साझा काव्य संग्रह ‘श्रमिक की व्यथा’ के एक लेखक रत्नेश यादव जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों ही The Sahitya और प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के संयुक्त तत्वाधान में श्रमिक की व्यथा साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया था। जिसमें देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया था, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। बाकी अन्य सम्मानित कवियों के साक्षात्कार जल्द ही प्रकाशित होने वाले काव्य संग्रह ‘काव्य प्रभा’ के बाद प्रकाशित किये जाऐगें, क्योंकि बाकी अन्य सम्मानित कविगण काव्य संग्रह काव्य प्रभा में भी प्रतिभाग कर रहें है। पेश है ‘श्रमिक की व्यथा’ काव्य संग्रह के एक लेखक रत्नेश यादव जी से साक्षात्कार-

indiBooks : कृपया, अपना परिचय अपने शब्दों में दे?
Ratnesh Yadav : मेरा नाम रत्नेश यादव है, मैं अभी पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर हूँ, मैंने 2019 में बी. एस. सी. कंप्यूटर साइंस से कम्पलीट किया है।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा काव्य संग्रह ‘श्रमिक की व्यथा’ प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
Ratnesh Yadav : लॉक डाउन के दौरान जब मजदूर अपने घर जाने के लिए बेचैन हो रहे थे, जैसा की समाचार चैनल के माध्यम से हमें देखने को मिल रहा था तब मन बड़ा व्यथित होता था और जब ये पीड़ा बहुत असहनीय हो गयी तो उससे शब्दों के माध्यम से कविता में उतार दिया।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
Ratnesh Yadav : कविता लेखन के क्षेत्र में मै अभी नया हूँ, इसलिए किसी कविता प्रतियोगिता में प्रतिभाग नहीं किया। अतः मैं The Sahitya की टीम को दिल से धन्यवाद देना चाहूंगा कि ये मेरा प्रथम साहित्यिक सम्मान है जो उन्होने मुझे मेरी कविता ‘लाचार श्रमिक’ के लिए मुझे प्रदान किया।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है? यदि हाँ तो आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?
Ratnesh Yadav : श्रमिक व्यथा साझा संग्रह ही मेरी पहली पुस्तक है जो प्रकाशित हुई है।

indiBooks : लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?
Ratnesh Yadav : मैं अभी MCA करने के लिए NIMCET प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं?
Ratnesh Yadav : मैंने अपनी पहली कविता हाई स्कूल (2013) में लिखी थी, परन्तु लोगों द्वारा प्रोत्साहन न मिला इसलिए मैंने कविता लिखना बंद कर दिया था, परन्तु 2019 में ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में राम धारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी पढ़ी, और मेरा कविता लिखना का सिलसिला फिर से शुरू हो गया। मै पुनः The Sahitya का धन्यवाद देना चाहूंगा कि आपके अथक प्रयासों और इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही हम जैसे लोगो की कविताओं को प्रोत्साहन मिलता है।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
Ratnesh Yadav : मै कविता, कहानियां और शायरी लिखने का शौक रखता हूँ।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
Ratnesh Yadav : मेरी रचनाओं की प्रथम प्रेरणा मेरा प्रेम रहा और दूसरा मेरे मित्रगण हैं।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
Ratnesh Yadav : मेरे जीवन की सबसे यादगार उपलधियों में अमर उजाला जो की एक हिंदी अखबार है, के द्वारा आयोजित अतुल माहेशवरी क्विज प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीतना है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
Ratnesh Yadav : मेरे प्रिय लेखक रामधारी सिंह दिनकर और प्रेमचंद है, लेखिका अमृता प्रीतम जी हैं, मेरे प्रिय रचनाएं रामधारी सिंह दिनकर जी की रश्मिरथी, प्रेमचंद जी का उपन्यास गबन और अमृता जी का कविता संग्रह मैं जमा तू है।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
Ratnesh Yadav : गत पचास वर्षों में हिंदी की शब्द संपदा का जितना विस्तार हुआ है उतना विश्व की शायद ही किसी भाषा में हुआ हो, हमारी मातृभाषा हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा के रूप में स्थापित है। लगभग एक करोड़ बीस लाख भारतीय मूल के लोग विश्व के एक सौ बत्तीस देशों में बिखरे हुए हैं अगर हम अपनी हिंदी भाषा को अपना गौरव समझे और इसमें लिखने और बोलने में कोई संकोच न करे (जैसा की आजकल के युवा करते है क्योंकि अगर वो इंग्लिश में बात नहीं करेंगे तो कूल नहीं कहलायेंगे) तो निश्चय ही एक दिन हिंदी अपने सर्वोत्तम शिखर पर होगी | जहाँ तक हिंदी साहित्य का प्रश्न है तो यदि हम ज्यादा से ज्यादा हिंदी साहित्य पढ़ेंगे जिससे की बाजार में हिंदी साहित्य की मांग बढ़ेगी और लोग इसमें दिलचस्पी लेंगे और आप जैसे मंच से प्रोत्साहन मिलता रहेगा तो एक दिन अवश्य युवा, बुजुर्ग सभी साहित्य को उसके चरम शिखर पर पहुचायेंगे।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
Ratnesh Yadav : मुझे पुस्तके पढ़ने का शौक है।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
Ratnesh Yadav : हाँ, मैं एक पुस्तक लिखने की सोच रहा हूँ जो कि मेरी कविताओं का संग्रह होगी।

indiBooks : साथी लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
Ratnesh Yadav : सभी नवोदित लेखकों से यही गुजारिश है कि हिंदी को अपना गौरव समझे और जो भी लिखें, उसे दुसरो को (जैसे आपके दोस्त, भाई/बहिन) को जरूर पढ़ाये और उनकी राय जरूर मांगे।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
Ratnesh Yadav : जी हाँ, मैं हमेशा लेखन करता रहूँगा क्योंकि लेखन आपके अकेलेपन में आपका साथी होता है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
Ratnesh Yadav : सभी से में यही कहना चाहूंगा ज्यादा से ज्यादा हिंदी साहित्यों को पढ़े और हिंदी भाषा का विस्तार समस्त विश्व में करें।

About the ‘Shramik Ki Vyatha’ Book

लॉकडाउन के दौरान एक तबका जिसे मजदूर के नाम से जाना जाता है, जिनके मजबूत कंधे देश को मजबूत बनाते है, जिनका कठोर परिश्रम किसी फैक्ट्री, बिल्डिंग को बनाने में अपना सहयोग देते हैं, उन्हें लॉकडाउन के कारण अपने गांवों को लौटना पड़ा था। ऐसे में उनकी मनोदशा और पीड़ा को श्रमिक की व्यथा काव्य संग्रह में शामिल सम्मानित कवियों ने अपनी कलम से पाठकों के सामने रखने का बहुत सुन्दर प्रयास किया है। ताकि आप भी मजदूर कहे जाने वाले देश के मजबूत कंधे लिए श्रमिकों की मनाेदशा और पीड़ा को सम्मानित कवियों के रचनाओं में महसूस कर सकें।

prachi

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