साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ की लेखिका विमला शर्मा “बोधा” जी से साक्षात्कार

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नन्हें-मुन्नों के लिए सृजित साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के सभी सम्मानित लेखकों से एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार indiBooks द्वारा किया गया है। बता दें कि ‘बाल काव्य’ साझा काव्य संग्रह का संपादन खेम सिंह चौहान ‘स्वर्ण’, अर्चना पांडेय ‘अर्चि’, निकिता सेन’दीप’ और डॉ. मीना कुमारी सोलंकी ‘मीन’ जी द्वारा किया गया है। संपादकीय टीम द्वारा रचनाओं का स्तरीय चयन और संपादन कार्य बहुत ही शानदार है, जिसके लिए indiBooks की ओर से पुन: ढ़ेरों शुभकामनाएँ। इसी सीरीज़ में हम आपके लिए काव्य संग्रह की एक लेखिका विमला शर्मा “बोधा” जी का साक्षात्कार आपके लिए प्रस्तुत कर रहें है।

indiBooks : यदि आप अपने शब्दों में हमारे और आपके सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देंगें, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
विमला शर्मा “बोधा” : मैं अपने सम्मानित पाठकों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए अपने बारे में बताना चाहती हूँ कि सबसे पहले यह बताना चाहती हूँ कि मैं एक गृहिणी हूँ। कविता लिखना मेरा शौक है और आत्मतुष्टि के लिए मैं लिखती हूँ। इससे मुझे सुकून मिलता है।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा बाल काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
विमला शर्मा “बोधा” : साझा बाल काव्य संग्रह में शामिल होने के पीछे बच्चों के मन की कोमल भावनाओं को संवारना अच्छी अच्छी रचनाओं से उनके बालमन को सुसंस्कृत करना और उसे वीर, धीर और साहसी बनाना मेरा ध्येय है।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
विमला शर्मा “बोधा” : मुझे विभिन्न साहित्य संस्थनों द्वारा कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। (1)पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी तेजपुर से सृजन सम्मान। (2)नूतन साहित्य कुंज से—कुंज प्रसून। (3)सखी साहित्य परिवार से —साहित्य रत्न। तथा(4)केशव देव गिनिया बजाज स्मृति सम्मान —शिलॉग से।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं?
विमला शर्मा “बोधा” : 1980 से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। शुरू शुरू में लिखी बहुत सी रचनाएँ काल के गर्त में समा गई इसीलिए एक धरोहर के रूप में अंतर्मन के भावों की अभिव्यक्ति को प्रकाशित करवाना चाहती हूँ पुस्तक के रूप में।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
विमला शर्मा “बोधा” : मैं ज्यादातर अतुकांत काव्य रचना करती हूँ। मेरी पसंदीदा लेखन विधि भी यही है।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
विमला शर्मा बोधा : जीवन के इर्द गिर्द घटनेवाली घटनाएँ, मानवीय संवेदनाएँ तथा प्रकृति के बिखरे सौंदर्य के अनमोल खजाने से मैं प्रेरित होकर लिखती हूँ। यही मेरी प्रेरणा का श्रोत है।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
विमला शर्मा “बोधा” : मेरे जीवन की सबसे उपलब्धि का वो क्षण है—जब मैंने अपनी पहली कविता “पिता तुम वटवृक्ष हो आँगन का” उन्हें सुनाई। उन्होंने मेरे सर पर हाथ फेरते हुए आशीर्वाद दिया कि रचना के क्षेत्र में तुम बहुत आगे जाओगी। खुशी की मारे मेरी आँखों से आँसू छलक पडे़। पिता का आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी व यादगार उपलब्धि रही है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
विमला शर्मा “बोधा” : मेरी सबसे प्रिय लेखिका कालजयी कवियित्री आद. महादेवी वर्मा हैं। उनकी रचनाओं में अंतरद्वंद, वीरह, प्रेम और विछोह का अद्भुत मिश्रण है।

“जो तुम आ जाते एकबार”

“मैं नीर भरी दुख की बरली”

“मैं हैरान हूँ”

“सखी वो मुझसे कहकर जाते”

मैं इनकी रचनाओं से बहुत प्रभावित हूँ।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
विमला शर्मा “बोधा” : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य का विभिन्न संस्थाओं द्वारा सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि देश विदेश में भी अच्छा प्रचार व प्रसार हो रहा है। भाषा की गुणवत्ता को बढ़ाना होगा और साहित्य के मर्म को पहचानना होगा।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
विमला शर्मा “बोधा” : स्वाध्याय करना, अंताक्षरी और हाउजी खेलना, गाने सुनना, पिक्चर देखना और स्वेटर बुनना। खाली समय में मैं यही सब काम करती हूँ।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
विमला शर्मा “बोधा” : अपने पाठकों और प्रशंसकों को मैं यही संदेश देना चाहती हूँ कि —वे मेरी रचना पढ़ें और उत्साहवर्धन करते हुए और अच्छा लिखने को प्रेरित करते रहें।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
विमला शर्मा “बोधा” : भविष्य में पुस्तक प्रकाशित करने की योजना है जो मेरी कविताओं पर आधारित होगी।

indiBooks : नवोदित लेखकों को क्या सुझाव देना चाहेगें?
विमला शर्मा “बोधा” : नवोदित रचनाकारों को शुभकामनाएँ देते हुए यही कहना चाहूँगी कि—हौसला हमेशा बुलंद रखें, सफलता स्वतः ही आपके कदम चूमेगी।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
विमला शर्मा “बोधा” : बेशक,मैं भविष्य में लेखन की दुनिया में तब तक बनी रहना चाहती हूँ जब तक मेरी लेखनी साथ देगी।

About the ‘Bal Kavya – Poetry Collection’

‘बाल कविता’ यानी बच्चों के लिए लिखी गयी कविता, जिसमें बच्चों की शिक्षा, जिज्ञासा, संस्कार एवं मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर रचना की गई हो। वह चाहे माँ की लोरियों के रूप में हो, या पिता की नसीहतों के रूप में, या बच्चों के आपस के खेल-खेल में हो। इसमें भले ही निरर्थक शब्दों की ध्वनियाँ होती हैं, पर बड़ी आकर्षक होती हैं। ऐसी ही कविताओं को इस साझा संग्रह में शामिल किया गया है, जो नन्हें बच्चों को बहुत पसंद आयेगी।

prachi

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