‘अस्तित्व’ काव्य संग्रह की लेखिका शशि जैसवार जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों प्राची डिजिटल पब्लिकेशन द्वारा आकाश ठठेर उर्फ लखनवी आकाश जी द्वारा संपादित काव्य संग्रह ‘अस्तित्व‘ प्रकाशित किया गया है। ‘अस्तित्व’ में दो कवियों शशि जैसवार जी एवं आकाश ठठेर जी की रचनाएं शामिल हैं, अस्तित्वा की लेखिका शशि जैसवार जी से indiBooks द्वारा एक साक्षात्कार किया गया था, जिसे हमारे सम्मानित पाठकों के लिए प्रकाशित किया जा रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि आपको शशि जी के साथ किया गया साक्षात्कार जरूर पसंद आयेगा। पेश है ‘अस्तित्व’ काव्य संग्रह की लेखिका शशि जैसवार जी से साक्षात्कार-

indiBooks : शशि जैसवार जी, नमस्कार। हम आपका शुक्रिया करना चाहते हैं क्योंकि आपने हमें साक्षात्कार के लिए अपना कीमती समय दिया। यदि आप अपने शब्दों में आप अपना परिचय देंगें, तो सम्मानित पाठक आपके बारे मे ज्यादा जान पायेंगे?

Shashi Jaiswar : मैं शशि जायसवार, वैसे तो गृहणी हूँ। पठन-पाठन में रुचि रखती हूँ, उत्तर प्रदेश के इटावा शहर में जन्म हुआ। ग्वालियर, मध्य प्रदेश से बीए किया और दिल्ली से टीचर ट्रेनिंग के अलावा नोएडा से बीएड किया। वर्तमान में नोएडा में निवास कर रही हूँ।

indiBooks : शशि जी, किसी भी लेखक या लेखिका के लिए पहली प्रकाशित पुस्तक बहुत ही मायने रखती है और उसके प्रकाशन की खुशी अलग ही होती है, क्या आप उसे शब्दों में बता सकती हैं?

Shashi Jaiswar : शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है, इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

indiBooks : आपकी सहयोगी लेखक के रूप में पहली पुस्तक पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

Shashi Jaiswar : सहयोगी के रुप में ‘अस्तित्व’ मेरी पहली पुस्तक है। इससे पहले दो-तीन सांझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। इसमें स्त्री मन की सारी संवेदनाएं समाहित है यह पुस्तक मेरे लिए विशेष है।

indiBooks : सहयोगी लेखक के रूप में आपकी पुस्तक ‘अस्तित्व’ पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है, उसके बारे में जानकारी दे, ताकि पाठक आपकी किताब के बारे में ज्यादा जान सकें?

Shashi Jaiswar : ‘अस्तित्व’ में स्त्री मन की आह, चाह, दर्द, ख़ुशी भी शामिल है। इस पुस्तक में एक तरह से स्त्री का सारा ‘अस्तित्व’ है।

indiBooks : शशि जी, पुस्तक प्रकाशित कराने का विचार कैसे बना या किसी ने प्रेरणा दी?

Shashi Jaiswar : कवि सम्मेलन वगैरह में काव्य पाठ करती थी। बस धीरे-धीरे कारवां बढ़ता गया, कुछ लोग जुड़ते गए, जिसका नतीजा आप सबके सामने है।

indiBooks : आपने पहली रचना का सृजन कब किया और साहित्य जगत में आगमन कैसे हुआ?

Shashi Jaiswar : करीब 28 साल पहले घर का माहौल थोड़ा पढ़ने वाला था। पिता जी टीचर थे, तो लिखना पढ़ना चलता रहता था।

indiBooks : अब तक के साहित्यिक सफर में ऐसी रचना कौन सी है, जिसे पाठकों की सबसे ज्यादा प्रतिक्रिया मिली?

Shashi Jaiswar : मेरी एक रचना ‘कारवां’, जिसे सबसे ज्यादा पसंद किया गया।

indiBooks : शशि जी, साहित्य जगत से अब तक आपको कितनी उपलब्धियाँ / सम्मान प्राप्त हो चुके हैं?

Shashi Jaiswar : लगभग दर्जनों सम्मान अब तक प्राप्त हो चुकें है, लेकिन कुछ सम्मान जो मुझे याद हैं, वो इस प्रकार हैं- वैदेही अलंकार सम्मान, गुरु गौरव सम्मान, अखिल भारतीय सम्मान, पुष्पांजलि सम्मान। ये सभी सम्मान मेरे लिए बहुत खास है क्योंकि यह सब मुझे प्राप्त होने वाले प्रथम सम्मान है।

indiBooks : पुस्तक ‘अस्तित्व’ के लिए रचनाओं के चयन से लेकर प्रकाशन प्रक्रिया तक के अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगी?

Shashi Jaiswar : हाँ! जैसा कि पुस्तक का शीर्षक है ‘अस्तित्व’ तो इससे संबंधित अपनी स्त्री की पहचान और उसके अनुभवों के आधार पर चयन करना था। उसके लिए थोड़ा अंदर से डर भी था थोड़ी सी खुशी भी थी कि पाठकों की प्रतिक्रिया कैसी होगी। घबराहट और बेचैनी दोनों थी।

indiBooks : शशि जी, आप सबसे ज्यादा लेखन किस विद्या में करतीं है? और क्या इस विद्या में लिखना आसान है?

Shashi Jaiswar : हाँ! वियोग श्रृंगार रस यह दोनों ही हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में घटित होता रहता है, इसमें लिखना मेरे ख्याल से मेरे लिए थोड़ा आसान है।

indiBooks : शशि जी, आप अपनी रचनाओं के लिए प्रेरणा कहां से प्राप्त करते है?

Shashi Jaiswar : रचनाएँ तो हमारे आसपास की ही होती हैं, बस उन्हें समझने की जरूरत है।

indiBooks : आपके जीवन में प्राप्त विशेष उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहें?

Shashi Jaiswar : हमारे प्रिय भूतपूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय एपीजे अब्दुल कलाम के जन्मदिन के उपलक्ष में आयोजित एक कवि सम्मेलन में ‘कलाम सम्मान’ से नवाजा गया। जो मेरे लिए विशेष महत्व रखता है।

indiBooks : हर लेखक का अपना कोई आईडियल होता है, क्या आपका भी कोई आईडियल लेखक या लेखिका हैं? और आपकी पसंदीदावि किताबें जिन्हें आप हमेशा पढ़ना पसंद करती हैं?

Shashi Jaiswar : पुराने लेखकों में शरदचंद्र चटोपाध्याय औश्र आज की युवा पीढ़ी में अमीश त्रिपाठी हैं। मेरी पसंदीदा किताब विष्णु प्रभाकर की ‘आवारा मसीहा’ है।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?

Shashi Jaiswar : यही कि आजकल हिन्दी कहीं विलुप्त होती जा रही है। इसी से हमारी-आपकी पहचान है। आज की युवा पीढ़ी को इसे समझने की जरूरत है।

indiBooks :साहित्य सृजन के अलावा अन्य शौक या हॉबी, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?

Shashi Jaiswar : पेंटिंग, घर की साज-सज्जा करना पसंद है।

indiBooks : शशि जी, क्या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?

Shashi Jaiswar : जी नारी के मनोदशा पर, वो क्या महसूस करती हैं, उसपर लिखने की कोशिश में हूँ।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?

Shashi Jaiswar : जी बिल्कुल! लोग पसन्द करते रहेंगे और मैं लिखती रहूंगी।

indiBooks : आप अपने अज़ीज शुभचिन्तकों, पाठकों और प्रशंसकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?

Shashi Jaiswar : यही कि आप ‘अस्तित्व’ पढ़ें और उस पर अपनी प्रतिक्रिया जरुर दें ।आपके प्यार की हमें सख्त जरूरत है।

About the book ‘Astitva’

‘Astitva’ is a compilation of the best poems of two poets. The poetry compilation has Akash Thather Lakhnavi from Lucknow and poetess Shashi Jaiswar from Etawah. ‘Astitva’ is a compilation of both poets.

prachi

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