‘ज़िन्दगी के मायने’ काव्य संग्रह के लेखक लक्ष्मण सिंह त्यागी ‘रितेश’ जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्रकाशित काव्य संग्रह ‘जिन्दगी के मायने‘ काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है। जिसके लेखक लक्ष्मण सिंह त्यागी ‘रितेश’ जी मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं। लक्ष्मण जी को उनके दूसरे सफल प्रकाशन के लिए ढ़ेरों शुभकामनाएं। लक्ष्मण सिंह त्यागी ‘रितेश’ जी indiBooks द्वारा साक्षात्कार किया गया। जिसमें लक्ष्मण जी से उनकी प्रकाशित किताबों और हिन्दी साहित्य के बारे में वार्ता हुई। पेश है आपके लिए भी लक्ष्मण सिंह जी से साक्षात्कार के प्रमुख अंश

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। वैसे तो आपका परिचय आपकी किताब में पढ़ा जा सकता है, लेकिन आपके शब्दों में पढ़ने का अनुभव अलग ही होगा?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : जी नमस्कार और धन्यवाद! आपका जो मुझे इस योग्य समझा। मेरा नाम लक्ष्मण सिंह त्यागी है और साहित्यिक उपनाम रीतेश है मेरा जन्म गाँव बदरिका जिला धौलपुर राजस्थान में दिनांक 25 अगस्त 1986 को एक मध्यम वर्गीय त्यागी ब्राह्मण परिवार में हुआ।

मेरे पिता जी का नाम श्री रमेश चन्द त्यागी (दीनानाथ जी) एवं माँ जी का नाम श्रीमती इन्द्रा त्यागी है। वर्तमान में मैं मध्यप्रदेश के पन्ना जिला में शासकीय उत्कृष्ट आर. पी. उ. मा. वि. पन्ना में शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ।

indiBooks : आपकी पहली पुस्तक कब प्रकाशित हुई थी, उसके बारे में जानकारी दें।

लक्ष्मण सिंह त्यागी : पहली पुस्तक के प्रकाशन में कुछ ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। अभी करीब एक माह पूर्व ही जुलाई 2020 में पोथी प्रकाशन द्वारा मेरा पहला लघुकथा संग्रह ‘सिसकती रातें’ नाम से प्रकाशित हुआ है।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, किसी भी लेखक या लेखिका के लिए पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही मायने रखती है और उसके प्रकाशन की खुशी अलग ही होती है, क्या आप प्रथम प्रकाशन के उस अनुभव और खुशी को शब्दों में बयां सकते हैं?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : आपने बिल्कुल सही कहा। लिखने में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए उसकी पहली किताब प्रकाशित होना अपने आप में अभूतपूर्व अनुभव होता है। मेरे साथ भी ठीक ऐसा ही हुआ और मेरे जीवन की चुनिंदा खुशियों में वो पल शामिल हो गया।

इस बीच आपको मजे की बात बताएं, वो यह है कि मैं करीब बीस वर्ष से पद्य में लिखता आ रहा हूँ और पहली पुस्तक गद्य (लघुकथा) में प्रकाशित हुई है जो कि मैंने अभी करीब एक वर्ष पूर्व से लिखना प्रारंभ किया है।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरणा मिली?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : शायद ये कोरोना ना आता तो अभी पुस्तक के बारे में ऐसी कोई योजना नहीं थी क्योंकि काम इतने सारे रहते हैं कि समय ही नहीं मिल पाता। हाँ, पुस्तक प्रकाशित करानी है ये मेरा लक्ष्य था मगर कुछ साल बाद के लिए सोच रखा था, लेकिन अभी जब समय पर्याप्त मिल गया। मेरे मन में विचार आया कि पुस्तक प्रकाशन के इस कार्य को करके समय का सदुपयोग किया सकता है।

चूंकि मैं मंचों पर काव्य पाठ के लिए नहीं जाता हूँ, तो मेरे पास यही एक उपाय था पाठकों से जुडने के लिए और अपनी बात पहुंचाने के लिए तो पुस्तक प्रकाशन मेरी डायरी में तय था।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, पिछले दिनों आपकी नई किताब ‘ज़िन्दगी के मायने’ प्रकाशित हुई है, उसके बारे में कुछ बताएं। इस पुस्तक में आपने किन विषयों को रखा है?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : जी हाँ! जिंदगी के मायने मेरी पसंदीदा विधा यानि पद्य में रची हुई किताब है जो प्राची डिजिटल पब्लिकेशन मेरठ से प्रकाशित हुई है, जो अगस्त में ही प्रकाशित हुई है।

इसमें अनेक ऐसे विषयों को शामिल किया गया है, जो देखने में छोटे लगते हैं लेकिन जिंदगी में बहुत मायने रखते हैं। ये पुस्तक पांच भागों में विभक्त है जो कि इस प्रकार हैं- साधना, वीरता, दर्शन प्रेम और मुक्तक।

मैने कोशिश की है कि जो वंचित शोषित गरीब किसान आदि हैं, उनकी समस्याओं को सभी के सामने रख सकूँ। अनेक मुद्दे जैसे- मंहगाई, भ्रष्टाचार, भीड़तंत्र, नारी असुरक्षा, देश-प्रेम और मानवीय संवेदना आदि को सबके सामने ला सकूँ।

और हाँ! एक किशोर के अंदर जो प्रेम अंकुरित होता है सहमा सहमा सा उसे भी महसूस कराने का प्रयास है ‘जिंदगी के मायने’ काव्य संग्रह।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, ‘ज़िन्दगी के मायने’ के लेखन से लेकर प्रकाशन तक आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त हुआ?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : वैसे तो मैं सबका आभारी हूँ, परिवार, मित्र, समाज सबका लेकिन सबसे ज्यादा प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का मैं शुक्रिया अदा करना चाहूँगा और माता-पिता के अनुपम आशीर्वाद को मैं कभी नहीं भूल सकता। जिनकी बदौलत आज में इस स्थिति में हूँ।

indiBooks : लक्ष्मण जी, ‘ज़िन्दगी के मायने’ को पाठक क्यों पढ़ा जाए? अगर ऐसा कोई पूछ बैठे तो आपका जवाब क्या होगा?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : ये सबसे सटीक प्रश्न है आपका। ‘जिंदगी के मायने’ पढ़ने के लिए मैं इसलिए निवेदन करूँगा क्योंकि मर्यादा जीवन मूल्य टूट रहे हैं, भीड़तंत्र हावी हो रहा है, भ्रष्टाचार अपनी रंगत में है, गरीबों का मजाक बना कर रख दिया गया है, किसान अधर में है, लड़कियाँ भयभीत हैं, आधुनिकता की होड़ में संस्कृति पिछड गयी है, अंग्रेजवाद सिर चढ कर बोल रहा है।

ऐसे में मैंने जिम्मेदारी समझकर इन सबके प्रति पुस्तक के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास किया है, जिसका नाम है ‘जिंदगी के मायने’ काव्य संग्रह। अत: निवेदन है कि इसे पढें भी और जीवन में भी जरूर उतारें।

indiBooks : पुस्तक ‘ज़िन्दगी के मायने’ के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगें? ताकि पाठक जान सकें कि एक लेखक किस तरह से मेहनत करता है।

लक्ष्मण सिंह त्यागी : जी जरूर। सबसे बड़ी बात है कि आज किस विषय पर बात करने की जरूरत है, उसे ध्यान में रखकर ही मैंने रचनाओं का चयन किया है। ज्वलंत मुद्दे कहीं छूट ना जायें, इसका भी ध्यान रखा है। जब पूरी विषय वस्तु तैयार हो गई, तब प्रकाशन की प्रक्रिया का नंबर आया जो आज के दौर में सबसे कठिन है। लेकिन मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे प्राची डिजिटल पब्लिकेशन का साथ मिला और मुझे तो प्रकाशन की प्रक्रिया सबसे सरल लगी। हालांकि मैं फिर दोहरा दूं, ये प्रक्रिया इतनी सरल भी नहीं है, यदि आप को सही पब्लिकेशन नहीं मिल पाता है। मगर प्राची डिजिटल पब्लिकेशन ने मेरा काम आसान कर दिया। उन्हें विनम्र धन्यवाद।

indiBooks : लक्ष्मण जी, आप साहित्य सृजन कब से कर रहें हैं, अब तक अर्जित उपलब्धियों की जानकारी देना चाहेंगे?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : जब मैं कक्षा 9 वीं में पढता था और उम्र लगभग चौदह वर्ष थी, तभी से मैं लिखता आ रहा हूँ। अभी तक मैं छोटी बड़ी 600 रचनाएँ लिख चुका हूँ। सन् 2009 में मुझे बाल कवि के रूप में त्यागी समाज धौलपुर द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। दैनिक भास्कर में करीब चालीस रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इससे पूर्व चार पांच रचनाएँ स्थानीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकीं थी।

indiBooks : लक्ष्मण जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करते है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : अभी तक तो मैं कविताएँ ही ज्यादा लिखता रहा हूँ, हालांकि आसान किसी विधा में नहीं होता। चाहे गद्य हो या पद्य। मैं भी अभी सीख रहा हूँ।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, आपकी रचनाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत क्या है?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : मेरी रचनाओं के लिए प्रेरणा स्रोत मैं स्वयं को मानता हूँ या समाज की विद्रूपताओं को मानता हूँ। समाज में जो देखा हृदय में चुभा और कविता के रूप में कागज पर उतर गया। मेरी इतनी सी प्रक्रिया है।

indiBooks : आपके जीवन में विशेष उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहते हैं?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : अभी ऐसी कोई उपलब्धि नहीं है। मेरी बस इंसान बनने की जद्दोजहद कर रहा हूँ जो कि मुश्किल काम है। हाँ, कुछ खुशी के पल मेरे हिस्से में भी आये हैं, जैसे 2013 में शिक्षक बनना, 2018 में पिता बनना यानि आजकल जो मेरे सबसे करीब है मेरी पुत्री बानी त्यागी। उसे पाना 2020 में एक साथ दो किताब प्रकाशित होना और आपके साथ साक्षात्कार करना आदि।

indiBooks : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदा किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना चाहेंगें?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : मैं गजलकार स्वर्गीय श्री दुष्यंत कुमार त्यागी जी को बहुत पसंद करता हूँ और वर्तमान में श्री कुमार विश्वास जी मेरी पसंद के कवि हैं। मुंशी प्रेम चंद जी की कहानियों को पढना मुझे अच्छा लगता है। गद्य में मुंशी जी से कोई बड़ा नहीं है और उनके उपन्यास भी लाजवाब हैं।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, आप परिवार और शिक्षा सेवा में कार्यरत रहकर साहित्य सृजन के लिए समय कैसे निकालते हैं?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : मैं अक्सर रात में दस बजे से दो बजे के बीच में लिखता हूँ। उस समय ना परिवार का कर्तव्य होता है ना स्कूल की क्लास।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : हिंदी अकेली संघर्ष कर रही है। उसके बेटे-बेटियों को आगे आना चाहिए। अंग्रेजी सीखने से कोई काबिल नहीं होता और हिंदी बोलने वाला साधारण नहीं होता। हिंदी हमारी मां है, उसके साथ मां जैसा ही व्यवहार करें, हालांकि अब हिंदी और बेहतर होकर सामने आ रही है, भविष्य उज्वल है।

indiBooks : शिक्षण कार्य और साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : क्रिकेट मैच देखना, कवि सम्मेलन सुनना और एकांत में चिंतन मनन करना।

indiBooks : अब तक पुस्तक प्रकाशन के दौरान प्रकाशन अनुभव और प्रकाशकों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : अब तक सभी प्रकाशकों के साथ बहुत अच्छा और मित्रवत संबंध रहे हैं।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : अभी कोई योजना नहीं है, मगर जल्दी मिलेंगे।

indiBooks : साहित्य की दुनिया में नये-नये लेखक आ रहे है, उन्हें आप क्या सलाह देगें?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : कभी भी किसी की नकल ना करें और ना ही प्रतिस्पर्धा। सदैव निष्पक्ष होकर हृदय के उद्गार लिखते रहें कम लिखें मगर सार्थक लिखें।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : बिल्कुल। मेरे लिए लेखन के बिना कोई दुनियां है ही नहीं।

indiBooks : लक्ष्मण सिंह जी, यह अंतिम प्रश्न है, आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगें?

लक्ष्मण सिंह त्यागी : मैं हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन कर रहा हूँ कि एक बार आप जिंदगी के मायने पुस्तक को अवश्य पढें। अभी तक आपने बहुत प्यार दिया है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। आगे भी मेरे सिर पर अपना हाथ यूँ ही बनाये रखिये। कोरोना में अपने आप को सुरक्षित रखें और किताबों से दोस्ती करें।

About the Author Book

मेरा नया काव्य संग्रह ‘जिंदगी के मायने’ जैसा कि नाम से प्रतीत हो रहा है, मैंने इसमें अपने छोटे-बड़े अनुभव और मेरी नज़र में दुनिया की समझ आपके साथ साझा करने का प्रयास किया है, जिसका माध्यम छोटी-छोटी कविताओं को चुना है। ‘जिंदगी के मायने’ मेरा दूसरा काव्य संग्रह है, जिसे आपके सामने रखते हुए मुझे अपार ख़ुशी का अनुभव हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि आप मेरे इस काव्य संग्रह से बहुत कुछ सीखेंगे और जीवन को जीने का नज़रिया बदलेंगें।

-लक्ष्मण सिंह त्यागी ‘रीतेश’ (कवि, लेखक एवं शिक्षक)

prachi
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