साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ की लेखिका प्रियंका गौड़ जी से साक्षात्कार

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नन्हें-मुन्नों के लिए सृजित साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के सभी सम्मानित लेखकों से एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार indiBooks द्वारा किया गया है। बता दें कि ‘बाल काव्य’ साझा काव्य संग्रह का संपादन खेम सिंह चौहान ‘स्वर्ण’, अर्चना पांडेय ‘अर्चि’, निकिता सेन’दीप’ और डॉ. मीना कुमारी सोलंकी ‘मीन’ जी द्वारा किया गया है। संपादकीय टीम द्वारा रचनाओं का स्तरीय चयन और संपादन कार्य बहुत ही शानदार है, जिसके लिए indiBooks की ओर से पुन: ढ़ेरों शुभकामनाएँ। इसी सीरीज़ में हम आपके लिए काव्य संग्रह की एक लेखिका प्रियंका गौड़ जी का साक्षात्कार आपके लिए प्रस्तुत कर रहें है।

indiBooks : यदि आप अपने शब्दों में हमारे और आपके सम्मानित पाठकों को अपना परिचय देंगें, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
प्रियंका गौड़ : मैं प्रियंका गौड़ पत्नी श्री विकास शर्मा हूँ। वर्तमान में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हूँ और अपने परिवार के साथ जयपुर, राजस्थान में निवासरत हूँ। पाठक और प्रशंसक ई-मेल vikas.sharma2586@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

मेरी प्रकाशित रचनाएं : बहुत वर्षों से लिख रही थी, पर कोई जानकारी ना होने के कारण कुछ नहीं प्रकाशित हुआ। लेकिन कुछ दिनों पहले मित्र के कहने पर लेखन नए स्तर पर शुरू किया और पहली रचना “मंदिरों के नहीं, मौत के पट बंद है” का प्रकाशन सरोज साहित्य त्रैमासिक पत्रिका में हुआ।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा बाल काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
प्रियंका गौड़ : बाल काव्य में शामिल होने का एक ही कारण है कि आजकल के बच्चों ने किताबो की दुनिया से दूर अलग ही दुनिया बसा ली है, पहले की तरह वापस बच्चे भी अपने खाली समय में रुचिकर पुस्तकों को पढ़े और अपने आस पास के समाज के बारे में नयी जानकारियां प्राप्त करें।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं?
प्रियंका गौड़ : साहित्यिक सेवा के लिए एस. एस. जी. इंटर कॉलेज देहरादून से प्रमाण पत्र और प्रतीक चिन्ह और सरोज साहित्यिक पत्रिका से मार्च 2020 का प्रथम स्थान प्रमाण पत्र।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं?
प्रियंका गौड़ : लेखन को एक नए सिरे से शुरू 2019 से किया।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
प्रियंका गौड़ : मेरी पसंदीदा लेखन विधि में कविताएं लिखना और समाज में हो रहे करंट अफेयर्स के प्रति लेख लिखना मुझे बहुत अच्छा लगता है। समाज में हो रहे अन्याय के प्रति लिखना भी मेरे लिए रुचिकर है।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
प्रियंका गौड़ : मेरी रचनाओं के लिए प्रेरणा मेरा अंतर्मन है। परिवार में किसी का दूर-दूर तक लेखन से नाता नहीं रहा और मेरी एक मित्र ने मुझे वापस से लिखने को प्रेरित किया और उसके बाद लिखना जारी है।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
प्रियंका गौड़ : वैसे तो जीवन में होने वाली हर नवीन घटनाएं एक यादगार पल होती है पर मेरे जीवन की एक अजीब घटना है। मैंने नए स्कूल में कक्षा 8 में एडमिशन लिया था और मैं हमेशा से ही अंतर्मुखी व्यक्तित्व की रही थी और स्कूल में भी बहुत कम बोलती थी। मैने तो मेरी इस कमजोरी को मेरे अध्यापकों ने मेरी शैक्षिक कमजोरी समझ लिया और 60 बच्चो की क्लास में मुझे कमजोर बच्चो में गिना जाने लगा। बोर्ड की परीक्षा हुई और जब में पूरी क्लास में मैंने 83% के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया तो सभी अध्यापकों का मेरे लिए प्यार और लगाव देखकर मै बहुत खुश हुई थी। ये मेरे जीवन की सबसे यादगार घटना में से एक है।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय प्रियंका गौड़ / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
प्रियंका गौड़ : मेरी पसंदीदा किताबे है “रश्मिरथी” और “मीरा चरित” और पसंदीदा लेखक “प्रेमचंद”।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
प्रियंका गौड़ : जैसे-जैसे समाज में अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है, तो ऐसे लग रहा है जैसे हिंदी तो कुछ समय में लुप्त सी हो जाएगी, पर हिंदी साहित्य का प्रचार प्रसार करके और हिंदी साहित्य को बढ़ावा देकर हम समाज में हिंदी को फिर से प्रचार प्रसार दिला सकते है। एक घटना याद है, मुझे मै एक पुस्तक मेले में गई थी। वहां पर 18 से 25 वर्ष के आयु के लड़के लड़कियां ज्यादा इंग्लिश साहित्य को रुचि दे रहे थे। तो लेखकों और साहित्यकार अपना योगदान देकर हिंदी भाषा के पुनः उत्थान में अपनी भूमिका निभा सकते है।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य रुचियाँ क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
प्रियंका गौड़ : मुझे पुराने गाने सुनना, गजल सुनना बहुत पसंद है और उपन्यास पढ़ना भी मेरी एक विशेष रुचि में से है।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
प्रियंका गौड़ : मेरा तो सभी से एक ही संदेश है हमेशा देश हित के लिए कार्य करे, अपने स्वार्थ से उपर उठकर हमे देश के लिए भी सोचना चाहिए और देश हित में कार्य कर रहे लोगो का हमेशा साथ देकर उनका मनोबल बढ़ाने का कार्य करते रहना चाहिए।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
प्रियंका गौड़ : पुस्तक प्रकाशन का विचार है और देश के युवाओं के लिए लिखना मेरा पहला काम होगा।

indiBooks : साथी नवोदित लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
प्रियंका गौड़ : मै स्वयं नवोदित हूँ। तो शायद मै अभी सलाह देने लायक नहीं हूं। फिर भी ये कहना चाहूंगी कि कलम को खुद के लिए नहीं हमेशा पर हित के लिए काम लेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा। बस सत्य लिखते रहिए एक ना एक दिन तो मंजिल मिलेगी ही।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
प्रियंका गौड़ : बस मां शारदा का हाथ सर पर रहना चाहिए और यही चाहते है कि लिखना-पढ़ना जिंदगी भर यूं ही चलता रहे।

About the ‘Bal Kavya – Poetry Collection’

‘बाल कविता’ यानी बच्चों के लिए लिखी गयी कविता, जिसमें बच्चों की शिक्षा, जिज्ञासा, संस्कार एवं मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर रचना की गई हो। वह चाहे माँ की लोरियों के रूप में हो, या पिता की नसीहतों के रूप में, या बच्चों के आपस के खेल-खेल में हो। इसमें भले ही निरर्थक शब्दों की ध्वनियाँ होती हैं, पर बड़ी आकर्षक होती हैं। ऐसी ही कविताओं को इस साझा संग्रह में शामिल किया गया है, जो नन्हें बच्चों को बहुत पसंद आयेगी।


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