‘काव्य प्रभा’ साझा काव्य संकलन के लेखिका पल्लवी गोयल जी से साक्षात्कार

0
49

पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के द्वारा काव्य प्रभा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया है। जिसका संपादन सुधा सिंह ‘व्याघ्र’ द्वारा किया गया है। ‘काव्य प्रभा’ में देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। पेश है ‘काव्य प्रभा’ काव्य संग्रह की एक लेखिका पल्लवी गोयल जी से साक्षात्कार-

indiBooks : क्या आप अपने शब्दों में हमारे सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देना चाहेंगे? क्योंकि आपके शब्दों में हमारे पाठक आपके बारे में ज्यादा जान पाएंगे।

पल्लवी गोयल : मेरा जन्म स्थान वाराणसी उत्तर प्रदेश है। पिताजी स्वर्गीय विजय अग्रवाल व माता श्रीमती रीता अग्रवाल का लगाव बचपन से पढ़ने- लिखने में बहुत था। पिताजी का खुद का प्रेस था। बचपन से ही बाल पत्र-पत्रिकाओं को नियमित रूप से पढ़ने की आदत उन्हीं की देन थी। बचपन में मेरे आकार से पाँच गुना आकार का उनका पुस्तकों का ऊपर तक भरा हुआ संदूक सदैव से मेरे आकर्षण का केंद्र था। बड़े होने पर पढ़ने की आदत बढ़ती ही गई। फिर एक समय ऐसा आया कि दैनिक व्यस्तता के कारण पढ़ने की आदत एकदम ही थम गई। विगत डेढ़ दशकों से पढ़ने के साथ लेखन का सफर भी पुनः जारी हुआ। कुछ वर्षों पूर्व ब्लॉग लेखन की शुरुआत की। जो वास्तव में मनोभावों को संकलित करने की डायरी है। ब्लॉग के माध्यम से ही अनेक रचनाकारों से परिचय हुआ। प्रिय सखी सुधा सिंह जी जो विद्यालय में सहकर्मी भी थीं। हम दोनों की ब्लॉग यात्रा लगभग साथ शुरू हुई। उनकी ही संगत में पुस्तकों की ओर रुख किया। कुछ साझा संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित हुईं। इसी शृंखला की एक कड़ी ‘ काव्य प्रभा’ है जिसमें स्थान पाकर आपके सामने आने का सुअवसर मिला।

साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में अन्य सहयोगी रचनाकारों के साथ सहयोगी रचनाकार के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?

पल्लवी गोयल : ब्लॉग लेखन के दौरान ही अनेक रचनाकारों से परिचय प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सखी अभिलाषा चौहान जी, सखी मीना शर्मा जी, सखी ऋतु असूजा जी से उनकी रचनाओं के माध्यम से पूर्व परिचित हूँ। प्रिय सखी सुधा सिंह जी तो हमकदम ही हैं। अन्य सभी साथी रचनाकारों से परिचय प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके लिए आदरणीय राजेंद्र सिंह बिष्ट जी व प्राची डिजिटल पब्लिकेशन को सहृदय धन्यवाद।

indiBooks : साझा काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ में आपकी रचनाएं किस विषय पर आधारित हैं?

पल्लवी गोयल : विभिन्न विषयों पर आधारित कविताएँ संग्रहित हैं- ‘प्रार्थना’ द्वारा ईश्वर को नमन किया है। ‘औरत’ स्त्री के अस्तित्व की कथा है। ‘योद्धा’ समसामयिक कोरोना रणवीरों को समर्पित है। ‘निर्झर’ प्रकृति का संगीत सुनाता नवगीत है। ‘पंजाब’ अप्रतिम प्रांत की शोभा यात्रा है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?

पल्लवी गोयल : अभी तक लेखन से संतुष्टि की स्वसेवा में ही रत हूँ। साहित्यिक सेवा की ओर अग्रसर हूँ। कुछ साझा संकलनों के प्रकाशन के उपरांत प्रमाण पत्रों के साथ सम्मान पत्र भी प्राप्त हुए हैं- स्टोरी मिरर कहानी विजेता सम्मान, श्रेष्ठ जन कवि सम्मान आदि।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?

पल्लवी गोयल : कुछ साझा संकलन प्रकाशित हैं – माँ (प्रथम रचना), मेरी धरती : मेरा गॉंव, श्रमिक की व्यथा। प्रकाशाधीन साझा संकलन हैं – क्षितिज उदीयमान साहित्यकार, लम्हें आदि ।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?

पल्लवी गोयल : पढ़ने के प्रति दीवानापन तो बचपन से ही था, परंतु लेखन कार्य एक अनोखी घटना के पश्चात उम्र के तीसरे दशक से प्रारंभ हुआ। मैं अध्यापिका हूँ।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?

पल्लवी गोयल : हिंदी साहित्य की सभी विधाओं को सीखने में रुचि है। मनोभावना के अनुरूप अनेक विधाओं को सम्म्मान देने की कोशिश रही है।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

पल्लवी गोयल : हिंदी भाषा के दो रूप प्रचलित हैं। एक जो आज सामान्य बोलचाल की भाषा है। दूसरी जो पुस्तकों में साहित्य के रूप में स्थापित है। आज अंतरजाल साहित्य प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिससे देशों की सीमाओं को पार करते हुए अनेक साहित्यकार सम्मिलित हो साहित्य कृतियों के निर्माण व जन सामान्य तक उसके प्रचार प्रसार में संलग्न हैं। जो निश्चय ही हिंदी का वर्तमान साहित्यिक स्वरुप तय करने में मील का पत्थर साबित होगा और इसे जनप्रिय बनाने में सहायक भी होगा।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके शौक या हॉबी?

पल्लवी गोयल : पढ़ने के साथ गाना सुनने व गुनगुनाने दोनों का शौक है ।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

पल्लवी गोयल : वर्तमान में इससे संबद्ध अभी कोई योजना नहीं है। विचारों के प्रवाह के साथ ही यात्रा भी अनवरत चलते रहने की आशा है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

पल्लवी गोयल : इन पंक्तियों के माध्यम से अपनी बात कहना चाहती हूँ – जीवन के व्यस्त क्षणों से, कुछ पल खुद के निकालो। कुछ पदों के साथ ही से, मित्रता थोड़ी निभा लो।

indiBooks : आपके पाठकों को काव्य प्रभा क्यो पढ़नी चाहिए? इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे?

पल्लवी गोयल : ‘काव्य प्रभा’ में संकलित विभिन्न विषयों पर आधारित रचनाएँ ही इसे अप्रतिम रूप प्रदान कर रही हैं।इसमें मन की गहराइयों को छूता संगीत भी है। विरह का गीत भी है। खुशियों का कल-कल झरना भी है और अनेक भावनाओं को प्रस्फुटित करते हुए बीज भी हैं।

About the ‘Kavya Prabha

साहित्य के सभी रसों से पगी ‘काव्य प्रभा’ एक मित्र की भाँति कभी आपको गुदगुदाएगी तो कभी आपके मन-मस्तिष्क को झकझोरती-सी प्रतीत होगी। इस पुस्तक में जहाँ एक ओर विशुद्ध हिंदी की रचनाएँ आपके मन में पैठ जमाती लक्षित होंगी, वहीं दूसरी ओर उर्दू के कुछ ख़याल भी अपना जादू बिखेरते नज़र आएँगे। काव्य प्रभा में स्थापित साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकार भी आपको अपनी साहित्य सुरभि की मोहक बयार से सहलाएँगे। ‘काव्य प्रभा’ के सभी रचनाकार साहित्य रूपी सागर के उन अनमोल मोतियों की तरह है जिनकी तलाश हर साहित्य प्रेमी को होती है। उम्मीद है इन्हें पढ़कर साहित्य रसिकों की साहित्य पिपासा अवश्य ही शांत होगी।

prachi
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments