साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ की लेखिका शाहाना परवीन जी से साक्षात्कार

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नन्हें-मुन्नों के लिए सृजित साझा काव्य संग्रह ‘बाल काव्य’ के सभी सम्मानित लेखकों से एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार indiBooks द्वारा किया गया है। बता दें कि ‘बाल काव्य’ साझा काव्य संग्रह का संपादन खेम सिंह चौहान ‘स्वर्ण’, अर्चना पांडेय ‘अर्चि’, निकिता सेन’दीप’ और डॉ. मीना कुमारी सोलंकी ‘मीन’ जी द्वारा किया गया है। संपादकीय टीम द्वारा रचनाओं का स्तरीय चयन और संपादन कार्य बहुत ही शानदार है, जिसके लिए indiBooks की ओर से पुन: ढ़ेरों शुभकामनाएँ। इसी सीरीज़ में हम आपके लिए काव्य संग्रह की एक लेखिका शाहाना जी का साक्षात्कार आपके लिए प्रस्तुत कर रहें है।

indiBooks : शाहाना जी, यदि आप अपने शब्दों में अपना परिचय सम्मानित पाठकों को दे, तो पाठकों बहुत अच्छा लगेगा?
शाहाना परवीन :
सभी को मेरा नमस्कार। सबसे पहले मैं आप सभी का हृदय से धन्यवाद करती हूँ कि आपने मुझे इस योग्य समझा कि मै अपने विषय मे कुछ कह सकूँ। मेरा नाम शाहाना परवीन है। मै अपने परिवार के साथ पटियाला पंजाब मे रहती हूँ। यह मेरा स्थाई पता नहीं है। हमारा ट्रांसफर होता रहता है। मेरा स्थाई पता मुज़फ्फरनगर यू०पी०है।

मैं शाहाना परवीन, पिता का नाम श्री यूसुफ अली और माता का नाम श्रीमती शमीम आरा, जन्म स्थान मुज़फ्फरनगर (यू०पी०) से हूँ। मैं एक गृहणी हूँ।

शिक्षा के रूप में बी०ए० (ऑनर्स), एम०ए० समाज शास्त्र अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अलीगढ़, एन.टी.टी. (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) कोर्स अंबाला कैंट हरियाणा और सह पाठ्यक्रम गतिविधियाँ एन.एस.एस. (राष्ट्रीय सेवा योजना) एएमयू अलीगढ़ प्राप्त की है।

मेरी रुचियों में कहानी लेखन, कविता, समीक्षा, आलेख आदि और एंकरिंग करना शामिल है। पाठक एवं प्रशंसक ई मेल :- shahana2020parveen@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

indiBooks : हाल ही में आपका साझा बाल काव्य संग्रह प्रकाशित हुआ है, इसमें शामिल होने के पीछे क्या कारण रहा?
शाहाना परवीन : आपने एक गीत सुना होगा कि “बचपन हर ग़म से बेगाना होता है…..” जी हाँ, इसी मे मेरा उत्तर छिपा है। बचपन में बच्चे चिंता मुक्त होकर अपना जीवन जीते हैं। बच्चों का मन मस्तिष्क शांत रहता है। हृदय कोमल होता है। एक वही उम्र होती है जब बच्चे मस्ती की पाठशाला मे खूब मस्ती करते हैं। सब धर्मों के बच्चे आपस मे प्यार- प्रेम से रहते व खेलते हैं। एक दूसरे के घर जाकर खाते- पीते हैं। उनकी दृष्टि में मित्रता व खेल कूद से बढ़कर कुछ नहीं होता। मैने इस बाल काव्य संग्रह मे शामिल होकर अपने बचपन के हर लम्हे को जिया है। मैने बाल काव्य मे अपनी रचनाएँ लिखते समय महसूस किया कि उस समय मेरा चित एकदम शांत था जिसमे किसी बात को लेकर मेरे हृदय मे कोई प्रश्न नहीं था । केवल एक मुसकुराहट थी मेरे होठों पर जो अभी भी अपनी रचनाओं को याद करने के पश्चात आ गई है। बाल कविताएँ पढ़ने के बाद पाठक के चेहरे पर एक रौनक सी आ जाती है । लगता है मानो काफी समय से वह इस शांति व आराम की तलाश मे था।

बच्चों के बारे मे लिखना समझो स्वयं अपने आपको बच्चा समझना होता है । तभी हम उनके विषय मे कुछ लिख सकते हैं। मेरी दो बेटियां हैं अभी उनका बचपन हैं मै उन्हें देखती हूँ कि वे दोनो बिना किसी लालच या स्वार्थ के खेलती रहती हैं। अपने मन के भावों को पेंटिंग के माध्यम से कागज़ पर उतारती रहती हैं। उनकी बातें मासूमियत से भरी होती हैं जिनमें छल कपट नहीं होता।यह काव्य संग्रह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और कहीं ना कहीं यह मेरे बचपन की याद दिला देता है।

इस काव्य के सम्पादक जी को मै धन्यवाद कहूगीं कि उन्होने अर्थ पूर्ण काव्य प्रकाशन के विषय मे विचार किया। बाल काव्य वास्तव मे अपने आप मे अनोखा काव्य है। मुझे प्रसन्नता है कि मै इस बाल काव्य का हिस्सा बनी।

indiBooks : साहित्यिक सेवा के लिए आपको अब तक कितने सम्मान प्राप्त हुए हैं? क्या आप उनके बारे मे कोई जानकारी देना चाहेंगे?
शाहाना परवीन: मै एक गृहणी हूँ और मेरी रुचि लेखन मे होने के कारण मै अपने मन के विचारो को लिखती हूँ। जो कुछ भी मै सोचती हूँ समाज के विषय मे, परिवार व देश के विषय में यहाँ तक की स्वयं के बारे में भी वह सब मै लेखनी के माध्यम से दूसरो तक पहुचाने का प्रयास करती हूँ। मैने अभी हाल ही मे लिखना आरंभ किया है और मुझे कुछ सम्मान पत्र मिले हैं जो निम्नलिखित प्रकार से हैं:-

सम्मान का विवरण :-

1. कथा गौरव सम्मान,
2. काव्य स्वरांजलि सम्मान,
3. श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान,
4. स्वामी विवेकानंद साहित्य सम्मान
5. उत्तम सृजन हेतु
6. उत्कृष्ट काव्य सृजन
7. रत्नावली सम्मान
8. उत्कृष्ट सृजन व रचनात्मक सहयोग सम्मान
9. काव्य प्रतियोगिता सम्मान पत्र
10. त्रिदिवसीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन सम्मान पत्र
11. मधुशाला गौरव सम्मान
12. काव्य सृष्टि साहित्य सम्मान

indiBooks : आपकी पहली पुस्तक के बारे में बताएं?
शाहाना परवीन: मैने साझां काव्य संग्रह व लघु कहानी साझां संग्रह मे ही लिखा है। अभी तक मेरा कोई भी एकल संग्रह प्रकाशित नहीं हुआ है।

indiBooks : आप कब से लेखन कर रहें हैं और पुस्तक प्रकाशित करने का विचार कैसे बना?
शाहाना परवीन: मै जब दसवीं कक्षा मे पढ़ती थी। तब मै अपने पिताजी को कुछ लिखते हुए देखती थी। ऐसा नहीं है कि मेरे पिताजी कोई कवि या लेखक थे। उन्हे लिखने मे रूचि थी। मेरा स्कूल का कार्य भी वही कराते थे। स्कूल मे भाषण प्रतियोगिता होती तो पिताजी ही मुझे सब लिखकर दिया करते थे। धीरे-धीरे मैने उनकी लिखी पक्तियों को पढ़ा जो स्वतंत्र होती थीं, जिनमे जोश भरा होता था। वहीं से मुझे प्रेरणा मिली की मै भी लिख सकती हूँ। परन्तु समय कम होने के कारण स्कूल कालेज फिर विश्वविद्यालय की पढ़ाई सबमे इतना समय ही नहीं मिला कि मै कुछ लिख पाती परन्तु बीच बीच मे कोई विचार आता था तो मैं उसे अपनी कॉपी के पीछे लिख लेती थी। विवाह हो गया फिर समय नहीं मिला पर अब जब मेरी बेटियाँ इस लायक हो गई है कि अपने काम स्वयं कर लेती है तो मै अपने मन के विचारो और भावों को लिखने लगी हूँ। मैने अभी तक कोई एकल संग्रह नहीं लिखा है। मेरे कई सांझा काव्य संग्रह व कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं।

indiBooks : आपकी पसंदीदा लेखन विधि क्या है, जिसमें आप सबसे अधिक लेखन करते हैं?
शाहाना परवीन: मै साधारण शब्दों व भाषा का प्रयोग कर अपनी रचनाएँ लिखती हूँ। मै अपने विचारो को उस भाषा मे लिखना पसंद करती हूँ जिसे सब लोग सरलता से समझ सकें। मेरी भाषा शैली स्वतंत्र व सरल है। मै हर उस लेखन विधि को पसंद करती हूँ जो मेरे मन को छू जाती है और जिससे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

indiBooks : आप अपनी रचनाओं के लिए कहां से प्रेरणा प्राप्त करते हैं?
शाहाना परवीन: मै जब भी समाज मे कुछ बुरा होते हुए देखती हूँ सुनती हूँ या किसी पर अत्याचार होते देखती या सुनती हूँ तो लेखनी स्वयं ही लिखना शुरु कर देती है। कभी कभी मेरी बेटियो की मासूमियत से भरी बातें मुझे लिखने की ओर प्रेरित करता है। मै अपने पिताजी से बहुत प्यार करती हूँ । जब भी उनका चेहरा सामने आता है अनायास ही मन से शब्द निकलकर कागज़ पर उतर आते हैं। उदाहरण के लिए…मेरे पिताजी अब हमारे बीच नहीं हैं परन्तु जब कभी उनकी तस्वीर देखती हूँ या उनको याद करती हूँ दिल से शब्द निकलते हैं…..

“पिताजी से प्यारा संसार मे कोई और नहीं है
मेरे पापा जी जितना अच्छा दूसरा कोई और नहीं है…
क्या लिखूँ पिताजी के विषय मे
जब भी कुछ लिखती हूँ आँख मेरी भर आती है।।”

मेरा ऐसा मानना है कि लिखने के लिए किसी विषय की आवश्यकता नहीं होती आप जो भी महसूस करते हैं उसी को कागज़ पर लिखकर अपने विचार सामने प्रकट कर सकते हैं।

indiBooks : आपके जीवन की सबसे यादगार उपलब्धि, जिसे आप हमारे और अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे?
शाहाना परवीन: मैने 2019 मे साहित्य के क्षेत्र मे कदम रखा। मेरी रचना हिंदी दैनिक समाचार पत्र वर्तमान अंकुर के सम्पादक श्री निर्मेश त्यागी जी द्वारा सम्पादित सांझा काव्य संग्रह में प्रकाशित हुई थी। उस समय पुलवाना मे आंतकवादियो ने एक बस पर हमला कर दिया था। जिसमे काफी लोग मारे गए थे। पुलवाना मे हुई घटना से क्षुब्ध होकर मैने वर्तमान अंकुर की “बज़्म- ए-हिंद” नामक सांझा काव्य संग्रह मे अपनी एक रचना लिखी थी। जिसमे एक बच्चा अपने पापा को याद कर रहा है, जो पुलवाना मे हुई घटना के शिकार हो गए हैं। मैने अपनी रचना मे बच्चे के मन के भावो को दर्शाया था। उसी के सम्बंध मे मुझे काव्य संग्रह के विमोचन हेतु नोएडा आमंत्रित किया गया था। वहीं मुझे पहला सम्मान पत्र मिला और वहीं गोल्ड मैडिल प्राप्त हुआ।

मै पटियाला से अपने परिवार के साथ वहाँ गई थी और मुझे बहुत प्रसन्नता हुई थी। उस पल को मै और मेरा परिवार कभी नहीं भूल सकते। मेरे जीवन की सुनहरी यादें जिसने मुझे आगे बढ़ने मे सहयोग दिया।

indiBooks : आपका सबसे प्रिय उत्तर / लेखिका और उनकी रचनाएँ / किताब?
शाहाना परवीन: मुझे सभी कहानीकार, साहित्यकार, लेखक लेखिकाएँ, कवि-कवियत्री पसंद हैं। कबीर, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त, सुमित्रानंदन पंत, निदा फाज़ली, आदि अनेको कवि हैं जिनकी रचनाओ को पढ़कर मन को शांति मिलती है। कबीर दास जी की रचनाएँ आडंबर से मुक्त रचनाएँ हैं।उनकी रचनाएँ प्रेरणा देती प्रतीत होती हैं।

मुंशी प्रेम चंद की कहानियों मे वास्तविकता की झलक मिलती है। महादेवी वर्मा की एक कहानी गिल्लू मुझे बहुत अधिक प्रभावित करती है ऐसा लगता है मानो सब कुछ हमारे साथ ही हो रहा है। महादेवी वर्मा को आधुनिक युग की मीरा भी कहते हैं उनकी रचनाएँ बोलती सी प्रतीत होती हैं। गिल्लू कहानी मे महादेवी वर्मा और गिल्लू के बीच का प्यार बहुत अनगिनत था जिसने मुझे भावुक कर दिया। गिल्लू कहानी की एक पक्तिं “रात मे अंत की यातना में वह अपने झूले से उतरकर मेरे बिस्तर पर आया और ठंडे पंजो से मेरी उंगली पकडकर हाथ से चिपक गया जो बचपन मे पकड़ी थी।” महादेवी ने बहुत सुंदर शब्दो मे कहानी को वास्तविक रूप से प्रकट किया है। मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ नमक का दरोगा, गोदान, निर्मला, गबन, ईदगाह, महादेवी वर्मा की नीरजा, यामा,पथ के साथी, दीप शिखा, प्रथम आयाम आदि हैं। निदा फाज़ली का एक शेर मन को छू देता है….घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर ले, किसी रोते हुए बच्चे को हसाया जाएं….गहराई लिए हुए बात कही है फाज़ली जी ने। अंत मे यही कहूगीं कि मुझे सभी जो लेखन क्षेत्र मे हैं और लेखन से सम्बंध रखते हैं सभी बहुत पसंद हैं। मै सबका आदर करती हूँ।

indiBooks : हिन्दी भाषा और हिन्दी साहित्य के उत्थान पर आप कुछ कहना चाहेंगे?
शाहाना परवीन : मै हिंदी भाषा को बहुत पसंद करती हूँ मेरा ऐसा विचार है कि अपने मन के विचारो को सरलता से आदान प्रदान करने का साधन हिंदी भाषा के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं। हम सरलता से अपनी बात सामने वाले को समझा सकते हैं सम्मान सूचक शब्दो का प्रयोग कर सकते हैं, जो सिर्फ हिंदी ही म़े होते ह़ै जैसे आप, शब्द। अंग्रेज़ी मे “यू” तुम्हारे लिए और आप दोनो के लिए प्रयोग होगा परन्तु हिंदी मे तुम और आप अलग अलग श्रेणी मे प्रयुक्त होते हैं।

हमे हिंदी के उत्थान के लिए अधिक से अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। रचनाएँ, कहानियाँ, काव्य संग्रह आदि सब हिंदी ही मे प्रकाशित होने चाहिए। जिस प्रकार लोग अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करके गर्व महसूस करते हैं ऐसा ही गर्व हिंदी मे भी करना चाहिए।

indiBooks : वर्तमान व्यवसाय और लेखन के अलावा आपके अन्य रुचियाँ क्या हैं, जिन्हे आप खाली समय में करना पसंद करते हैं?
शाहाना परवीन: मै एक गृहणी हूँ और घर से पूर्ण रुप से जुड़ी हूँ। मै लिखने में रुचि रखती हूँ इसलिए अपने लेखन के लिए समय अवश्य निकालती हूँ। मै कहानी, लघु कथा, कविताएँ, समीक्षा आदि लिखती हूँ । इसके अतिरिक्त मुझे एंकरिंग करना बहुत अच्छा लगता है। मै जब भी समय होता है किसी कहानी, कविता, समाचार को पढ़ती हूँ और एंकरिंग करती हूँ। मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है। मुझे पेंटिंग का भी शौक है। मैने अपने बच्चों को रंग भरना, कला, पेंसिल शेडिंग आदि सब सिखाया है।

indiBooks : अब तक प्रकाशकों के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
शाहाना परवीन: बहुत अच्छा रहा। सबसे मैने बहुत कुछ सिखा। मै इस क्षेत्र मे अंजान थी। सबने मुझे नई रोशनी दिखाकर मेरा मार्ग प्रशस्त किया। मै सभी प्रकाशको का हृदय से बहुत बहुत आभार प्रकट करती हूँ और सबको धन्यवाद देती हूँ।

indiBooks : अपने पाठकों और प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
शाहाना परवीन: मैने अपनी रुचि को पूरा करने के लिए बहुत प्रतीक्षा की परन्तु हार नहीं मानी। मेरे जीवन मे बहुत कठिनाई आई पर मैने हिम्मत नहीं हारी। एक बार जो मन मे ठान लिया उसे पूरा करने का भरसक प्रयास किया। मै सभी से केवल इतना ही कहना चाहती हूँ कि हमे जीवन मे कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। यदि हम कोई सपना देखें तो उसे पूरा करने का प्रयास अवश्य करें।

जो समय बीत गया उसके विषय मे कभी ना सोचें।

मेरा मनपंद वाक्य…. “वो वक्त भी नहीं रहा यह वक्त भी नहीं रहेगा।” कभी ना कभी सफलता अवश्य मिलेगी। इसलिए कोशिश जारी रखो।

indiBooks : क्या वर्तमान या भविष्य में कोई किताब लिखने या प्रकाशित करने की योजना बना रहें हैं? यदि हां! तो अगली पुस्तक किस विषय पर आधारित होगी?
शाहाना परवीन: नहीं, अभी इस ओर कोई ध्यान नहीं है ना ही ऐसा कुछ विचार किया है। अभी विषय का भी नहीं सोचा कि क्या विषय होगा? अगर होगा भी तो समाज कल्याण से सम्बंधित विषय होगा।

indiBooks : नवोदित लेखकों को क्या सलाह देना चाहेगें?
शाहाना परवीन : अगर आप लिखना चाहते हैं तो खूब लिखिये। अपने मन के सभी अच्छे बुरे विचारों को लेखनी के माध्यम से बाहर निकाल दीजिये फिर उन्हे पढ़कर देखिए कि उनमे सकारात्मकता कितनी है? जिसमे भी सकारात्मकता दिखाई पड़े उसे ही जीवन मे अपना लीजिए। लिखते रहने से आप को मन की शांति मिलेगी और आप स्वयं को प्राप्त जान पायेंगे। दूसरी महत्वपूर्ण बात कभी भी लेखनी से वह मत लिखिये जो किसी के दुख का कारण बने या किसी को आघात पँहुचायें। समाज व समाज के लोगो को अच्छा साहित्य देने का प्रयास कीजिए। याद रखिये साहित्य समाज का मार्गदर्शन करता है। सादा जीवन उच्च विचार वाली सोच रखकर आगे बढ़ते रहिये।

indiBooks : क्या आप भविष्य में भी लेखन की दुनिया में बने रहना चाहेंगे?
शाहाना परवीन : जी, बिल्कुल। यहाँ तक पहुचने के लिए मैने बहुत परिश्रम किया है। मेरा सपना है लेखन। मै सदैव इसके साथ चलना चाहूगीं। मै अभी बहुत कुछ लिखना चाहती हूँ। अपने सभी सपने पूरा करना चाहती हूँ। लेखन के माध्यम से समाज व देश की सहायता करना चाहती हूँ।

शौक तो बहुत हैं मानव तेरे
पर, तू कर ऐसे काम
जिनसे मिले तुझे शांति
अपने विचारों को रख वहाँ
फिर देख
होगें तेरे पूरे सपने
मिलेगी तुझे भरपूर शांति।।
ना घबरा ना ही डर
आगे बढ़ता रह निरन्तर
एक दिन होगीं सरल राहें
मिलेगी तुझे वहीं शांति।।

About the ‘Bal Kavya – Poetry Collection’

‘बाल कविता’ यानी बच्चों के लिए लिखी गयी कविता, जिसमें बच्चों की शिक्षा, जिज्ञासा, संस्कार एवं मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर रचना की गई हो। वह चाहे माँ की लोरियों के रूप में हो, या पिता की नसीहतों के रूप में, या बच्चों के आपस के खेल-खेल में हो। इसमें भले ही निरर्थक शब्दों की ध्वनियाँ होती हैं, पर बड़ी आकर्षक होती हैं। ऐसी ही कविताओं को इस साझा संग्रह में शामिल किया गया है, जो नन्हें बच्चों को बहुत पसंद आयेगी।

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