‘स्वदेश प्रेम’ साझा काव्य संकलन के लेखक सनुक लाल यादव से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन के द्वारा ‘स्वदेश प्रेम‘ साझा काव्य संग्रह प्रकाशित किया गया है। जिसका संपादन डॉ. मीना कुमारी सोलंकी द्वारा किया गया है। ‘स्वदेश प्रेम’ में देश भर से कई कवियो ने प्रतिभाग किया है, जिनमें से कुछ कवियो के साक्षात्कार प्रकाशित किये जा रहे हैं। पेश है ‘स्वदेश प्रेम’ काव्य संग्रह के एक लेखक सनुक लाल यादव जी से साक्षात्कार-

indiBooks : कृपया संक्षेप में अपने शब्दों में अपना परिचय दें?

Sanuk Lal Yadav : मैं सनुक लाल यादव जबलपुर से हूँ। संगीत मंच प्रोग्राम, ए.आई.आर. सिंगर, लेखन करता हूँ। संप्रति हाई स्कूल में हाई स्कूल शिक्षक के रूप में जबलपुर संभाग के अंतर्गत पदस्थ हूं। इसके अलावा आकाशवाणी से प्रसारित लोकगीत एवं उप शास्त्रीय संगीत में भी गायक के रूप में पहचान है तथा विभिन्न सांस्कृतिक एवं संगीत का मंचीय प्रोग्राम भी संचालित की जाती है। मैं कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, नवगीत, हाइकु, दोहे, कुंडलियाँ, कहमुकरियाँ, ड्रामा स्क्रिप्ट आदि विद्याओं में लेखन करता हूँ।

indiBooks : आपने साझा संकलन संग्रह ‘स्वदेश प्रेम’ में प्रतिभाग किया है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?

Sanuk Lal Yadav : स्वदेश प्रेम एक राष्ट्रभक्ति से प्रेरित रचना है जिसमें विभिन्न प्रांतों देश देशांतर और भारतवर्ष की कोने कोने के साहित्यकार अपनी रचनाएं प्रेषित की है सर्वप्रथम देश प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म है:- जो भरा नहीं भावो से बहता रसधार नहीं। हृदय नहीं वह पत्थर है जिसे स्वदेश से प्यार नहीं।। ऐसा कहकर कवि ने देश के प्रति अपनी प्रेम भावना को व्यक्त किया है। वर्तमान परिस्थिति में जहां आए दिन छोटी-छोटी बातों को लेकर के धरना प्रदर्शन एक धर्म से दूसरे धर्म के प्रति जो वैमनस्यता की बीज बो रहे हैं उसको समाप्त कर हमारे देश में सिर्फ और सिर्फ देश प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म और मानव के मानव के प्रति प्रेम ही सर्वोपरि गर्म होना चाहिए। इसी बात को सार्थक करने के लिए यह हमारा छोटा सा प्रयास है जिसमें हमारी सम्मिलित सभी कवि गण एवं साहित्यकार अपनी अमूल्य योगदान दिया है एवं सम्पादिका का महोदया का अपूर्व योगदान एवं मार्गदर्शन रहा है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे जानकारी दें?

Sanuk Lal Yadav : अभी तक कई मंचों से सम्मान प्राप्त हो चुकें है, जिनमें से काव्य शिरोमणि सम्मान, आचार्य रामचंद्र शुक्ल सम्मान, श्रेष्ठ कलमकार सम्मान, राष्ट्रीय गणतंत्र हिंदी काव्य सम्मान 2021, कौंच साहित्य सम्मान 2021, साहित्य सृजन सम्मान, काव्य ज्योति सम्मान 2020, साहित्य सेवा सम्मान 2020 तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदान प्रशस्ति पत्र, प्रांतीय शिक्षा महाविद्यालय जबलपुर से प्राप्त सम्मान पत्र आदि। काव्य शिरोमणि सम्मान, आचार्य रामचंद्र शुक्ल सम्मान, श्रेष्ठ कलमकार सम्मान, राष्ट्रीय गणतंत्र हिंदी काव्य सम्मान 2021, कौंच साहित्य सम्मान 2021, साहित्य सृजन सम्मान, काव्य ज्योति सम्मान2020, साहित्य सेवा सम्मान 2020 तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदान प्रशस्ति पत्र, प्रांतीय शिक्षा महाविद्यालय जबलपुर से प्राप्त सम्मान पत्र आदि प्रमुख है।

indiBooks : क्या आपकी पूर्व में कोई पुस्तक प्रकाशित हुई है?

Sanuk Lal Yadav : अभी तक पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है लेकिन रचनाएं प्रकाशित हुई है, जिनमें पद्य प्रसून, भारत भूमि, दिल कहता है, खौंफ़ ए कोरोना, स्वदेश प्रेम, जीवन उत्सव आदि साझा संग्रह है एवं प्रेम रंग, राग पंचम, नवा अंजोर आदि रचनाएं मौलिक रूप से प्रकाशित हो चुकी हैं। कुछ छत्तीसगढ़ी भाषा की रचनाएं भी प्रकाशित हो चुकी है तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली रचनाएं भी है।

indiBooks : लेखन के अलावा आप क्या व्यवसाय करते है?

Sanuk Lal Yadav : लेखन के अलावा अध्ययन एवं अध्यापन मेरा मुख्य व्यवसाय है संप्रति हाई स्कूल में हाई स्कूल शिक्षक के रूप में जबलपुर संभाग के अंतर्गत पदस्थ हूं। इसके अलावा आकाशवाणी से प्रसारित लोकगीत एवं उप शास्त्रीय संगीत में भी गायक के रूप में पहचान है। तथा विभिन्न सांस्कृतिक एवं संगीत का मंचीय प्रोग्राम भी संचालित की जाती है।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं, क्यों?

Sanuk Lal Yadav : कविता, कहानी, लघुकथा, गीत, नवगीत, हाइकु, दोहे, कुंडलियाँ, कहमुकरियाँ, ड्रामा स्क्रिप्ट लेखन आदि। छंदों में वैसे सभी छंद मुझे प्रिय हैं लेकिन मनहरण घनाक्षरी छंद मेरे सर्वाधिक प्रिय छंद है जिसमें मैं अक्षर गुनगुनाते रहता हूं। इसी पर मेरी लेखनी सर्वाधिक दौड़ती है। हिंदी भाषा भारत की राष्ट्रभाषा है जो भारत को एकता के सूत्र में पीरों कर रखती है यह हमारी राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि मातृभाषा भी है जिस प्रकार मां के बिना यह संसार सुना सा लगता है उसी प्रकार मातृभाषा हिंदी के बिना यह भारतवर्ष अव्यक्त सा प्रतीत होगा। हिंदी साहित्य आज अक्षय नीर निधि की भांति विभिन्न प्रकार के साहित्य से लबालब है हमारी हिंदी भाषा का साहित्य विशाल से विशालतम कीओर है। और इसकी विशालता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाएगी मुझे पूर्ण विश्वास है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब? क्या उनके बारे में बताएंगे?

Sanuk Lal Yadav : हिंदी साहित्य के सभी लेखक एवं साहित्यकार मुझे अच्छे लगते हैं इनमें से कुछ साहित्यकार जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी ,महाकवि सूरदास जी,मैथिलीशरण गुप्त, महाप्राण निराला, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत जी कि साहित्य मुझे बाल्यकाल से ही प्रेरणा प्रदान करने वाले रहे। राम चरित्र मानस गोस्वामी तुलसीदास की रचित हमें विरासत में सुनने के साथ पढ़ने को भी मिला जिससे अत्यधिक प्रभावित हुए एवं जीवन को एक नई दिशा और गति मिली। पंत जी की प्रकृति वर्णन उनके काव्य की जो सौंदर्य वह जीवन के हर क्षेत्र को छुआ एवं प्रेरणा से भरे रहा पंतजी की एक पंक्ति मुझे आज भी याद है- वन की सुनी डाली पर कलियों ने सीखा मुस्काना। मैंने अब तक सीखना पाया दुख से सुख को अपनाना। इसी प्रकार रामधारी सिंह दिनकर जी की प्रत्येक रचनाएं मुझ से भरपूर एवं जीवन संदेश देने वाला है इस प्रकार हिंदी के मूर्धन्य एवं लोकप्रिय साहित्यकारों की रचनाएं अध्ययन करने और सुनने का अवसर प्राप्त हुआ जो हमारे जीवन को पल प्रतिपल स्पर्श करता है।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Sanuk Lal Yadav : हिंदी भाषा भारत की राष्ट्रभाषा है जो भारत को एकता के सूत्र में पीरों कर रखती है यह हमारी राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि मातृभाषा भी है जिस प्रकार मां के बिना यह संसार सुना सा लगता है उसी प्रकार मातृभाषा हिंदी के बिना यह भारतवर्ष अव्यक्त सा प्रतीत होगा। हिंदी साहित्य आज अक्षय नीर निधि की भांति विभिन्न प्रकार के साहित्य से लबालब है हमारी हिंदी भाषा का साहित्य विशाल से विशालतम कीओर है। और इसकी विशालता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाएगी मुझे पूर्ण विश्वास है। हिंदी भाषा भारत की राष्ट्रभाषा है जो भारत को एकता के सूत्र में पीरों कर रखती है यह हमारी राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि मातृभाषा भी है जिस प्रकार मां के बिना यह संसार सुना सा लगता है उसी प्रकार मातृभाषा हिंदी के बिना यह भारतवर्ष अव्यक्त सा प्रतीत होगा। हिंदी साहित्य आज अक्षय नीर निधि की भांति विभिन्न प्रकार के साहित्य से लबालब है हमारी हिंदी भाषा का साहित्य विशाल से विशालतम कीओर है। और इसकी विशालता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाएगी मुझे पूर्ण विश्वास है।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Sanuk Lal Yadav : मां भारती की कृपा से दिन प्रतिदिन साहित्य का सृजन निरंतर गति से प्रवाह मान है और वर्तमान में भी बहुत से लेखन कार्य चल रहा है। निकट भविष्य में बाल साहित्य पर एक किताब प्रकाशित करवाने की मंशा है मां वीणा वादिनी की कृपा रही तो निकट भविष्य में जल्द प्रकाशित होगी। मां भारती की कृपा से दिन प्रतिदिन साहित्य का सृजन निरंतर गति से प्रवाह मान है और वर्तमान में भी बहुत से लेखन कार्य चल रहा है। निकट भविष्य में बाल साहित्य पर एक किताब प्रकाशित करवाने की मंशा है मां वीणा वादिनी की कृपा रही तो निकट भविष्य में जल्द प्रकाशित होगी।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?

Sanuk Lal Yadav : जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता हर कार्य समान होते हैं बस उसको करने वाले की इच्छा शक्ति एवं उसके उत्कृष्ट सोच पर निर्भर करता है। हम अपने हर कार्य को पूर्ण मन से करें और अपनी रूचि के अनुसार क्षेत्र चुनकर के उसमें अपने श्रेष्ठ मेहनत के द्वारा नवीनतम स्वरूप देकर निकृष्ट में भी अच्छा से अच्छा उत्कृष्ट स्वरूप निखारने की कला को विकसित करें। एवं समय का पल प्रतिपल क्षण क्षण का उपयोग मितव्ययिता से करें। जीवन में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता हर कार्य समान होते हैं बस उसको करने वाले की इच्छा शक्ति एवं उसके उत्कृष्ट सोच पर निर्भर करता है। हम अपने हर कार्य को पूर्ण मन से करें और अपनी रूचि के अनुसार क्षेत्र चुनकर के उसमें अपने श्रेष्ठ मेहनत के द्वारा नवीनतम स्वरूप देकर निकृष्ट में भी अच्छा से अच्छा उत्कृष्ट स्वरूप निखारने की कला को विकसित करें। एवं समय का पल प्रतिपल क्षण क्षण का उपयोग मितव्ययिता से करें।

About the Book

The feeling of ‘Swadesh Prem’ is inherent in us. We should perform our duty towards the country. There is no need to show any love in the country and neither does it have any place, but there is a need to hold the feeling of love in the heart for the country. The true country lover wishes the country prosperity by not giving its happiness. This book is included in the spirit of ‘Swadesh Prem’, full of passion. This is not just a book, it is the creators’ indigenous love for the country. According to the editor, hopefully when you start reading it, the flow of reading will remain until the last page.

prachi

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