काव्य संग्रह ‘ये कविता ही नही मेरा दिल है’ के लेखक सुभाष चन्द्र नौटियाल जी से साक्षात्कार

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पिछले दिनों हमें लेखक एवं शिक्षक सुभाष चन्द्र नौटियाल जी का साक्षात्कार प्राप्त हुआ है। उत्तराखंड निवासी सुभाष जी की अब तक दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। आपको उनके साक्षात्कार को पढ़कर उनके विचारों से रूबरू होने का अवसर प्राप्त होगा।

indiBooks : कृपया संक्षेप में अपने शब्दों में अपना परिचय दें?
सुभाष चंद्र नौटियाल : मेरा नाम सुभाष चंद्र नौटियाल है। मेरे पिता स्वर्गीय पंडित रतनमणि नौटियाल एवं माताजी श्रीमती कमलेश्वरी देवी है एवं मेरा मूल निवास उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जनपद का बादसी ग्राम है। मैं वर्तमान में राजकीय महाविद्यालय नई टिहरी में प्राध्यापक गणित के पद पर कार्यरत हूँ और पूर्व में केंद्रीय विद्यालय संगठन में स्नातकोत्तर शिक्षक गणित के पद पर कार्यरत था।

indiBooks : हाल ही में प्रकाशित अपनी नई किताब के बारे में बताएं?
सुभाष चंद्र नौटियाल : मेरा हाल ही में काव्य संग्रह “ये कविता ही नही मेरा दिल है” प्रकाशित हुआ है एवं एक बुक “अनसुलझे प्रश्न कुछ सच्चाई कुछ काल्पनिकता” जो ऑनलाइन किंडल पर उपलब्ध है। मेरी बहुत सी कविताएं एवं लेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते है, जिनमे प्रमुख ओम तरंग मासिक पत्रिका, सर्व भाषा एवं अन्य पत्रिकाएं है।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरित हुए?
सुभाष चंद्र नौटियाल : मै अपने स्कूल के समय से ही लेखन में रुचि रखता हूँ। मेरे द्वारा कुछ कहानियां एवं निबंध भी लिखे गए है और वर्तमान में काव्य संग्रह एवम पहाड़ की जीवन शैली पर पुस्तक लिखने में व्यस्त हूँ।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
सुभाष चंद्र नौटियाल : कविता एवं लेख।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
सुभाष चंद्र नौटियाल : लेखन एक ऐसा माध्यम है, जो आपको सदैव ही उत्साहित रखता है और आपको कभी नकारात्मक विचारों की और नही जाने देता है। आप सदैव ही समाज से जुड़े रहने का प्रयास करते है और सबसे बड़ी बात आप अपने को और सबको आनंदित करने के कुछ पलों के साक्षी बनते है।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं?
सुभाष चंद्र नौटियाल : अभी एक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका है एवं दो काव्य संग्रह जिनमे लगभग 70 -70 कविताएं है प्रकाशित करवाने है लेकिन अच्छे पब्लिशर की तलाश जारी है, जो लेखक की भावनाओं के साथ साथ उसकी मेहनत को मूर्त रूप देने के लिए सहयोग करे।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
सुभाष चंद्र नौटियाल : आधुनिक समय मे कुमार विश्वाश जी की “कोई दीवाना कहता है” एवं धेनुमानस ग्रंथ के रचयिता संत गोपाल मणि जी एवं बहुत से अन्य कवि व लेखक पूर्व में रामधारी सिंह दिनकर जी, हरिवंश राय बच्चन और सभी नाम लेना यहां संभव नही है लेकिन जिनकी कविताएं, कहानियां आपको नया मार्ग बताए वह सभी प्रिय है।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
सुभाष चंद्र नौटियाल : जैसा कि मेरा विषय गणित है तो वास्तव में गणित के प्रश्नों में व्यस्त रहने का अलग ही आनंद है और गणित और लेखन के अलावा समय ही कहाँ।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
सुभाष चंद्र नौटियाल :
यह तो शुरुवात है।
अभी बहुत से पड़ाव बाकी है
क्या होगा कल ये तो नही पता
लेकिन जब तक प्राण है तब तक
जहां को समझना बाकी है।
यही शब्द मेरे भावना है अंतिम समय तक समाज से एवं हर वर्ग से जुड़ने का प्रयास रहेगा।

About the ‘Ye Kavita Hi Nahi Mera Dil Ha’

As The Name Of This Poetry Collection Is “Ye Kavita Hi Nahi Mera Dil Hae “This Is Not Only Poems For Me ,It Is My Emotions ,Feeling And My Observation This Book Is Collection Of Various Hindi Poems About Different Aspect Of Life,How Parents Sacrifice Their Lives For Children ,Importance Of Nature,Himalayas ,Few Poems For Children ,True Love And So Many Present Issues And Also This Collection Which Satirizes The Social Evils Catechism And Communism. This Collection Is For All Age Group People.

 

prachi

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Subhash Chandra Nautiyal

Thanks indiBooks review