s love is tested, and elsewhere the maternal love is synonymous with life. Somewhere there is a satirical attack on politics, and somewhere there is a defeat from the loved ones leaving the eyes moist.

prachi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here