‘अनवरत’ लघुकथा संग्रह के एक लेखक राम गोपाल जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा एक साझा लघुकथा संग्रह ‘अनवरत‘ प्रकाशित किया गया है, जिसका संपादन देवेन्द्र नारायण तिवारी ‘देवन’ जी द्वारा किया गया है। ‘अनवरत’ में देशभर से चुन्निदा रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें से एक लेखक राम गोपाल जी का साक्षात्कार प्रकाशित किया जा रहा है। प्रस्तुत है ‘अनवरत’ साझा लघुकथा संग्रह के एक लेखक राम गोपाल जी से साक्षात्कार-

indiBooks : हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। हमारे पाठकों को अपने शब्दों में परिचय दें?

Ram Gopal : मै राम गोपाल पुत्र श्री भगवत प्रसाद निवासी आदर्श ग्राम पुण्यभूमि आन्यौर तहसील गोवर्द्धन जिला मथुरा उ.प्र. से हूँ। मै इस समय आगरा विवि से पीएचडी कर रहा हूँ। कविता करना मेरा पेशा नहीं धर्म है ऐसा मै मानता हूँ। लेखक के रूप मे कहानी लिखना, मै आत्म संतुष्टि के लिए करता हूँ। साहित्य लिखना मुझे अत्यंत प्रिय है। मैंने बी एड किया है और इस समय एक अध्यापक के रूप में कार्यरत हूँ। हिन्दी मेरी माता है और मै हिन्दी का पुत्र हूँ, ऐसा मेरा मानना है। मै सदैव हिन्दी की सेवा करता रहूँगा। ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि मुझे अपने लक्ष्य से कभी भी कैसी भी परिस्थितियों में भटकने न दें। अध्यापक होने के नाते मै यही चाहता हूँ कि प्रत्येक विद्यार्थी के मन में हिन्दी के प्रति श्रद्धा जागृत हो।

indiBooks : आपने साझा संकलन संग्रह ‘अनवरत’ में प्रतिभाग किया है, ‘अनवरत’ के साथ अनुभव को हमारे पाठकों के साथ साझा करने चाहेंगें?

Ram Gopal : अनवरत में मेरी रचनाएं छपना मेरे लिए प्रथम अनुभव है। इसके लिए मै देवन तिवारी जी को बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहता हूँ। अनवरत में अलग-अलग लेखकों की लघुकथाएं हैं, जिनसे यह बहु विचारों की दिव्य प्रतिमा बन गई है। अनवरत में मेरी तीन लघुकथाएं हैं, जो कि विकलांग विमर्श से संबंधित हैं। मैं तो यही कहूँगा कि ‘अनवरत’ की तरह ही और भी कोई संकलन निकले, जिसमें मुझे पुनः अवसर प्रदान किया जाए। ‘अनवरत’ के विषय में जब मुझे प्रथम बार पता चला तो मै अत्यंत उत्साहित हुआ और आज साक्षात्कार देते समय भी मै बहुत अच्छा महसूस कर रहा है। मै प्राची डिजिटल पब्लिकेशन और देवन तिवारी जी का अत्यंत आभार व्यक्त करता हूँ। मै देवन तिवारी जी और प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के प्रति शुभकामनाएं भी व्यक्त करता हूँ।

indiBooks : आपके जीवन की कोई ऐसी प्रेरक घटना जिसे आप हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?

Ram Gopal : क्रिकेट का सिद्धांत है कि कीपर सबसे करीब होता है और वही Stumping करने में सबसे कम वक्त लगाता है। अतः अपने सबसे करीब वाले पर सबसे अधिक नजर रखो क्योंकि वही आपको ज्यादा चोट पहुँचा सकता है, यही जीवन है। आप उससे धोखा खाते हो जो सबसे अधिक विश्वसनीय समझा जाता रहा था, ईश्वर ऐसे लोगों से बचाए। किसी के साथ कभी गलत न करे, सबके हित की बात सोचें, आपका कभी अहित नहीं होगा। आप जब भी तरक्की के रास्ते पर होंगे, अपनों के द्वारा बदनाम किये जाएंगे, उनके द्वारा बढ़ाएं उत्पन्न की जाएंगी और यही प्रमाण होगा कि आप आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि सफलता के सभी दुश्मन बन जाते हैं। जब आप संघर्ष करोगे तो लोग हँसेगे और जब सफल हो जाओगे तो अपनों के द्वारा आपको हतोत्साहित किया जाएगा। और क्या कहें प्रियवर यह जिंदगी के रंग हैं और यही जिंदगी है। कभी कभी तो लगता है कि जैसे ईश्वर अपनों के बीच में छुपे आस्तीनों के सांपों की पहचान करवा रहा है। जय श्री राधे।

About the Book

‘Anvarat’ short story compilation is an appraisal of true events, on one hand while there are childhood rites in this book, on the other hand it is a civilization that teaches the rites to the inferior human. Somewhere the hero-heroine’s love is tested, and elsewhere the maternal love is synonymous with life. Somewhere there is a satirical attack on politics, and somewhere there is a defeat from the loved ones leaving the eyes moist.

prachi

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