गज़ल संग्रह ‘सहर’ की लेखिका वर्षा धामा जी से साक्षात्कार

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गज़ल संग्रह ‘सहर’ की लेखिका वर्षा धामा जी से हमें कल ही साक्षात्कार प्राप्त हुआ है। पेश है उनसे वार्ता के कुछ अंश-

indiBooks : कृपया संक्षेप में अपने शब्दों में अपना परिचय दें?
वर्षा धामा : मेरा नाम वर्षा धामा है, मैं जिला बागपत के कस्बा खेकड़ा की रहने वाली हूँ, मैने बी.एस.सी. मैथ्स से करने के बाद बी.एड. किया है, मैंने कई वर्ष तक अध्यापिका बनकर भी शिक्षा दी हैं।

indiBooks : पूर्व में प्रकाशित अपनी किसी किताब के बारे में बताएं?
वर्षा धामा : मेरी अब तक एक ही पुस्तक प्रकाशित हुई है, जो कि अब से 2 साल पहले प्रकाशित हुई थी ।

indiBooks : पुस्तक प्रकाशन के लिए विचार कैसे बना या कैसे प्रेरित हुए?
वर्षा धामा : मुझे शुरू से ही लिखने का शौक रहा है,कम।उम्र का ये शौक बड़े होकर सपना बन गया और मेरी लेखनी सबको अच्छी लगने लगी तो सभी ने कहा कि मुझे अपनी पुस्तक प्रकाशित करानी चाहिए, लोगो के कहने से हौसला मिला तो लगन और ज्यादा बढ़ गयी आखिर में पुस्तक भी प्रकाशित हो गयी।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
वर्षा धामा : मेरी पसंदीदा लेखन विधि हिंदी है, बचपन से हिंदी बोलते है और हिंदी ही सुनते है, मुझे हिंदी से लगाव है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
वर्षा धामा : इतना ही कहना चाहती हूँ कि अपने हौसले बुलंद रखना हमेशा, सपने खुद पूरे हो जाएंगे।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं?
वर्षा धामा : हाँ, मैं एक उपन्यास का विचार रही हूँ, थोड़ा लिखा भी है। मेरे उपन्यास एक लड़की पर आधारित होगा जिसमें आज के समाज की सच्चाई भी लोगो के सामने आयेगी।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय लेखक / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
वर्षा धामा : मुझे सबसे ज्यादा हरिवंशराय बच्चन जी की रचनाएं पसंद है, उनकी मधुशाला मैंने बहुत बार पढ़ी है।

indiBooks : लेखन के अलावा आपके अन्य शौक क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
वर्षा धामा : लेखन के अलावा मैं खेलना पसंद करती हूँ, न्यूज़ देखती हूँ, थोड़ा सोशल मीडिया पर भी वक़्त बिताती हूँ, बस यही सब मुझे पसंद है।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
वर्षा धामा : जी बिल्कुल,मेरा सपना है ये जिसको मैं कभी नही तोड़ना चाहूंगी।

आप वर्षा धामा जी की किताब को अमेजन से प्राप्त कर सकते है।

 

prachi

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