‘लम्हों की खामोशियाँ’ काव्य संग्रह की लेखिका शाहाना परवीन जी से साक्षात्कार

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पिछले महीने शाहाना परवीन जी की पुस्तक ‘लम्हों की खामोशियाँ’ काव्य संग्रह प्रकाशित हुई है। शाहाना जी को उनके प्रथम प्रकाशन के लिए ढ़ेरों शुभकामनाएं। आपको भी ‘लम्हों की खामोशियाँ‘ को जरूर पढ़ना चाहिए। इस पुस्तक को आप अमेजन व फ्लिपकार्ट से प्राप्त कर सकते है और पढ़ने के बाद अपना Review जरूर दें। indiBooks को हरप्रीत शाहाना परवीन जी का साक्षात्कार काफी समय पूर्व प्राप्त हो गया था, लेकिन त्रुटिवश देर से प्रकाशन हो रहा है। विलंब से साक्षात्कार प्रकाशित करने के लिए हम शाहाना जी से क्षमा चाहते हैं। आपसे साक्षात्कार में हमने उनकी किताब, जीवन और साहित्य अनुभव के बारे में जानकारी प्राप्त की। शाहाना जी ने हमारे सवालों के बहुत सुन्दर जवाब दिये। पेश हैं शाहाना जी से साक्षात्कार के कुछ प्रमुख अंश आपके लिए-

indiBooks : शाहाना जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

शाहाना परवीन : आप सभी को मेरा नमस्कार। सबसे पहले मैं सभी का धन्यवाद करना चाहूगीं कि आपने मुझे इस योग्य समझा कि मै अपने विषय मे कुछ कह सकूँ।

मेरा नाम शाहाना परवीन है। मेरा स्थाई पता मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) है। मेरे पिता जी का नाम श्री यूसुफ अली और माता जी का नाम श्रीमती शमीम आरा है। जन्म स्थान मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) है। मैं एक गृहणी हूँ।

शिक्षा के रूप में बी०ए० (ऑनर्स), एम०ए० समाज शास्त्र अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अलीगढ़, एन.टी.टी. (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) कोर्स अंबाला कैंट हरियाणा और सह पाठ्यक्रम गतिविधियाँ एन.एस.एस. (राष्ट्रीय सेवा योजना) एएमयू अलीगढ़ से प्राप्त की है।

मेरी रुचियों में कहानी लेखन, कविता, समीक्षा, आलेख आदि और एंकरिंग करना शामिल है। पाठक एवं प्रशंसक ई-मेल :- shahana2020parveen@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

indiBooks : शाहाना जी, सबसे पहले आपकी प्रथम एकल काव्य संग्रह के प्रकाशन के लिए आपको ढ़ेरों शुभकामनाएं। पहली पुस्तक के प्रकाशन पर आप अपनी खुशियों को शब्दों में कैसे बयां करेंगीं?

शाहाना परवीन : बहुत बहुत धन्यवाद आभार….

“देखा था एक सपना, आज पूरा हो गया,
सोच रही कि क्या पूरा होगा कभी सपना?
प्राची पब्लिकेशन्स के सहयोग से सपना पूरा हो गया।
नहीं प्रकट कर पा रही हूँ मैं खुशी अपनी,
बरसों से जो तमन्ना थी, वो स्वप्न पूरा हो गया।”

अपने एकल संग्रह को हाथों मे लेकर मुझे बहुत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। कहते हैं कुछ बातें सिर्फ महसूस की जा सकती हैं बयान नहीं की जाती, आज वही मुझे महसूस हो रहा है। कभी सोचा भी नहीं था कि मेरा अपना एकल संग्रह कभी प्रकाशित भी होगा परन्तु मैं धन्यवाद देना चाहूगीं प्राची डिजिटल पब्लिकेशन को जिन्होनें बहुत कम समय मे मेरी पुस्तक प्रकाशित कर मेरे हाथों मे सौंप कर मेरे सपने को पूरा किया है। धन्यवाद बहुत बहुत आभार प्राची डिजिटल पब्लिकेशन और उनकी पूरी टीम का।

indiBooks : आपकी पुस्तक ‘लम्हों की खामोशियाँ’ पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दें, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

शाहाना परवीन : “लम्हों की खामोशियाँ ” मेरे मन की आहट है । मेरे करीब है । मेरे अहसासो के धागो से बुनी है। मै अपने पिता जी को बहुत प्यार करती हूँ। वह हमेशा मेरे साथ मेरे मार्ग दर्शक की तरह खड़े रहे। आज मैं जो कुछ भी हूँ सब उनका ही आशीर्वाद है। उनकी प्रेरणा ही से मैं आज यहाँ तक पहुँची हूँ। आज वह नहीं हैं परन्तु इस किताब के माध्यम से वह मेरे साथ आज भी हैं और सदा मेरे साथ रहेगें।

यह किताब “लम्हो की खामोशियाँ” मेरे स्वतंत्र विचार हैं जो मैने जनसाधारण को ध्यान मे रखकर लिखे हैं। इसमे मैनें प्रतिदिन के शब्दों व भाषा का प्रयोग किया है। मेरा यह मानना है कि अगर हम अपने मन के विचार किसी दूसरे तक पहुँचाना चाहते ह़ै तो हमें भाषा ऐसी प्रयोग करनी चाहिए जो साधारण हो और जिसे मनुष्य सरलता से समझ सके। समाज के आम विषयों जैसे नारी, शिक्षा, मजबूरी, दुख अवसाद, प्रेम, घृणा आदि समस्याओं को मैने अपनी रचनाओ में स्थान दिया है। इसमें मैने बालको के चित का भी ध्यान रखा है और उनके लिए भी कविताएँ लिखी हैं। कुल मिलाकर मेरे एकल संग्रह में हर उम्र के व्यक्ति के लिए रचनाएँ हैं या आप यह भी कह सकते हैं कि मेरे मन के भाव हैं ,जो मै जन जन तक पहुचाना चाहती हूँ। आशा करती हूँ कि आप सभी को यह पसंद आयेगी।

indiBooks : शाहाना जी, जैसा कि हमें पिछले साक्षात्कार में हमने भविष्य में पुस्तक प्रकाशन के बारे में जानने का प्रयास किया था, लेकिन आपने साफ-साफ शब्दों में कहा था कि पुस्तक प्रकाशन की अभी या भविष्य में कोई योजना नहीं है। फिर कुछ दिनों बाद आपकी पुस्तक प्रकाशित हो गई, एकदम से बदलाव, कुछ बताएं, कैसे हुआ?

शाहाना परवीन : एपीजे अब्दुल कलाम आज़ाद ने कहा था ” सपने वो होते हैं जो खुली आँखो से देखे जाएँ।” मैने भी सपना ऐसा ही देखा था। परन्तु फिर भी कभी सोचा नहीं था कि सपना इतनी जल्दी पूरा हो जायेगा। इसके पीछे भी एक कहानी छुपी हुई है।

मैने एक सांझा संग्रह “बाल काव्य” में अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाई थीं। यह संग्रह प्राची डिजिटल पब्लिकेशन्स के सानिध्य मे प्रकाशित हुआ था। प्राची पब्लिकेशन्स का कार्य मुझे बहुत पसंद आया। पेज़ क्वालिटी बहुत सुंदर थी। मैने जब बाल काव्य सांझा संग्रह हाथ मे लिया तो मुझे बहुत अच्छा लगा और मेरे मन में तुरंत विचार आया कि क्यों ना अपना एक एकल संग्रह भी अभी प्रकाशित करवाया जाए। उसी दौरान मेरी एक साहित्यिक सहेली भी अपना एकल संग्रह प्रकाशित करवा रही थीं। उन्होने मुझे कहा कि मै भी करवा लूँ।

मुझे उनकी बात भी उचित लगी और मैनें प्राची पब्लिकेशन्स से बात की। प्राची पब्लिकेशन्स से जुड़े सभी सदस्यों ने मेरे प्रश्नो का संतुष्टिपूर्ण उत्तर दिया। इस प्रकार जो कभी सोचा भी नहीं था वो हो गया अर्थात मेरी खामोशियाँ कागज़ पर उतर आईं और प्राची पब्लिकेशन्स की सहायता व सहयोग से मैं अपने सपने को पूर्ण कर सकी।

indiBooks : हमें लगता है कि पुस्तक प्रकाशित होना आपके साथ ही आपके परिचितों के लिए भी किसी सरप्राइज से कम नहीं रहा होगा?

शाहाना परवीन : जी हाँ, आपने सही कहा। किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि मैने अपना एकल संग्रह प्रकाशित करवा लिया है। सबको यही लग रहा था कि सांझा संग्रह होगा। पर मेरे परिवार में कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिन्होने मेरी किताब के विषय मे मुझे बहुत मुबारकबाद दी साथ ही आशीर्वाद भी दिया कि मैं आज यहाँ तक पहुँच पाई।

indiBooks : शाहाना जी, आपकी किताब का नाम ‘लम्हों की खामोशियाँ’ कहाँ से मिला या कैसे आपने चयन किया?

शाहाना परवीन : जैसा कि मैने आपको बताया है कि मेरे पिता जी मेरे मार्गदर्शक थे। उन्हीं से मैने लिखना सीखा। उनके जाने के बाद मै खुद को काफी अकेला महसूस कर रही थी। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ? फिर मैने अपने आपको संभाला और उनको याद करते हुए यह किताब लिखी। इसमें कुछ लोगों ने मेरी काफी सहायता की । मेरा हौंसला बढ़ाया। मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इस किताब के नाम को चयन करने में मेरे भाई , मेरी एक साहित्यिक सहेली ( उन्होने भी मेरे साथ ही अपना एकल संग्रह प्रकाशित करवाया है) का बहुत बड़ा योगदान है। वे लम्हें जो खामोश हैं। उन दोनो ने मेरी किताब का नाम मेरी यादों से मिलता जुलता सुझाया जो मुझे बेहद पसंद आया।

indiBooks : शाहाना जी, आपकी किताब ‘लम्हों की खामोशियाँ’ के लिए आपके मित्र या परिवार या अन्य में सबसे ज्यादा सहयोग किससे प्राप्त हुआ?

शाहाना परवीन : मेरी दो प्यारी बेटियों से मुझे पूरा सहयोग मिला। मेरी दो बेटियाँ तमन्ना 16 वर्ष और दूसरी अलीशा 12 वर्ष। ये दोनो मुझे लिखते हुए देखा करती थी कि मम्मी को लिखने का बहुत शौंक है। एक दिन इन्होने मुझे कहा कि मम्मी आप भी अपनी कोई किताब प्रकाशित करवाओ। इसके अतिरिक्त मेरे परिवार में मेरे दो ख़ास “पारिवारिक सदस्य” हैं वे दोनो लेखन के क्षेत्र में हमेशा मेरा साथ देते आए हैं। वह दोनों यही कहा करते थे कि शाहाना अपनी किताब प्रकाशित करवाओ। हम तुम्हारे साथ हैं। उन्होने हौंसला दिया। आज भी वह मेरे साथ हैं और सबसे पहले मेरी किताब उन्होने ही पढ़ी है। जब वह यह साक्षात्कार पढ़ेगें तो समझ जायेगें कि मैं उनके विषय में कह रही हूँ।

indiBooks : पुस्तक ‘किताब ‘लम्हों की खामोशियाँ’’ के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक का अनुभव कैसा रहा?

शाहाना परवीन : बेहद खूबसूरत लम्हें थे। जब मैं रचनाओ का चयन कर रही थी तो काफी असमंजस में थी कि कौन सी प्रकाशन हेतु भेँजू? फिर भी मेरा यही मानना था कि रचनाएँ ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति के प्रतिदिन को प्रभावित करती हों। उसके जीवन से सम्बंधित हों। मैने अपने आपको सामने रखकर ही रचनाओ का चयन किया। प्राची पब्लिकेशन्स ने भी मुझे पूर्ण सहयोग दिया उन्होने समय समय पर मेरी रचनाएँ बदली भी। कुल मिलाकर मेरा अनुभव बेहतरीन रहा।

indiBooks : अब तक पुस्तक प्रकाशन के दौरान प्रकाशकों का सहयोग या उनके साथ पुस्तक प्रकाशन अनुभव कैसा रहा?

शाहाना परवीन : मुझे खुशी है कि मैने अपना एकल संग्रह प्राची पब्लिकेशन्स के द्वारा प्रकाशित करवाया है। इस पब्लिकेशन्स के विषय में मै कुछ भी नहीं जानती थी पर इस पब्लिकेशन्स के काम के कारण आज मै इसे जान गई हूँ। मेरा अनुभव बेहतरीन, लाजवाब, शानदार रहा जो मै हमेशा याद रखूगीं। सबसे मैने बहुत कुछ सीखा। मै इस क्षेत्र मे अंजान थी। सबने मुझे नई रोशनी दिखाकर मेरा मार्ग प्रशस्त किया। मै सभी का हृदय से बहुत बहुत आभार प्रकट करती हूँ और सबको धन्यवाद देती हूँ।

indiBooks : आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?

शाहाना परवीन : अगर आप लिखना चाहते हैं तो खूब लिखिये। अपने मन के सभी अच्छे बुरे विचारों को लेखनी के माध्यम से बाहर निकाल दीजिये। फिर उन्हे पढ़कर देखिए कि उनमें सकारात्मकता कितनी है? जिसमे भी सकारात्मकता दिखाई पड़े उसे ही जीवन मे अपना लीजिए। लिखते रहने से आप को मन की शांति मिलेगी और आप स्वयं को जान पायेंगे। समाज व लोगो को अच्छा साहित्य देने का प्रयास कीजिए। याद रखिये साहित्य समाज का दर्पण होता है। सादा जीवन उच्च विचार वाली सोच रखकर आगे बढ़ते रहिये।

अगर करना चाहते हो
जीवन मे कुछ तो,
मन मे करो विचार।
परिश्रम से मिलेगी तुम्हे सफलता,
मिलेगी शांति और
मिलेगा भरपूर प्यार।
जो भी है मन में रखो सामने,
करते रहो प्रयास।
ना हीं घबराओ ना ही डरो,
हिम्मत ना कभी हार।।
एक दिन होगीं सरल राहें
मिलेगी तुम्हें खुशियाँ हज़ार।।

‘लम्हों की खामोशियाँ’ की लेखिका शाहाना परवीन जी साक्षात्कार पूर्व में भी प्रकाशित हो चुका है। शाहाना परवीन जी का पूर्व में प्रकाशित साक्षात्कार पढ़ें।

शाहाना परवीन जी की पुस्तक ‘लम्हों की खामोशियाँ’ को आप अमेजन और फ्लिपकार्ट से प्राप्त कर सकते है। आपकी पुस्तक के लिंक नीचे दिए गये है। आप अपने पसंदीदा ऑनलाइन स्टोर से प्राप्त कर सकते हैं।

About the Book

“लम्हों की खामोशियाँ” काव्य संग्रह में मैने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने मन के विचारों को स्वतंत्र व सरल भाषा में व्यक्त किया है। यह मात्र काव्य संग्रह नहीं है बल्कि यह मेरे जीवन के अच्छे-बुरे अनुभव हैं, जिन्हें मैंने जिस प्रकार अनुभव किया, उन्हें उसी तरह ही पन्नों पर उकेरने का प्रयास किया है। मेरा प्रयास रहा है कि प्रत्येक विषय पर मेरी रचना हो, काफी हद तक मुझे सफलता भी मिली है। आशा है कि मेरे मन के भाव आपके हृदय को छूने का प्रयास करेगें।
-शाहाना परवीन (लेखिका)

prachi
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