‘अनवरत’ लघुकथा संग्रह की एक लेखिका नेहा जग्गी जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा एक साझा लघुकथा संग्रह ‘अनवरत‘ प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन देवेन्द्र नारायण तिवारी ‘देवन’ जी द्वारा किया गया है। ‘अनवरत’ में देशभर से चुन्निदा रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें से एक लेखिका नेहा जग्गी जी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जा रहा है। प्रस्तुत है ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह के एक लेखिका नेहा जग्गी जी से साक्षात्कार-

indiBooks : हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। क्या आप हमारे पाठकों को अपने शब्दों में परिचय देंगें?

Neha Jaggi : मेरा परिचय बहुत छोटा सा है, जिसे मैं कुछ पंक्तियों में बताना चाहूंगी-

दिल दुखाना आता नहीं,
शिक्षित करना मेरा काम है ।
सबको नेह से जीतना चाहूँ,
और नेहा मेरा नाम है ।।

वर्तमान में डी.ए.वी पब्लिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हूँ और साथ ही साहित्य सृजन कर रहीं हूँ।

indiBooks : आपने साझा संकलन संग्रह ‘अनवरत’ में प्रतिभाग किया है, ‘अनवरत’ के साथ अनुभव को हमारे पाठकों के साथ साझा करने चाहेंगें?

Neha Jaggi : ‘अनवरत’ से जुड़ना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय रहा। अन्य रचनाकारों की रचनाओं से भी प्रेरणा प्राप्त की। पहले एक ही लघुकथा की रचना की गई थी, अन्य सहयोगी रचनाकारों से प्रेरणा प्राप्त कर अन्य कई लघुकथाओं का लेखन किया। ‘अनवरत’ पुस्तक में मेरे द्वारा रचित दो कथाएँ प्रकाशित हो रही हैं, जो मेरे लिए अत्यंत हर्ष का विषय है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे जानकारी दें?

Neha Jaggi : साहित्यिक सेवा के लिए अब तक कई प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुकी हूँ। हिंदी अकादमी द्वारा नवोदित लेखक सम्मान (प्रथम स्थान) 2008-09, दास्तान ए इंद्रप्रस्थ के द्वारा हिंदी दिवस अलंकरण 2021 सम्मान, दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा संस्कृत समाराधक सम्मान (2012-13, 2014-15, 2015-16 व 2017-18), राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बदलाव द्वारा काव्य गौरव सम्मान तथा अंतर्राष्ट्रीय नारी गौरव सम्मान 2021 आदि सम्मान प्राप्त हो चुकें है। इसके अलावा गद्य व पद्य में प्रकाशित अनेक रचनाओं व अन्य प्रतियोगिताओं में कई सम्मान भी प्राप्त हुए है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब? क्या उनके बारे में बताएंगे?

Neha Jaggi : मेरे प्रिय लेखक महाकवि कालिदास हैं, उनकी रचनाएं मेघदूत, कुमारसंभव तथा रघुवंश मेरे हृदय के अत्यंत समीप हैं। वह संस्कृत भाषा के एक महान कवि हैं।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Neha Jaggi : हिंदी भाषा केवल हमारी मातृभाषा नहीं, अपितु प्रत्येक भारतीय के हृदय में निवास करने वाली भाषा है। हिंदी साहित्य अत्यंत विशाल और विस्तृत है। हिंदी भाषा और हिंदी साहित्य का भविष्य अत्यंत उज्जवल है।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Neha Jaggi : आप कहीं भी जाएँ, अथवा किसी से भी मिले ,कुछ ना कुछ या कोई ना कोई आपको प्रेरणा देने वाला अवश्य होता है। मुझे प्रेरणा मिली दीवारों पर लिखे गए छोटे छोटे वाक्यों द्वारा। मुझे दीवारों पर अंकित कुछ भी हो उसको पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, वह प्रेरक के रूप में कार्य भी करता है।

indiBooks : पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Neha Jaggi : पाठकों को मैं चंद पंक्तियों में छोटा सा संदेश देना चाहती हूँ, मुझे लगता है इससे पाठक जरूर प्रेरित होंगे-

“जब मन हो बेचैन,
अपनी लेखनी उठा लेना।
अपने भावों को एक-एक करके,
लफ्जों में सजा लेना।।”

About the Book

‘Anvarat’ short story compilation is an appraisal of true events, on one hand while there are childhood rites in this book, on the other hand it is a civilization that teaches the rites to the inferior human. Somewhere the hero-heroine’s love is tested, and elsewhere the maternal love is synonymous with life. Somewhere there is a satirical attack on politics, and somewhere there is a defeat from the loved ones leaving the eyes moist.

prachi

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