‘अनवरत’ लघुकथा संग्रह की एक लेखिका डाॅ. मन्जु शर्मा जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा एक साझा लघुकथा संग्रह ‘अनवरत‘ प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन देवेन्द्र नारायण तिवारी ‘देवन’ जी द्वारा किया गया है। ‘अनवरत’ में देशभर से चुन्निदा रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें से एक लेखिका मन्जु शर्मा जी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जा रहा है। प्रस्तुत है ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह के एक लेखिका मन्जु शर्मा जी से साक्षात्कार-

indiBooks : हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं, आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। क्या आप हमारे पाठकों को अपने शब्दों में परिचय देंगें?

Manju Sharma : हम भारती कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। हमें स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के अध्यापन का 32 वर्षों का अनुभव है। साथ ही स्नातकोत्तर एवं पीएचडी के शोधार्थियों को शोध निर्देशन भी दिया है और वर्तमान में भी दे रहे हैं। अध्ययन, अध्यापन, लेखन, पुस्तक समीक्षा एवं संगीत में रुचि है। अनेक वर्षों तक आगरा आकाशवाणी से वार्ता प्रसारित होती रहीं हैं। गाईडिंग के क्षेत्र में जिला रेंजर लीडर की उपाधि प्राप्त हुई।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे जानकारी दें?

Manju Sharma : शिक्षा एवं साहित्य सेवा के लिये अभी तक विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा लगभग पचास सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र प्राप्त हो चुके हैं। जिनमें ‘भानू साहित्य सम्मान’, ‘बेस्ट टीचर्स अवार्ड’, ‘गोपाल राम गहमरी साहित्य सम्मान’, ‘शिक्षा शिरोमणि सम्मान’, ‘साहित्य योद्धा सम्मान’, ‘अक्षरवार्ता राष्ट्रीय साहित्य सम्मान’ आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही अनेक पत्र पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित होने पर सम्मान प्राप्त हुए हैं।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है?

Manju Sharma : हाँ। हमारी घनानंद और जयशंकर प्रसाद के काव्य में प्रेम और सौंदर्य शीर्षक से पुस्तक दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है। शीघ्र ही एक साझा काव्य संग्रह भी प्रकाशित होने वाला है, जिसमें पचपन कवि एवं कवयित्रियों की रचनाओं को संकलित किया गया है। इसमें जहाँ एक ओर अनुभव और उम्र की तपिश से युक्त कलमकार हैं, तो दूसरी ओर अपनी प्रथम रचना के साथ उपस्थित होने वाले उत्साही युवा भी हैं। इस संग्रह का संपादन हम ही कर रहे हैं।

indiBooks : लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?

Manju Sharma : लेखन के अतिरिक्त जैसा हमने पूर्व में बताया अध्ययन, अध्यापन से जुड़े हुए हैं। अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठयों आदि में पत्र प्रस्तुतीकरण एवं सक्रिय सहभागिता रही है। अनेक मंचों से काव्य पाठ एवं अध्यक्षता का सुअवसर प्राप्त हुआ है। आर्ट्स ऑफ लिविंग के द्वारा आयोजित विश्व स्तरीय कार्यक्रम में सितार वादन की प्रस्तुति दी है। साहित्यिक संस्थाओं में सम्मानित पद पर सक्रिय हैं। साथ ही अनेक पत्रिकाओं के सम्पादक मंडल में स्थान प्राप्त है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब? क्या उनके बारे में बताएंगे?

Manju Sharma : अवश्य। हमारे प्रिय रचनाकार आधुनिक युग के छायावाद के प्रवर्तक कवि जयशंकर प्रसाद हैं। जो श्रेष्ठ कवि, कहानीकार, नाटककार, निबंध कार एवं उपन्यासकार हैं। आपका ‘कामायनी’ महाकाव्य भारतीय साहित्य एवं संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। ऐतिहासिक नाटक ‘चन्द्रगुप्त’, स्कन्दगुप्त’, ‘ध्रुवस्वामिनी’ आदि की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। शायद ही कोई ऐसा विश्वविद्यालय हो जिसके हिन्दी साहित्य के पाठ्यक्रम में प्रसाद की रचनायें उसका अनिवार्य अंग न हों।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Manju Sharma : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, हिन्दी के प्रयोग कर्ताओं के प्रति सम्मान का भाव उत्पन्न होना। साथ ही हिन्दी को रोजगार से जोड़कर उसके लिए विकास के उपाय करना। आवश्यकता इस बात की है कि हिन्दी के समृद्ध साहित्य के पठन पाठन पर बल दिया जाए। हिन्दी साहित्य सर्जक भी ध्यान रखें कि यदि किसी शब्द के लिए हिन्दी शब्द उपलब्ध है, तो वहाँ उर्दू, फारसी,अँग्रेजी आदि भाषाओं के प्रयोग से बचें। हिन्दी सेवी होने के कारण यथासम्भव हिन्दी का प्रयोग करना हमारा कर्तव्य भी है।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Manju Sharma : प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उसका परिवार और माता पिता उसकी प्रेरणा और संस्कार के स्रोत होते हैं। हमारे जीवन में भी जहाँ माँ से त्याग, समर्पण, सन्तोष आदि प्राप्त हुए तो पिता से ईमानदारी, लगन, परिश्रम, कर्तव्यनिष्ठा आदि कब जीवन का अंग बन गये पता ही नहीं चला। ऐसे अनेक प्रसंग हैं, जिनको यदि स्मरण किया जाए, तो उनका महत्व एवं प्रेरणा आज भी आन्दोलित कर देती है। साथ ही प्रतिध्वनित भी होती है कि आगामी पीढ़ी में उनका संचरण आज की विषम परिस्थितयों में आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Manju Sharma : अपने पाठकों और प्रशंसकों से बस यही कहना चाहेंगे कि आप जिस भी कार्यक्षेत्र से जुड़े हों, अपना कार्य पूरी आस्था के साथ करते रहें। ईश्वर आपकी मेहनत को कभी व्यर्थ नहीं जाने देता। इसके विपरीत किसी अपराध के लिये दंडित किये बिना भी नहीं रहता। सम्भव है, जीवन मे अनेक उत्थान पतन आयें। सफलता मिलने में विलम्ब भी हो, किन्तु उन्हें अपना परीक्षाकाल समझकर उन पर विजय पाने का प्रयास करें। निरन्तर हिन्दी भाषा और साहित्य का अध्ययन, मनन, चिंतन एवं उपयोग करते रहें।

About the Book

‘Anvarat’ short story compilation is an appraisal of true events, on one hand while there are childhood rites in this book, on the other hand it is a civilization that teaches the rites to the inferior human. Somewhere the hero-heroine’s love is tested, and elsewhere the maternal love is synonymous with life. Somewhere there is a satirical attack on politics, and somewhere there is a defeat from the loved ones leaving the eyes moist.

prachi

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